भारत-जर्मनी साझेदारी से एग्री-पीवी तकनीक को बढ़ावा, जर्मन प्रतिनिधिमंडल ने किया आईसीएआर–आईएआरआई का दौरा
नई दिल्ली –भारत और जर्मनी के बीच कृषि और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देने के उद्देश्य से जर्मन प्रतिनिधिमंडल ने आईसीएआर–भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली का दौरा किया। यह प्रतिनिधिमंडल संघीय आर्थिक सहयोग और विकास मंत्रालय (BMZ) के संसदीय राज्य सचिव (उप मंत्री) जोहान सातहोफ के नेतृत्व में आया था।
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प्रतिनिधिमंडल ने संस्थान में स्थापित 100 किलोवाट क्षमता वाले एग्री-पीवी (AgriPV) पायलट प्रोजेक्ट का निरीक्षण किया, जिसे GIZ इंडिया के सहयोग से विकसित किया गया है। इस अवसर पर आईएआरआई के निदेशक डॉ. च. श्रीनिवास राव ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए संस्थान की अनुसंधान उपलब्धियों और स्वच्छ ऊर्जा आधारित कृषि प्रणाली को बढ़ावा देने के प्रयासों की जानकारी दी।
🌞 सौर ऊर्जा और कृषि का संगम
भारत सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) द्वारा अनुमोदित एग्री-पीवी उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence on AgriPV) को आईएआरआई और राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान (NISE) में संयुक्त रूप से स्थापित किया गया है। यह पहल किसानों की आय बढ़ाने, भूमि उपयोग की दक्षता सुधारने और नेट-जीरो खेती को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
👩🔬 वैज्ञानिकों से संवाद और शोध पर चर्चा
सातहोफ ने आईएआरआई और एनआईएसई के वैज्ञानिकों तथा छात्रों से बातचीत की। उन्होंने कृषि भूमि पर सौर ऊर्जा उत्पादन और फसल उत्पादन को एकीकृत करने के अनुसंधान कार्यों को सराहा। इस अवसर पर आईसीएआर के उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) डॉ. डी.के. यादव, आईएआरआई निदेशक डॉ. श्रीनिवास राव, एनआईएसई महानिदेशक डॉ. मोहम्मद रेहान, संयुक्त निदेशक (अनुसंधान) डॉ. सी. विश्वनाथन, संयुक्त निदेशक (विस्तार) डॉ. आर.एन. पडारिया, डॉ. डी.के. सिंह और डॉ. पी.एस. ब्रह्मानंद सहित कई वरिष्ठ वैज्ञानिक उपस्थित रहे।
🌾 सतत कृषि की दिशा में बड़ा कदम
इस दौरे में दोनों देशों के विशेषज्ञों ने सौर–कृषि एकीकरण, डेटा-आधारित निर्णय प्रणाली और जलवायु-स्मार्ट खेती तकनीकों पर विचार-विमर्श किया।
भारत और जर्मनी के बीच यह सहयोग सतत कृषि, स्वच्छ ऊर्जा अपनाने और जलवायु परिवर्तन के अनुकूल कृषि प्रणाली के विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।