वैज्ञानिकों और छात्रों से संवाद
उद्घाटन के पश्चात डॉ. एम. एल. जाट ने प्रयोगशाला का निरीक्षण किया और रोबोटिक्स एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में कार्य कर रहे वैज्ञानिकों एवं छात्रों से विस्तृत बातचीत की। उन्होंने इस अत्याधुनिक सुविधा की स्थापना के लिए टीम को बधाई देते हुए कहा कि ऐसी प्रयोगशालाएँ भारतीय कृषि को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाएँगी।
किसान-केंद्रित तकनीक पर जोर
अपने संबोधन में डॉ. जाट ने किसान-केंद्रित अनुसंधान एवं तकनीक विकास की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि अनुसंधान का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा जब नवाचार प्रयोगशालाओं से निकलकर किसानों के खेतों तक पहुँचेंगे और उनकी आय व उत्पादकता बढ़ाने में सहायक होंगे।
स्मार्ट मशीनीकरण और स्वचालन की जरूरत
डॉ. जाट ने कृषि मशीनीकरण की दक्षता बढ़ाने पर बल देते हुए कहा कि श्रम की कमी और बढ़ती लागत के इस दौर में स्वचालित एवं स्मार्ट मशीनें किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगी। उन्होंने सीधी कतार में बुवाई के लिए स्वचालित प्रणालियों के विकास का सुझाव दिया, जिससे यांत्रिक निराई-गुड़ाई को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
तकनीकों के व्यावसायीकरण पर बल
महानिदेशक ने कृषि अभियांत्रिकी प्रभाग द्वारा विकसित तकनीकों के बड़े पैमाने पर व्यावसायीकरण की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि तकनीकों को उद्योग और स्टार्टअप्स के माध्यम से किसानों तक पहुँचाने से उनका व्यापक प्रभाव सुनिश्चित किया जा सकता है।
प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण की पहल
डॉ. जाट ने किसानों, विद्यार्थियों और युवाओं के लिए उन्नत तकनीकों पर प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित करने की सिफारिश की, ताकि नई तकनीकों को अपनाने में आने वाली चुनौतियों को दूर किया जा सके।
प्रयोगशाला की प्रमुख विशेषताएं
इस अवसर पर आईसीएआर-आईएआरआई के निदेशक डॉ. च. श्रीनिवास राव ने बताया कि नवस्थापित प्रयोगशाला में कृषि रोबोट्स एवं स्वचालित प्रणालियों के डिज़ाइन, रैपिड प्रोटोटाइपिंग और प्रयोगशाला-स्तरीय परीक्षण के लिए आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
अनुसंधान और कौशल विकास का केंद्र
डॉ. राव ने कहा कि इस प्रयोगशाला का मुख्य उद्देश्य बुवाई, निराई-गुड़ाई, कटाई एवं निगरानी जैसे विभिन्न कृषि कार्यों के लिए स्वचालित एवं बुद्धिमान समाधान विकसित करना है। साथ ही यह प्रयोगशाला किसानों, छात्रों और कृषि पेशेवरों के लिए कौशल विकास एवं प्रशिक्षण का प्रमुख केंद्र भी बनेगी।
जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में एआई की भूमिका
डॉ. राव ने बदलते जलवायु और सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य में रोबोटिक्स एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि ये तकनीकें कार्यकुशलता बढ़ाने, श्रम-कठिनाई कम करने, संसाधनों के कुशल उपयोग और कृषि प्रणालियों की स्थिरता को मजबूत करने में सहायक होंगी।
गरिमामयी उपस्थिति
उद्घाटन समारोह में डॉ. अनुपमा सिंह, डीन एवं संयुक्त निदेशक (शिक्षा), डॉ. विश्वनाथन चिन्नुसामी (अनुसंधान), डॉ. आर. एन. पडारिया, संयुक्त निदेशक (प्रसार) सहित आईसीएआर-आईएआरआई के अनेक वरिष्ठ वैज्ञानिक, अधिकारी, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
धन्यवाद ज्ञापन और समापन
कार्यक्रम का समापन डॉ. पी. के. साहू द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने माननीय अतिथियों, वैज्ञानिकों, विद्यार्थियों और कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए रोबोटिक्स एवं एआई प्रयोगशाला की स्थापना में जुड़े सभी सदस्यों के सामूहिक प्रयासों की सराहना की।
स्मार्ट कृषि की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
आईसीएआर-आईएआरआई में रोबोटिक्स एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रयोगशाला की स्थापना को स्मार्ट मशीनीकरण, स्वचालन और डिजिटल कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है, जो भारतीय कृषि को आधुनिक, टिकाऊ और भविष्य-उन्मुख बनाने में सहायक सिद्ध होगी।