आयुष मंत्रालय की अनूठी पहल: पारंपरिक ज्ञान से आधुनिक चिकित्सा तक

औषधीय पौधों को मिलेगा नया जीवन, एम्स में बनेगा ‘हर्बल गार्डन’

नई दिल्ली। आयुष मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (एनएमपीबी) ने औषधीय पौधों के संरक्षण और जन जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए दो महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समारोह निर्माण भवन, नई दिल्ली में केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव की अध्यक्षता में संपन्न हुआ।

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🔹दुर्लभ औषधीय पौधों के लिए पहला समझौता

पहला समझौता एनएमपीबी और ईश वेद-बायोप्लांट्स वेंचर, पुणे के बीच हुआ, जिसका उद्देश्य ऊतक संवर्धन तकनीकों द्वारा दुर्लभ, लुप्तप्राय और संकटग्रस्त औषधीय पौधों के जर्मप्लाज्म का संरक्षण करना है। इससे आयुष उद्योग को उच्च गुणवत्ता वाले औषधीय पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी।

जाधव ने इस पहल को “औषधीय पौधों की जैव विविधता के संरक्षण की दिशा में एक ठोस कदम” बताया और कहा कि यह समझौता पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान को आधुनिक विज्ञान से जोड़ने का एक प्रभावी माध्यम बनेगा।

🔹एम्स परिसर में बनेगा राष्ट्रीय औषधीय पौध उद्यान

दूसरा त्रिपक्षीय समझौता एनएमपीबी, अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) और एम्स, नई दिल्ली के बीच किया गया। इसके तहत एम्स परिसर में राष्ट्रीय औषधीय पौध उद्यान की स्थापना की जाएगी। इस औषधीय गार्डन का उद्देश्य न केवल पौधों के संरक्षण को बढ़ावा देना है, बल्कि मरीजों, विद्यार्थियों और आगंतुकों में औषधीय पौधों के महत्व की जन-जागरूकता फैलाना भी है।

🗣️ मंत्री का वक्तव्य

समारोह में अपने विचार व्यक्त करते हुए  प्रतापराव जाधव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 2047 तक ‘स्वस्थ और आत्मनिर्भर भारत’ का सपना हमारे कार्यों को दिशा देता है। औषधीय पौधों के संरक्षण की दिशा में यह कदम न केवल वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अहम है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक और पारंपरिक धरोहर को भी संजोने का प्रयास है।”

उन्होंने समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले सभी संस्थानों को बधाई देते हुए कहा कि इस साझेदारी से न केवल अनुसंधान और संवर्धन को बल मिलेगा, बल्कि आयुष उद्योग में रोजगार, कृषि से जुड़ी गतिविधियों, और नवाचारों के नए अवसर भी पैदा होंगे।

📈  समझौतों के लाभ

  • औषधीय पौधों की उत्कृष्ट किस्मों का संरक्षण और संवर्धन।

  • ऊतक संवर्धन विधियों से पौधों की व्यापक खेती और आपूर्ति सुनिश्चित।

  • दूर-दराज से आने वाले मरीजों व छात्रों के लिए शैक्षिक और चिकित्सीय लाभ।

  • औषधीय पौधों पर आधारित साक्ष्य-आधारित अनुसंधान और जनभागीदारी को बढ़ावा।

सारांश

दोनों समझौता ज्ञापन आयुष मंत्रालय के साक्ष्य-आधारित संरक्षण, अनुसंधान केंद्रित दृष्टिकोण और जन सहभागिता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हैं। यह पहल न केवल भारत के औषधीय पादप क्षेत्र को मजबूती देगी, बल्कि ग्लोबल मंच पर भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली की प्रासंगिकता को भी उजागर करेगी।