टिश्यू कल्चर: उत्तर प्रदेश में गन्ना खेती को नई दिशा!

चीनी मिलों को लैब स्थापना का लक्ष्य—किसानों को सीधे लाभ

टिश्यू कल्चर तकनीक से उच्च गुणवत्ता के बीज गन्ने के उत्पादन पर गन्ना विभाग का विशेष फोकस, 15.90 लाख पौधे तैयार करने की तैयारी तेज

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लखनऊ, – प्रदेश में शुद्ध, स्वस्थ और उच्च गुणवत्ता वाले बीज गन्ने की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए गन्ना विभाग ने टिश्यू कल्चर तकनीक के व्यापक उपयोग पर अपनी गति तेज कर दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशानुसार गन्ना आयुक्त की अध्यक्षता में न्यू स्कॉलर सभागार में आयोजित उच्चस्तरीय वर्चुअल समीक्षा बैठक में टिश्यू कल्चर आधारित बीज गन्ना उत्पादन को लेकर विस्तृत रणनीति पर चर्चा की गई। बैठक में मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी, टिश्यू कल्चर लैब संचालित करने वाले चीनी मिल समूह, सभी उप गन्ना आयुक्त तथा जिला गन्ना अधिकारी शामिल हुए।

टिश्यू कल्चर लैब को लेकर विभाग की प्राथमिकता स्पष्ट

चित्र:प्रतीकात्मक

गन्ना एवं चीनी आयुक्त ने बताया कि प्रदेश में टिश्यू कल्चर लैबों की स्थापना का मुख्य उद्देश्य किसानों को शुद्ध, रोग-मुक्त और उन्नत गुणवत्ता वाला बीज गन्ना उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि रोग-प्रतिरोधी एवं True to Type पौधों का उत्पादन आज के समय की अनिवार्यता है, क्योंकि पारंपरिक तरीकों से बीज गन्ने की शुद्धता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।

आयुक्त ने बताया कि विभाग ने चीनी मिलों को अपने परिक्षेत्र में टिश्यू कल्चर लैब स्थापित करने के लिए प्रेरित किया है। इस संबंध में सभी उप गन्ना आयुक्तों को लक्ष्य आवंटित कर दिया गया है। उन्हें यह भी निर्देशित किया गया है कि अपने-अपने क्षेत्रों में टिश्यू कल्चर लैब स्थापित करने की संभावनाओं का विस्तृत मूल्यांकन कर सूचीबद्ध करें, ताकि आगामी समीक्षा बैठक में ठोस प्रगति प्रस्तुत की जा सके।

प्रदेश में 13 टिश्यू कल्चर लैब, 15.90 लाख पौधे तैयार होंगे

वर्तमान में प्रदेश के गन्ना शोध परिषद और विभिन्न चीनी मिलों में कुल 13 टिश्यू कल्चर लैब स्थापित हैं। इन लैबों के माध्यम से पेराई सत्र 2025–26 में 15.90 लाख रोग-मुक्त एवं शुद्ध पौधे तैयार किए जाएंगे। इन पौधों को पहले नर्सरी में विकसित किया जाएगा और उसके बाद किसानों तक वितरित किया जाएगा।

आयुक्त ने बताया कि बीज गन्ने की गुणवत्ता सर्वोपरि है। इसलिए लैब स्तर से लेकर नर्सरी और खेत स्तर तक प्रत्येक चरण में वैज्ञानिक निरीक्षण व गुणवत्ता परीक्षण की व्यवस्था की जाएगी। गन्ना विकास विभाग इस पूरी प्रक्रिया की सतत निगरानी करेगा, जिससे बीज गन्ने की शुद्धता, उपलब्धता और विश्वसनीयता सुनिश्चित हो सके।

कम समय में अधिक उत्पादकता, किसानों की आय में वृद्धि

टिश्यू कल्चर पद्धति से तैयार किए गए True to Type पौधे न केवल रोग-प्रतिरोधी होते हैं, बल्कि पारंपरिक बीजों की तुलना में अधिक उत्पादकता भी प्रदान करते हैं। इन पौधों की वृद्धि क्षमता समान होती है और इनसे प्राप्त गन्ना गुणवत्ता में स्थिरता बनाए रखता है।

विभाग का मानना है कि इस तकनीक के बड़े पैमाने पर उपयोग से किसान कम क्षेत्र में भी अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकेंगे। उच्च गुणवत्ता के बीज गन्ने की उपलब्धता से खेती की लागत घटेगी और उत्पादकता बढ़ेगी, जिससे किसानों की आय में प्राकृतिक रूप से वृद्धि होगी।

चीनी मिलों को लैब स्थापना हेतु निर्देश

गन्ना विभाग ने सक्षम चीनी मिलों को अपने क्षेत्रों में टिश्यू कल्चर लैब स्थापित करने के लिए स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। विभाग का मानना है कि स्थानीय स्तर पर लैब की उपलब्धता से बीज गन्ने की आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी और किसानों तक समय से पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित हो पाएगी।

इसके साथ ही, आगामी समीक्षा बैठकों में प्रत्येक चीनी मिल समूह द्वारा प्रस्तुत कार्ययोजना और प्रगति रिपोर्ट के आधार पर आगे की रणनीति तैयार की जाएगी।

किसानों को होगा सीधा लाभ

टिश्यू कल्चर विधि से तैयार बीज गन्ने:

  • रोग-मुक्त और शुद्ध होते हैं

  • आनुवंशिक रूप से समान (True to Type) होते हैं

  • अधिक उत्पादकता देते हैं

  • खेत में समान वृद्धि के कारण प्रबंधन सरल होता है

  • गन्ना क्षेत्र में लंबी अवधि तक उत्पादकता बनाए रखते हैं

विभाग का कहना है कि आगामी पेराई सत्र से टिश्यू कल्चर आधारित बीज गन्ने का वितरण बढ़ेगा और इससे प्रदेश के लाखों गन्ना किसानों को लाभ होगा।