🐝 हिंगोली में शुरू हुआ राज्य स्तरीय मधुमक्खी पालन शिविर

🌾 किसानों को मिलेगा शहद उत्पादन का वैज्ञानिक प्रशिक्षण

हिंगोली, – कृषि विज्ञान केंद्र, तोंडापुर (हिंगोली) और कृषि विभाग, हिंगोली के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं मध अभियान अंतर्गत वर्ष 2025-26 के लिए राज्य स्तरीय मधुमक्खी पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ बड़े उत्साह के साथ किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 23 अगस्त से 29 अगस्त 2025 तक आयोजित किया जाएगा, जिसमें जिलेभर के चयनित किसान एवं प्रशिक्षणार्थी भाग ले रहे हैं।

उद्घाटन समारोह

कार्यक्रम का उद्घाटन कृषि विज्ञान केंद्र, तोंडापुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. पी. पी. शेलके के हाथों संपन्न हुआ। इस अवसर पर कलमनुरी तालुका कृषि अधिकारी  के. एम. जाधव, पाटील बी फार्म के संचालक दिनकर पाटील, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों के साथ जिले के चयनित प्रशिक्षणार्थी बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

डॉ. शेलके ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज के समय में मधुमक्खी पालन न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि यह किसानों के लिए पूरक व्यवसाय का एक मजबूत साधन भी बन सकता है इससे न केवल कृषि उत्पादन में वृद्धि होती है बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति मिलती है। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि पारंपरिक खेती के साथ इस तरह के नवीन व्यवसायों को अपनाकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम उठाएं।

तकनीकी मार्गदर्शन

प्रशिक्षण कार्यक्रम के पहले तकनीकी सत्र में दिनकर पाटील ने मधुमक्खी पालन के महत्व पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया। उन्होंने मधुमक्खियों की प्रजातियों की पहचान, उनकी उपयोगिता, छत्ते की देखभाल और शहद उत्पादन की आर्थिक संभावनाओं पर विस्तार से जानकारी दी।

इसके बाद कृषि विज्ञान केंद्र, तोंडापुर के प्रा. अजय कुमार सुगावे (विषय विशेषज्ञ – पादप संरक्षण कीटविज्ञान) ने मधुमक्खियों के जीवनचक्र, सामाजिक संरचना, रानी, मजदूर एवं नर मधुमक्खियों की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सही स्थान का चयन, उपयुक्त पेटी एवं उपकरणों का उपयोग और वैज्ञानिक तरीके से छत्ते का प्रबंधन ही सफल मधुमक्खी पालन की कुंजी है।

कार्यक्रम की विशेषताएं

इस अवसर पर प्रशिक्षणार्थियों ने भी अपना परिचय दिया और मधुमक्खी पालन से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने की उत्सुकता जताई। वसमत और कलमनुरी क्षेत्र के किसान  गजानन सोनटक्केउत्तम रिठेनिरंजन पोटे, कृष्णा खुडे,  कृष्णा इंगोले, नामदेव गिरी और  प्रकाश सोनटक्के ने कहा कि वे इस प्रशिक्षण से मधुमक्खी पालन की नई तकनीक सीखकर अपने खेतों और व्यवसाय में इसे अपनाना चाहते हैं।

कार्यक्रम का संचालन प्रा. अजय कुमार सुगावे ने किया जबकि आभार प्रदर्शन सौ. रोहिणी शिंदे (गृह विज्ञान विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र, तोंडापुर) ने किया। इस आयोजन को सफल बनाने में  मारुती कदम और  राहुल जाधव का विशेष योगदान रहा।

29 अगस्त तक चलेगा विशेष प्रशिक्षण

यह प्रशिक्षण शिविर 29 अगस्त 2025 तक जारी रहेगा। इस दौरान विभिन्न विषय विशेषज्ञ किसानों को मधुमक्खी पालन की गहन एवं व्यावहारिक जानकारी देंगे। प्रशिक्षण में मधुमक्खी पालन की आधुनिक तकनीक, शहद उत्पादन, मूल्य संवर्धन, विपणन एवं उद्योग से जुड़ी संभावनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की जाएगी।

चित्र: सौजन्य कृषि विज्ञान केंद्र, तोंडापुर, सोशल मीडिया

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