जबलपुर से हैदराबाद तक: मिलेट्स नवाचार सीखेंगे यूपी के अधिकारी!
लखनऊ –उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित उत्तर प्रदेश मिलेट्स पुनरुद्धार कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश में मिलेट्स (श्रीअन्न) के उत्पादन, प्रसंस्करण एवं विपणन को नई दिशा देने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण अध्ययन भ्रमण का आयोजन किया गया है। इसी क्रम में कृषि भवन, लखनऊ से कृषि निदेशक डॉ. पंकज त्रिपाठी ने 40 अधिकारियों एवं कर्मचारियों के अध्ययन भ्रमण दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
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यह अध्ययन भ्रमण दल 6 फरवरी तक मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना के प्रमुख कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण केंद्रों—जबलपुर, नागपुर एवं हैदराबाद—का भ्रमण करेगा। भ्रमण के दौरान अधिकारी विभिन्न राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय संस्थानों, अनुसंधान केंद्रों और सफल उद्यमों में मिलेट्स से जुड़े नवाचारों, मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण तकनीक और विपणन रणनीतियों का गहन अध्ययन करेंगे।
उत्पादन से प्रसंस्करण तक की मिलेगी व्यावहारिक समझ
इस Exposure Visit के माध्यम से अधिकारियों को मिलेट्स की उन्नत किस्मों, वैज्ञानिक उत्पादन तकनीक, फसल प्रबंधन, कटाई के बाद की तकनीक (Post-Harvest Management) तथा आधुनिक मशीनरी की वास्तविक और व्यवहारिक जानकारी प्राप्त होगी। इसके साथ ही वे प्रोसेसिंग यूनिट्स में अपनाई जा रही आधुनिक तकनीकों, गुणवत्ता नियंत्रण और उत्पाद मानकीकरण की प्रक्रियाओं को भी नजदीक से समझ सकेंगे।
FPO और मार्केट लिंकज मॉडल का अध्ययन
भ्रमण के दौरान अधिकारी किसान उत्पादक संगठनों (FPO), स्टार्टअप्स और निजी उद्यमों द्वारा अपनाए जा रहे सफल बिजनेस मॉडल का अध्ययन करेंगे। इससे यह समझ विकसित होगी कि किस प्रकार किसानों को संगठित कर उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन को एक मजबूत वैल्यू चेन से जोड़ा जा सकता है। साथ ही, मार्केट लिंकज, ब्रांडिंग और पैकेजिंग के आधुनिक तरीकों से किसानों को बेहतर मूल्य कैसे दिलाया जा सकता है, इसका प्रत्यक्ष अनुभव भी प्राप्त होगा।
क्लस्टर एप्रोच और PPP मॉडल पर फोकस
अन्य राज्यों में सफलतापूर्वक लागू की गई क्लस्टर आधारित विकास रणनीति, वैल्यू एडिशन, ब्रांड डेवलपमेंट तथा सरकारी–निजी सहभागिता (Public–Private Partnership) के मॉडल इस अध्ययन भ्रमण का प्रमुख आकर्षण होंगे। अधिकारी इन मॉडलों को समझकर अपने-अपने जनपदों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार लागू करने की कार्ययोजना तैयार कर सकेंगे।
नवाचार और स्थानीय उद्यमिता को मिलेगा बढ़ावा
भ्रमण के दौरान मिलेट आधारित नए उत्पादों जैसे मिलेट कुकीज़, पास्ता, रेडी-टू-ईट एवं रेडी-टू-कुक खाद्य उत्पादों का अवलोकन कर अधिकारी यह जान सकेंगे कि किस प्रकार मिलेट्स को पारंपरिक अनाज से आगे बढ़ाकर आधुनिक उपभोक्ता की मांग के अनुरूप उत्पादों में बदला जा सकता है। इससे प्रदेश में स्थानीय उद्यमिता, स्टार्टअप्स और स्वरोजगार के नए अवसर सृजित करने में मदद मिलेगी।
संवाद से बनेगी व्यवहारिक नीति
अध्ययन भ्रमण के दौरान अधिकारियों को अन्य राज्यों के वैज्ञानिकों, उद्यमियों, FPO प्रतिनिधियों और गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) से सीधे संवाद का अवसर मिलेगा। इससे जमीनी स्तर पर आने वाली समस्याओं, चुनौतियों और उनके समाधान की स्पष्ट समझ विकसित होगी। इस अनुभव के आधार पर भविष्य की योजनाएं अधिक व्यवहारिक, किसान हितैषी और परिणामोन्मुख बनाई जा सकेंगी।
आत्मविश्वास और प्रेरणा का संचार
सफल उदाहरणों को प्रत्यक्ष देखने से अधिकारियों में आत्मविश्वास और उत्साह का संचार होगा तथा “यह संभव है” जैसी सकारात्मक सोच विकसित होगी। Exposure Visit के बाद अधिकारी किसानों को ठोस उदाहरणों और व्यावहारिक अनुभव के साथ मार्गदर्शन प्रदान कर सकेंगे, जिससे किसानों का भरोसा सरकारी योजनाओं पर और अधिक मजबूत होगा।
किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में ठोस पहल
प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और ब्रांडिंग की समझ विकसित होने से अधिकारी अपने जिलों में वैल्यू चेन डेवलपमेंट पर प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेंगे। इससे मिलेट्स आधारित उत्पादों को बेहतर बाजार, उचित मूल्य और स्थायी मांग मिलने की संभावना बढ़ेगी, जिसका सीधा लाभ प्रदेश के किसानों की आय वृद्धि के रूप में सामने आएगा।
कुल मिलाकर, यह Exposure Visit अधिकारियों को “देखो–सीखो–लागू करो” (See–Learn–Implement) का सशक्त अवसर प्रदान करता है, जिससे उत्तर प्रदेश मिलेट्स पुनरुद्धार कार्यक्रम को अधिक प्रभावी, नवाचारी और परिणामदायी बनाया जा सकेगा। अंततः इस पहल से प्रदेश में मिलेट्स आधारित कृषि को नई पहचान मिलेगी और किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में मदद मिलेगी।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश मिलेट्स पुनरुद्धार कार्यक्रम के योजना अधिकारी डॉ. रमेश कुमार मौर्य भी उपस्थित रहे।