September 16, 2026 6:45 AM

Krishi Times

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“एक मछली एक धान” मॉडल से बढ़ेगी किसानों की आय

🐟 कुट्टनाड में मछली पालन के लिए केंद्र की बड़ी पहल

कोच्चि, – केरल के कुट्टनाड क्षेत्र में मछुआरा समुदाय की आजीविका को सशक्त बनाने और मछली पालन को नई ऊर्जा प्रदान करने के लिए केंद्र सरकार ने एक पायलट परियोजना शुरू करने की घोषणा की है। इस पहल की जानकारी केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा अल्पसंख्यक कार्य राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने कोच्चि स्थित आईसीएआर–केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (सीएमएफआरआई) में आयोजित बैठक के दौरान दी।

नई परियोजना के तहत आधुनिक और पारंपरिक जलीय कृषि पद्धतियाँ लागू की जाएंगी, जिनमें एकीकृत मत्स्य पालन, पिंजरे में मछली पालन, “एक मछली एक धान” पहल और बायोफ्लोक तकनीक शामिल हैं। मंत्री ने कहा कि इस कदम का प्राथमिक उद्देश्य कुट्टनाड क्षेत्र के किसानों की आय और जीवन स्तर को बेहतर बनाना है।

🐠 स्थानीय समुदाय को मिलेगा सशक्तिकरण

परियोजना के हिस्से के रूप में मत्स्य कृषक उत्पादक संगठन (एफएफपीओ) का गठन किया जाएगा ताकि समुदाय को संगठित कर मछली पालन और संबंधित गतिविधियों को सुव्यवस्थित किया जा सके। साथ ही, किसानों को जलीय कृषि से जुड़ी तकनीक और उद्यमिता में प्रशिक्षित करने के लिए व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

स्टार्टअप्स और रोजगार को बढ़ावा

यह पायलट परियोजना क्षेत्र में स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करेगी, विशेषकर फसल कटाई के बाद की गतिविधियों जैसे—प्रसंस्करण, सफाई, पैकिंग और विपणन में। इससे न केवल रोज़गार के नए अवसर बनेंगे, बल्कि मछली उत्पादों के मूल्य संवर्धन को भी बढ़ावा मिलेगा।

🐬 मीठे और खारे पानी की खेती पर फोकस

कुट्टनाड के विविध जलीय वातावरण को देखते हुए परियोजना को मीठे और खारे पानी की खेती में विभाजित किया जाएगा। इससे ऊपरी और निचले कुट्टनाड की विशेष परिस्थितियों के अनुरूप योजनाओं को लागू करना संभव होगा। इस दिशा में आईसीएआर अनुसंधान संस्थान, केंद्रीय एजेंसियां और कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) तकनीकी एवं वैज्ञानिक सहयोग देंगे।

विस्तृत रिपोर्ट जल्द

मंत्री जॉर्ज कुरियन ने बताया कि इस पहल के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) जल्द तैयार की जाएगी, जिससे कुट्टनाड क्षेत्र को स्थायी और ठोस आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है।

बैठक के दौरान पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर, मत्स्य विकास आयुक्त डॉ. मोहम्मद कोया, सीएमएफआरआई निदेशक डॉ. ग्रिंसन जॉर्ज और प्रधान वैज्ञानिक डॉ. इमेल्डा जोसेफ सहित विभिन्न शोध संस्थानों और सरकारी एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने भी विचार साझा किए।