October 5, 2026 3:48 AM

Krishi Times

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एकीकृत कृषि प्रणाली से बढ़ेगी किसानों की आय!

एकीकृत कृषि प्रणाली, प्राकृतिक खेती और फसल सुरक्षा तकनीकों की दी गई जानकारी

चतरा, झारखंड। किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, प्राकृतिक खेती और फसल प्रबंधन की जानकारी देकर उनकी आय बढ़ाने के उद्देश्य से एटीएमए (ATMA) कृषि उन्नति योजना के तहत दो दिवसीय जिला स्तरीय किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। 1 और 2 अक्टूबर 2026 को प्रतापपुर प्रखंड के घोरदौर गांव में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को खेती की नवीन तकनीकों, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने का प्रयास

प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक खेती के प्रति जागरूक बनाना और कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करना था। विशेषज्ञों ने कहा कि बदलती जलवायु परिस्थितियों और बढ़ती उत्पादन लागत के बीच किसानों को ऐसी कृषि प्रणालियों को अपनाने की आवश्यकता है, जो कम लागत में अधिक उत्पादन और बेहतर आय सुनिश्चित कर सकें। इसके लिए आधुनिक तकनीकों के साथ-साथ स्थानीय संसाधनों के प्रभावी उपयोग पर भी जोर दिया गया।

एकीकृत कृषि प्रणाली के लाभ बताए गए

कार्यक्रम में किसानों को एकीकृत कृषि प्रणाली (Integrated Farming System-IFS) के महत्व के बारे में विस्तार से बताया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि केवल एक फसल पर निर्भर रहने के बजाय फसल उत्पादन, पशुपालन, बागवानी, मत्स्य पालन और अन्य कृषि आधारित गतिविधियों को एक साथ अपनाने से किसानों की आय में स्थिरता आती है। इससे जोखिम कम होता है और खेत की उत्पादकता भी बढ़ती है। किसानों को यह भी बताया गया कि एकीकृत कृषि प्रणाली से खेत के संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकता है तथा जैविक पदार्थों का पुनर्चक्रण संभव होता है।

खरीफ फसलों में कीट एवं रोग प्रबंधन पर विशेष प्रशिक्षण

प्रशिक्षण के दौरान खरीफ फसलों में लगने वाले प्रमुख कीटों और रोगों की पहचान तथा उनके नियंत्रण के उपायों पर विशेष सत्र आयोजित किया गया। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को धान, मक्का, दलहन एवं तिलहन फसलों में होने वाले विभिन्न रोगों और कीटों के लक्षणों की जानकारी दी। किसानों को सलाह दी गई कि वे नियमित रूप से अपने खेतों की निगरानी करें और प्रारंभिक अवस्था में ही रोग या कीट की पहचान कर उचित नियंत्रण उपाय अपनाएं। समेकित कीट प्रबंधन (IPM) तकनीक को अपनाने पर भी जोर दिया गया, जिससे रासायनिक कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग को कम किया जा सके।

बीज उपचार से बढ़ती है फसल की सुरक्षा

विशेषज्ञों ने किसानों को बीज उपचार के महत्व के बारे में भी जानकारी दी। बताया गया कि बुवाई से पहले बीजों का उपचार करने से फसल को प्रारंभिक अवस्था में रोगों और कीटों से सुरक्षा मिलती है। इससे अंकुरण प्रतिशत बेहतर होता है और पौधों का विकास स्वस्थ रूप से होता है। किसानों को विभिन्न प्रकार के जैविक और रासायनिक बीज उपचार विधियों की जानकारी देते हुए उनके सही उपयोग के बारे में भी समझाया गया।

प्राकृतिक खेती की तकनीकों का दिया गया प्रशिक्षण

कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा प्राकृतिक खेती पर केंद्रित रहा। किसानों को बीजामृत, जीवामृत, ब्रह्मास्त्र, घनजीवामृत और अन्य जैविक तैयारियों के निर्माण एवं उपयोग की विधियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि प्राकृतिक खेती से उत्पादन लागत कम होती है, मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलती है। किसानों को गोबर, गोमूत्र और अन्य स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर जैविक घोल तैयार करने की विधि सिखाई गई।

मिट्टी के स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण पर जोर

प्राकृतिक खेती के साथ-साथ मिट्टी के स्वास्थ्य संरक्षण पर भी चर्चा की गई। कृषि वैज्ञानिकों ने कहा कि लगातार रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होती है। इसलिए जैविक और प्राकृतिक खेती की तकनीकों को अपनाकर मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना आवश्यक है। किसानों को जैविक खाद और सूक्ष्म पोषक तत्वों के संतुलित उपयोग की भी जानकारी दी गई।

प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले किसानों को दिए गए प्रमाण-पत्र

दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रतिभागी किसानों को प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। ग्राम पंचायत के मुखिया एवं उपमुखिया ने किसानों को प्रमाण-पत्र वितरित करते हुए प्रशिक्षण में सीखी गई तकनीकों को अपने खेतों में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि विकास और किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कृषि विभाग और विभिन्न संस्थाओं की रही सहभागिता

कार्यक्रम में कृषि विभाग के अधिकारियों के अलावा बीटीएम (BTM), एटीएम (ATM), इफको (IFFCO) के प्रतिनिधि, कृषि मित्र तथा क्षेत्र के अनेक किसान उपस्थित रहे। विशेषज्ञों ने किसानों की समस्याओं और जिज्ञासाओं का समाधान भी किया तथा खेती से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी।

किसानों की आय बढ़ाने में मददगार होंगे ऐसे कार्यक्रम

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि एटीएमए कृषि उन्नति योजना के तहत आयोजित इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों को नई तकनीकों और वैज्ञानिक खेती से जोड़ने का प्रभावी माध्यम हैं। एकीकृत कृषि प्रणाली, प्राकृतिक खेती और फसल सुरक्षा उपायों को अपनाकर किसान उत्पादन लागत कम करने के साथ-साथ अपनी आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं। ऐसे कार्यक्रम ग्रामीण कृषि विकास को गति देने और आत्मनिर्भर कृषि व्यवस्था के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।