तवांग से देशभर तक पहुंची परंपरा की खुशबू: लॉन्च हुआ ‘रक्ता राइस’
तवांग (अरुणाचल प्रदेश): पूर्वोत्तर भारत की पहाड़ियों से एक खास सौगात देश के बाजार में पहुंची है। तवांग की वादियों में उगाया गया प्रीमियम ऑर्गेनिक स्वदेशी लाल चावल ‘रक्ता राइस’ अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने सोमवार को तवांग जिला के ऑर्गेनिक लाल चावल ‘रक्ता’ को आधिकारिक रूप से लॉन्च किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह चावल राज्य की पारंपरिक खेती की समझ, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और सतत कृषि प्रणाली का प्रतीक है। यह अनूठा उत्पाद स्थानीय कृषि परंपरा और जैविक खेती की मिसाल माना जा रहा है।
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स्थानीय पहल से राष्ट्रीय पहचान की ओर
‘रक्ता राइस’ का उपज और विपणन रक्ता ऑर्गेनिक के माध्यम से किया जा रहा है, जो पेमा त्सेवांग की पहल है। वे ग्रेंखार गांव से संबंध रखते हैं और मोनपा समुदाय की पारंपरिक कृषि विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य स्थानीय किसानों की आजीविका मजबूत करना और पारंपरिक फसलों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराना है।
शून्य-रसायन खेती की मिसाल
तवांग की ऊंची घाटियों में इस लाल चावल की खेती पूरी तरह शून्य-रसायन और पर्यावरण अनुकूल पद्धति से की जाती है। पारंपरिक बीजों और प्राकृतिक संसाधनों के सहारे उगाया गया यह चावल जैविक गुणवत्ता का प्रतीक है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह चावल प्राकृतिक रूप से एंटीऑक्सीडेंट, आयरन और आवश्यक खनिजों से भरपूर है, जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माने जाते हैं।
विरासत और बीज संरक्षण का संकल्प
‘रक्ता राइस’ केवल एक खाद्य उत्पाद नहीं, बल्कि यह स्थानीय बीज किस्मों के संरक्षण और कृषि विरासत को बचाने का अभियान भी है। इस पहल से पारंपरिक ज्ञान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और किसानों को बेहतर बाजार मूल्य दिलाने में मदद मिलेगी।
स्थानीय स्तर पर यह कदम आत्मनिर्भरता और जैविक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
चित्र: सौजन्य सोशल मीडिया