कृषि विज्ञान केंद्र भ्रमण से बढ़ा महिलाओं का आत्मविश्वास!

पोकरण में महिला नेत्री समूह का कृषि विज्ञान केंद्र भ्रमण

पोकरण में महिला नेत्री समूह ने किया कृषि विज्ञान केंद्र, पोकरण का भ्रमण
तीन दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण में महिला सशक्तिकरण, पोषण एवं कृषि तकनीकों पर हुआ विशेष फोकस

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पोकरण। भावी निर्माण सोसाइटी, अप्रवा एनर्जी एवं सीआईआई फाउंडेशन के संयुक्त सहयोग से राजस्थान के दस जिलों से आई महिला नेत्रियों के लिए पोकरण में तीन दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य महिला सशक्तिकरण, नेतृत्व विकास एवं आजीविका संवर्धन से जुड़ी जानकारियां प्रदान करना रहा।

💰 वित्तीय साक्षरता और बजट प्रबंधन पर विशेष सत्र

प्रशिक्षण के दौरान मास्टर ट्रेनर शैलेंद्र कोष्टी ने प्रतिभागियों को वित्तीय साक्षरता, बजट निर्माण एवं बचत प्रबंधन के गुर सिखाए। महिलाओं को घरेलू आय-व्यय संतुलन और आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए व्यवहारिक जानकारी दी गई।

🌱 पोषण वाटिका और जैविक खेती पर व्याख्यान

कृषि विज्ञान केंद्र, पोकरण के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. दशरथ प्रसाद ने पोषण जागरूकता, पोषण वाटिका, किचन गार्डन एवं ऑर्गेनिक बीज उत्पादन पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक तरीके से खेती को अपनाकर महिलाएं इसे स्वरोजगार से जोड़ सकती हैं।

👩‍🏫 क्षमतावर्धन एवं क्षेत्रीय विकास की जानकारी

सीआईआई फाउंडेशन की प्रज्ञा श्रीवास्तव एवं आकांक्षा मिश्रा ने महिला नेत्रियों का क्षमतावर्धन प्रशिक्षण आयोजित किया। वहीं अप्रवा एनर्जी के चेतन और सोनू शर्मा ने जैसलमेर एवं आसपास के क्षेत्रों में संचालित महिला एवं सामुदायिक विकास कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संस्था अंतिम पंक्ति की महिलाओं एवं बच्चों तक सशक्तिकरण योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

🚜 कृषि विज्ञान केंद्र का शैक्षणिक भ्रमण

प्रशिक्षण के अंतिम दिन महिला समूह ने कृषि विज्ञान केंद्र, पोकरण का भ्रमण कर कृषि में रोजगार की संभावनाओं, नवीन तकनीकों और केंद्र की गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की। डॉ. दशरथ प्रसाद ने केंद्र द्वारा संचालित प्रशिक्षण, प्रदर्शन, प्रक्षेत्र परीक्षण, बीज उत्पादन, कृषक गोष्ठी एवं अनुसंधान से खेत तक तकनीक पहुंचाने की प्रक्रियाओं पर प्रकाश डाला।

🌾 शुष्क जलवायु में कृषि और पशुपालन की संभावनाएं

महिलाओं ने पोषण वाटिका, क्रॉप कैफेटेरिया, वर्मी कम्पोस्ट, नाडेप इकाई, थार शोभा खेजड़ी, जैविक एवं प्राकृतिक खेती मॉडल का अवलोकन किया। शुष्क एवं अतिशुष्क जलवायु में उपयुक्त फसल उत्पादन एवं पशुपालन की तकनीकों पर चर्चा की गई।

पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. रामनिवास ने अनुसंधान, सहकारी समितियां, डेयरी उद्योग, बकरी पालन एवं पशुपालन आधारित आजीविका पर विस्तार से जानकारी दी।

🌟 वैज्ञानिक खेती से जुड़कर बढ़ेगी आय

विशेषज्ञों ने कहा कि यदि प्रारंभिक स्तर से ही कृषि को वैज्ञानिक पद्धति से अपनाया जाए तो इसे सफल व्यवसाय में बदला जा सकता है। जैसलमेर जिले की जलवायु के अनुरूप फसल उत्पादन तकनीकों पर महिलाओं की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया।

कार्यक्रम में भावी निर्माण सोसाइटी, चाकसू से रमा शर्मा एवं गिरिराज प्रसाद शर्मा भी उपस्थित रहे।