थिम्पू में हुई पहली संयुक्त तकनीकी कार्य समूह बैठक, कृषि क्षेत्र में गहराएंगे रिश्ते!
थिम्पू/नई दिल्ली। भारत और भूटान ने कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्रों में आपसी सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे घनिष्ठ संबंधों को और मजबूत करने के साथ ही खाद्य सुरक्षा, सतत कृषि और ग्रामीण समृद्धि के क्षेत्र में नये अवसर खोलेगा।
इस MoU पर हस्ताक्षर भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव देवेश चतुर्वेदी और भूटान के कृषि एवं पशुपालन मंत्रालय (MoAL) के सचिव थिनले नामग्येल ने थिम्पू में किए। इस मौके पर दोनों पक्षों ने सहयोग की नई संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की और कृषि क्षेत्र में साझा प्राथमिकताओं को रेखांकित किया।
MoU का महत्व और सहयोग के क्षेत्र
यह समझौता कृषि अनुसंधान एवं नवाचार, पशुधन स्वास्थ्य और उत्पादन, फसल कटाई के बाद प्रबंधन, मूल्य शृंखला विकास तथा ज्ञान और विशेषज्ञता के आदान-प्रदान जैसे कई अहम क्षेत्रों में सहयोग का ढांचा तैयार करेगा। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि कृषि और सम्बद्ध क्षेत्रों में तकनीकी सहयोग न केवल किसानों के जीवन स्तर को बेहतर करेगा बल्कि खाद्य सुरक्षा और पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने में भी सहायक होगा।
पहली संयुक्त तकनीकी कार्य समूह (JTWG) बैठक
MoU पर हस्ताक्षर के तुरंत बाद पहली संयुक्त तकनीकी कार्य समूह (Joint Technical Working Group-JTWG) बैठक आयोजित की गई। इसमें दोनों देशों ने कार्य समूह की रूपरेखा (Terms of Reference) और प्राथमिक सहयोग क्षेत्रों को तय किया। बैठक को भारत-भूटान संबंधों में कृषि क्षेत्र की दिशा में एक अहम मील का पत्थर बताया गया।
भारत ने साझा किए अपने अनुभव
बैठक के दौरान सचिव देवेश चतुर्वेदी ने भारत के कृषि क्षेत्र में हाल के वर्षों में किए गए सुधारों और नई पहलों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने डिजिटल समाधानों के उपयोग, जलवायु-लचीली कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने, जोखिम प्रबंधन, किसानों को ऋण और सहूलियत उपलब्ध कराने के साथ-साथ नवाचारों को बढ़ावा देने पर बल दिया।
भूटान की ओर से भी कृषि और पशुपालन क्षेत्र की चुनौतियों और प्राथमिकताओं को साझा किया गया। दोनों पक्षों ने कृषि, पशुपालन, कृषि विपणन व सहकारिता, खाद्य प्रसंस्करण, बीज क्षेत्र, अनुसंधान एवं तकनीकी सहयोग और क्षमता निर्माण जैसे विषयों पर गहन चर्चा की।
आगे का रोडमैप
बैठक के अंत में दोनों देशों ने सहमति जताई कि अगली JTWG बैठक भारत में आयोजित की जाएगी। इसके लिए पारस्परिक सुविधा के अनुसार तिथि तय होगी।
भारत-भूटान रिश्तों में मजबूती
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता केवल कृषि सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे भारत और भूटान के बीच पारंपरिक मित्रता और सहयोग को और गहरा करने का मार्ग प्रशस्त होगा।
कृषि सचिव की यह भूटान यात्रा दोनों देशों के बीच नियमित आदान-प्रदान और सहयोग की पुरानी परंपरा को और आगे बढ़ाने का प्रतीक मानी जा रही है।