औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने की दिशा में सरकार की नई पहल
नई दिल्ली –सरकार ने औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के लिए एक नई पहल की है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) ने मूल प्रमाण पत्र (सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन) जारी करने के लिए एक डिजिटल पोर्टल शुरू किया है।
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किसानों और उद्यमों को होगा लाभ
इस पोर्टल के जरिए औषधीय पौधों की खेती से जुड़े किसान, आयुष क्षेत्र के उद्यम, बीज उद्योग और अनुसंधान संस्थान लाभ साझाकरण से छूट के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन स्वीकृत होने पर मूल प्रमाण पत्र इलेक्ट्रॉनिक रूप से जारी किया जाएगा।
पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन
एनबीए द्वारा तैयार किया गया यह पोर्टल आवेदन से लेकर प्रमाण पत्र जारी होने तक की पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन करता है। हितधारक अपने प्रमाण पत्र को https://absefiling.nbaindia.in/ पोर्टल से सीधे डाउनलोड कर सकेंगे, जिससे समय और कागजी प्रक्रिया दोनों की बचत होगी।
जैविक विविधता कानून में संशोधन
गौरतलब है कि जैविक विविधता (संशोधन) विधेयक को लोकसभा में 25 जुलाई 2023 और राज्यसभा में 1 अगस्त 2023 को पारित किया गया था। इसके बाद इसे अधिनियम का रूप दिया गया। वर्ष 2024 और 2025 में इसके नियमों में भी संशोधन किए गए।
नए नियमों का उद्देश्य
संशोधित नियमों का मकसद कानून को बेहतर तरीके से लागू करना और आयुष क्षेत्र, बीज उद्योग तथा अनुसंधान संस्थानों की जरूरतों को पूरा करना है। नियमों में साफ किया गया है कि औषधीय पौधों की खेती के लिए मूल प्रमाण पत्र अब केवल डिजिटल प्लेटफॉर्म से ही जारी होंगे।
खेती और पारदर्शिता को मिलेगा बढ़ावा
सरकार की इस पहल से औषधीय पौधों की खेती को प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही जैव विविधता का संरक्षण, पारदर्शिता और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस भी मजबूत होगा।
भारत में औषधीय पौधों की समृद्ध विरासत
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार भारत में औषधीय पौधों की 8,000 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं। अब तक 5,250 से ज्यादा प्रजातियों की पहचान की जा चुकी है और विभिन्न बीमारियों से जुड़े 9,567 से अधिक पारंपरिक उपयोग दर्ज किए गए हैं।
एनएमपीबी की अहम भूमिका
आयुष मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (एनएमपीबी) देशभर में औषधीय पौधों के संरक्षण, विकास और सतत प्रबंधन के लिए एक केंद्रीय योजना चला रहा है। इस योजना के तहत खेती को बढ़ावा देने के साथ जैव विविधता संरक्षण पर भी खास ध्यान दिया जा रहा है।
दुर्लभ प्रजातियों की पहचान
भारत सरकार ने देश में पाई जाने वाली दुर्लभ, लुप्तप्राय और संकटग्रस्त औषधीय पौधों की पहचान के लिए व्यापक सर्वे और वैज्ञानिक अध्ययन कराए हैं। यह कार्य पर्यावरण मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (बीएसआई) द्वारा किया जा रहा है।
पारंपरिक ज्ञान का दस्तावेजीकरण
बीएसआई के वैज्ञानिकों ने देश के अलग-अलग क्षेत्रों में सर्वे के दौरान कई औषधीय और सुगंधित पौधों की पहचान की है। ओडिशा, गुजरात, बिहार, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल की जनजातियों से जुड़े लगभग 2,034 पारंपरिक औषधीय ज्ञान को भी दस्तावेज के रूप में संकलित किया गया है।
अनुसंधान को मिल रही वित्तीय सहायता
एनएमपीबी अपनी केंद्रीय योजना के तहत सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और संगठनों को औषधीय पौधों पर शोध के लिए परियोजना आधारित वित्तीय सहायता देता है।
आईसीएआर की सक्रिय भागीदारी
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के अंतर्गत औषधीय एवं सुगंधित पादप अनुसंधान निदेशालय और अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना औषधीय पौधों से जुड़े सभी पहलुओं पर काम कर रहे हैं। इसमें उन्नत खेती तकनीक, कटाई के बाद का प्रबंधन, भंडारण और प्रसंस्करण शामिल है। देशभर में इसके 28 केंद्र स्थापित हैं, जिनमें छह स्वैच्छिक केंद्र भी हैं।