छत्तीसगढ़ से कोस्टा रिका को भेजी गई फोर्टिफाइड चावल कर्नेल की पहली खेप, भारत के कृषि निर्यात में उपलब्धि
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नई दिल्ली- भारत के कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने एक नई उपलब्धि दर्ज की है। एपीडा ने छत्तीसगढ़ राज्य से कोस्टा रिका के लिए 12 मीट्रिक टन फोर्टिफाइड चावल कर्नेल (Fortified Rice Kernel – FRK) की पहली खेप का सफलतापूर्वक निर्यात कराया है।
यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “कुपोषण मुक्त भारत” कार्यक्रम के अनुरूप है, जो पोषण अभियान के तहत देशभर में पोषक तत्वों से भरपूर चावल उपलब्ध कराने की दिशा में चलाया जा रहा है।
कुपोषण के खिलाफ भारत का वैश्विक कदम
भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन कार्यरत एपीडा द्वारा यह निर्यात न केवल देश के कृषि निर्यात क्षेत्र में एक नई शुरुआत है, बल्कि यह भारत के घरेलू पोषण मिशन को वैश्विक स्तर से जोड़ने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) देश के विभिन्न हिस्सों में फोर्टिफाइड चावल का वितरण कर रहा है। अब, फोर्टिफाइड राइस कर्नेल का अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात भारत की वैज्ञानिक तकनीक और पोषण-आधारित नवाचार को विश्व मंच पर स्थापित करने का संकेत है।
छत्तीसगढ़ बना पोषण उत्पाद निर्यात का नया केंद्र
छत्तीसगढ़ राज्य लगातार फोर्टिफाइड चावल और चावल उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत रहा है। राज्य के किसानों, मिल मालिकों और निर्यातकों को इस उपलब्धि से वैश्विक स्तर पर पहचान मिली है।
कोस्टा रिका को भेजी गई यह पहली खेप पोषण-समृद्ध खाद्य उत्पादों की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में छत्तीसगढ़ की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है।
छत्तीसगढ़ चावल निर्यातक संघ (टीआरईए-सीजी) के अध्यक्ष मुकेश जैन ने कहा कि, “एपीडा के सहयोग से यह निर्यात संभव हुआ है और आने वाले दिनों में फोर्टिफाइड चावल के नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों की पहचान कर निर्यात को और बढ़ाया जाएगा।”
एपीडा ने दी निर्यातकों को बधाई
एपीडा के अध्यक्ष अभिषेक देव ने इस अवसर पर निर्यातकों और सभी हितधारकों को बधाई देते हुए कहा,
“भारत से फोर्टिफाइड चावल का निर्यात न केवल हमारे कृषि निर्यात पोर्टफोलियो को सशक्त करता है, बल्कि यह विज्ञान-आधारित और वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त खाद्य समाधानों के माध्यम से कुपोषण उन्मूलन के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करता है।”
उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि एपीडा भविष्य में फोर्टिफाइड और मूल्यवर्धित खाद्य उत्पादों के निर्यात को और बढ़ाने के लिए निर्यातकों को संपूर्ण तकनीकी, प्रशिक्षण और विपणन सहयोग प्रदान करता रहेगा।
क्या है फोर्टिफाइड चावल कर्नेल?
फोर्टिफाइड चावल कर्नेल, चावल के आटे को आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन बी12 जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों के साथ मिलाकर तैयार किया जाता है।
इन्हें चावल के दानों के समान आकार देकर, फिर एक निश्चित अनुपात में सामान्य चावल के साथ मिलाया जाता है ताकि चावल के पोषण मूल्य में वृद्धि हो सके।
इस प्रक्रिया से तैयार फोर्टिफाइड चावल न केवल कुपोषण से लड़ने में मदद करता है, बल्कि यह खाद्य सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य को भी मजबूत बनाता है।
भारत की तकनीकी क्षमता और ग्लोबल पहचान
फोर्टिफाइड चावल कर्नेल के सफल निर्यात से यह स्पष्ट होता है कि भारत अब खाद्य सुदृढ़ीकरण (Food Fortification) के क्षेत्र में तकनीकी रूप से सक्षम देशों की सूची में शामिल हो गया है।
यह उपलब्धि न केवल छत्तीसगढ़ सरकार, एपीडा और निजी क्षेत्र के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है, बल्कि यह भारत को एक वैश्विक पोषण-सुरक्षित खाद्य आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करती है।
सारांश
छत्तीसगढ़ से कोस्टा रिका को फोर्टिफाइड चावल कर्नेल की पहली खेप का रवाना होना भारत के कृषि और खाद्य प्रसंस्करण निर्यात में एक नया अध्याय जोड़ता है।
यह पहल न केवल भारत की पोषण मिशन नीति को सशक्त बनाती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि देश अब वैज्ञानिक तकनीक, पोषण नवाचार और गुणवत्ता-आधारित उत्पादन के माध्यम से वैश्विक खाद्य बाजार में मजबूती से अपनी जगह बना रहा है।
चित्र सौजन्य: सोशल मीडिया