ओडिशा के प्रगतिशील किसानों के लिए आय बढ़ाने का रोडमैप

ओडिशा के किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में फसल विविधीकरण पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम !!

वाराणसी, 9 फरवरी 2026 –ओडिशा के किसानों की आय में वृद्धि और उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के उद्देश्य से भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (IIVR), वाराणसी में 9 से 13 फरवरी 2026 तक एक विशेष फसल विविधीकरण प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण ओडिशा सरकार द्वारा प्रायोजित है, जिसकी थीम “सब्जी फसलों के माध्यम से फसल विविधीकरण” रखी गई है। इस पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में ओडिशा के बलांगीर जिले से आए 27 प्रगतिशील किसान भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य किसानों को सब्जी आधारित खेती, आधुनिक कृषि नवाचारों और वैल्यू चेन आधारित उत्पादन प्रणाली से परिचित कराकर उनकी आय बढ़ाना है।

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रोपण से मूल्य संवर्धन तक पर फोकस !!

प्रशिक्षण के दौरान किसानों को रोपाई से लेकर प्रोसेसिंग, मूल्य संवर्धन और विपणन तक की पूरी वैल्यू चेन की जानकारी दी जा रही है। संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश कुमार के मार्गदर्शन एवं प्रधान वैज्ञानिक एवं कार्यक्रम समन्वयक डॉ. नीरज सिंह के नेतृत्व में विशेषज्ञों द्वारा व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

पहले दिन किसानों को दिखीं उन्नत तकनीकें !!

प्रशिक्षण के पहले दिन किसानों ने सब्जी उत्पादन से जुड़ी कई उन्नत तकनीकों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। इसमें ब्रिमैटो और पोमैटो (बैंगन-टमाटर एवं आलू-टमाटर) जैसी ग्राफ्टिंग तकनीक, रोग-प्रतिरोधी मिर्च एवं टमाटर की किस्में, तथा उच्च उपज देने वाली मिर्च, बैंगन, मूली और विंग्ड बीन की किस्में शामिल रहीं। इसके साथ ही किसानों को अतिरिक्त आय के स्रोत के रूप में मशरूम उत्पादन और मधुमक्खी पालन, जैविक खाद निर्माण तकनीक जैसे वर्मी कम्पोस्ट और नाडेप पद्धति की जानकारी भी दी गई।

भविष्य की खेती पर विशेष सत्र !!

कार्यक्रम में हाइड्रोपोनिक्स, स्मार्ट पॉलीहाउस, और ऑर्गेनिक फार्मिंग मॉडल जैसे भविष्य उन्मुख कृषि विकल्पों पर भी विस्तृत चर्चा की गई, जिससे किसान जलवायु परिवर्तन के जोखिम को कम कर सकें।

क्यों महत्वपूर्ण है यह प्रशिक्षण !!

यह प्रशिक्षण किसानों को
जलवायु जोखिम से निपटने, • सब्जी आधारित फसल विविधीकरण अपनाने,
नए बाजार अवसर तलाशने, और खेती को टिकाऊ व लाभकारी बनाने में मदद करेगा।

आगे की योजना !!

प्रशिक्षण के आगामी सत्रों में प्रोसेसिंग, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग और मार्केटिंग पर विशेष जोर दिया जाएगा, साथ ही विशेषज्ञों के साथ हैंड्स-ऑन सेशन भी आयोजित किए जाएंगे। यह कार्यक्रम ओडिशा के किसानों के लिए आधुनिक, व्यावहारिक और टिकाऊ खेती की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।