किसानों की आय बढ़ाने पर ICRISAT का फोकस!

बुंदेलखंड में ICRISAT महानिदेशक का दौरा: जमीनी प्रभाव की गहन समीक्षा !!

बुंदेलखंड -सूखा प्रभावित बुंदेलखंड क्षेत्र में कृषि को जलवायु अनुकूल और टिकाऊ बनाने के उद्देश्य से अंतरराष्ट्रीय अर्ध-शुष्क उष्णकटिबंधीय फसल अनुसंधान संस्थान (ICRISAT) के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने हाल ही में उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड अंचल का विस्तृत दौरा किया। इस दौरान उन्होंने ललितपुर के पूरा बिरधा तथा झांसी के तहरौली जैसे प्रमुख परियोजना स्थलों का निरीक्षण कर रीजनरेटिव लैंडस्केप आधारित कार्यों की प्रगति और प्रभाव का आकलन किया।

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रीजनरेटिव लैंडस्केप परियोजनाओं का स्थलीय निरीक्षण !!

डॉ. पाठक ने खेत स्तर पर किए जा रहे मृदा संरक्षण, जल संरक्षण संरचनाओं, फसल विविधीकरण और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन से जुड़ी गतिविधियों को देखा। उन्होंने अधिकारियों और वैज्ञानिकों से परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति, चुनौतियों और भविष्य की रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की।

वैज्ञानिकों के सहयोग से हुआ दौरा !!

यह दौरा ICRISAT के मृदा एवं जल संरक्षण के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रमेश सिंह तथा प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. के. एच. अनंत के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। बुंदेलखंड क्षेत्र में कार्यरत ICRISAT टीम ने दौरे के दौरान परियोजना से जुड़ी तकनीकी जानकारियां साझा कीं।

किसानों और परियोजना लाभार्थियों से सीधा संवाद !!

नोटा, भगोरा, गुंडाहा और भदोखर गांवों के किसान एवं परियोजना लाभार्थी इस कार्यक्रम में शामिल हुए। किसानों ने बताया कि जल संरक्षण, मृदा सुधार और उन्नत कृषि तकनीकों को अपनाने से उत्पादन में सुधार के साथ-साथ खेती की लागत में भी कमी आई है।

प्राकृतिक संसाधन संरक्षण पर जोर !!

किसानों को संबोधित करते हुए डॉ. हिमांशु पाठक ने कहा कि बुंदेलखंड जैसे अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में जल, मृदा और जैव विविधता का संरक्षण ही कृषि की स्थिरता की कुंजी है। रीजनरेटिव कृषि मॉडल लंबे समय में किसानों की आय बढ़ाने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं।

राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान संस्थानों से संवाद !!

दौरे के दौरान डॉ. पाठक ने राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली (NARS) के विशेषज्ञों से भी बातचीत की। इसमें रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (RLBCAU), झांसी और राष्ट्रीय मत्स्य आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो, लखनऊ के वैज्ञानिक शामिल रहे। बैठक में संसाधनों के कुशल उपयोग और कृषि-मत्स्य एकीकरण पर विचार-विमर्श किया गया।

विद्यार्थियों को दिया प्रेरणादायी संदेश !!

डॉ. पाठक ने रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि भविष्य की कृषि जलवायु परिवर्तन के अनुरूप लचीली और नवाचार आधारित होनी चाहिए। उन्होंने युवाओं से अनुसंधान और क्षेत्रीय समस्याओं के समाधान में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

बांदा में उत्कृष्टता केंद्र की संभावित साइट का अवलोकन !!

ICRISAT महानिदेशक ने बुंदेलखंड कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (BUAT), बांदा का भी दौरा किया, जहां रेजिलिएंट एग्रीकल्चर पर प्रस्तावित उत्कृष्टता केंद्र की संभावित साइट का निरीक्षण किया गया। इस केंद्र के माध्यम से बुंदेलखंड में जलवायु अनुकूल कृषि तकनीकों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई गई।

बुंदेलखंड के लिए दीर्घकालिक लाभ की उम्मीद !!

विशेषज्ञों के अनुसार ICRISAT महानिदेशक का यह दौरा बुंदेलखंड क्षेत्र में टिकाऊ कृषि विकास, वैज्ञानिक सहयोग और किसानों की आय सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे क्षेत्र में दीर्घकालिक कृषि सुधार और संसाधन संरक्षण को नई गति मिलने की संभावना है।