November 8, 2026 1:21 AM

Krishi Times

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मेघालय में बीज उत्पादन का मजबूत नेटवर्क बनाने की तैयारी!

मेघालय में गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन को बढ़ावा, किसानों और ग्रामीण युवाओं को दिया गया वैज्ञानिक तकनीकों का प्रशिक्षण!

उमियम (मेघालय)  –पूर्वोत्तर भारत में कृषि उत्पादन और किसानों की आय बढ़ाने के लिए गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है। इसी दिशा में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के पूर्वोत्तर क्षेत्र अनुसंधान परिसर, उमियम (मेघालय) ने गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन तकनीक पर कौशल विकास कार्यशाला आयोजित की। “Quality Seed Production Technology: Sowing the Future” विषय पर आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य किसानों, ग्रामीण युवाओं और कृषि विस्तार से जुड़े अधिकारियों को वैज्ञानिक बीज उत्पादन की आधुनिक तकनीकों से अवगत कराना था।

कार्यक्रम में मेघालय सरकार के अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी निदेशालय की निदेशक एम. डखर, खाद्य प्रसंस्करण निदेशक आई.बी. सैबोर्न, ICAR पूर्वोत्तर क्षेत्र अनुसंधान परिसर के निदेशक डॉ. जी. कादिरवेल, कृषि विज्ञान की उपनिदेशक मोनिका तथा प्रशासन एवं लेखा के संयुक्त निदेशक बाशोंगडोर उपस्थित रहे।

कृषि उत्पादकता की बुनियाद हैं गुणवत्तापूर्ण बीज

कार्यशाला में विशेषज्ञों ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण बीज कृषि उत्पादन की पहली और सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। बेहतर बीजों के इस्तेमाल से फसलों की उत्पादकता, गुणवत्ता और रोगों के प्रति सहनशीलता में सुधार किया जा सकता है। इसका सीधा असर किसानों की लागत, उपज और आमदनी पर पड़ता है।

विशेषज्ञों ने मेघालय की भौगोलिक एवं कृषि-जलवायु परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए स्थानीय स्तर पर अनुकूलित उन्नत किस्मों के बीज उत्पादन को बढ़ावा देने पर जोर दिया। साथ ही बीज उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण, भंडारण और वितरण तक पूरी व्यवस्था को मजबूत बनाने की आवश्यकता बताई।

कृषि विभागों, बीज निगम और किसान संगठनों की भागीदारी

कार्यशाला में मेघालय सरकार के कृषि निदेशालय, री-भोई और ईस्ट खासी हिल्स के जिला कृषि कार्यालयों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इसके अलावा शिलांग, तुरा और जोवाई के अनुसंधान अधिकारियों, नेशनल सीड्स कॉरपोरेशन, अपर शिलांग स्थित AICRI, जिरांग के कृषि विकास अधिकारी (ADO), तिरसो के किसान उत्पादक संगठन (FPO), कृषि वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों की भागीदारी रही।

इस दौरान अनुसंधान संस्थानों, सरकारी विभागों और किसान संगठनों के बीच बीज उत्पादन की संभावनाओं, तकनीकी चुनौतियों और स्थानीय जरूरतों पर चर्चा हुई।

SATHI पोर्टल पर ICAR की किस्मों को सूचीबद्ध करने की सिफारिश

मेघालय में गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन का मजबूत नेटवर्क विकसित करने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए। इनमें ICAR द्वारा विकसित एवं जारी सभी फसल किस्मों को SATHI पोर्टल पर सूचीबद्ध करने की सिफारिश प्रमुख रही। इससे इन किस्मों की पहचान, जानकारी और किसानों तक पहुंच को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

इसके अलावा राज्य की कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल अधिक उपज देने वाली अनुशंसित फसल किस्मों की सूची मेघालय सरकार को सौंपने का सुझाव दिया गया। इसका उद्देश्य सरकारी कृषि मिशनों के माध्यम से इन किस्मों के बीजों का बड़े पैमाने पर उत्पादन और वितरण सुनिश्चित करना है।

सोयाबीन और मोटे अनाज के बीज उत्पादन पर जोर

कार्यशाला में सोयाबीन, मोटे अनाज (मिलेट्स) और अन्य उपयुक्त फसलों के लिए विशेष बीज उत्पादन क्षेत्र विकसित करने की आवश्यकता बताई गई। इसके लिए पंजीकृत बीज उत्पादकों, सरकारी कृषि फार्मों, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) और प्रगतिशील किसानों को जोड़ने का सुझाव दिया गया।

इस पहल से स्थानीय स्तर पर बीज उत्पादन की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीजों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है। विशेष रूप से सोयाबीन और मिलेट्स जैसी फसलों को बढ़ावा देना फसल विविधीकरण और कृषि आधारित आय के नए अवसर पैदा करने की दिशा में उपयोगी हो सकता है।

बीज भंडारण और प्रसंस्करण सुविधाओं के विकास की जरूरत

विशेषज्ञों और प्रतिभागियों ने कहा कि केवल गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी गुणवत्ता बनाए रखने के लिए वैज्ञानिक भंडारण और प्रसंस्करण सुविधाएं भी जरूरी हैं। मेघालय की विशिष्ट जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप बीज भंडारण एवं प्रसंस्करण तकनीकों को बढ़ावा देने पर सहमति जताई गई।

इसके साथ ही सोयाबीन और पेरिला जैसी फसलों के प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन के लिए स्थानीय स्तर पर सुविधाएं विकसित करने की आवश्यकता रेखांकित की गई। इससे इन फसलों की व्यावसायिक खेती को प्रोत्साहन मिलने, बाजार से जुड़ाव बढ़ने और किसानों को बेहतर मूल्य मिलने की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं।

अनुसंधान संस्थानों और किसानों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर

कार्यशाला ने कृषि अनुसंधान संस्थानों, सरकारी विभागों, विस्तार एजेंसियों और किसान समुदाय के बीच संवाद एवं तकनीकी ज्ञान के आदान-प्रदान का अवसर उपलब्ध कराया। चर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि मेघालय में बीज उत्पादन की पूरी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सभी संबंधित संस्थाओं को मिलकर काम करना होगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल बीज किस्मों का विकास, वैज्ञानिक उत्पादन तकनीक, बेहतर भंडारण, प्रसंस्करण और प्रभावी बाजार व्यवस्था को एक साथ आगे बढ़ाने से पूर्वोत्तर क्षेत्र में कृषि विकास को नई गति मिल सकती है। इससे किसानों की उत्पादकता और आय बढ़ाने के साथ ग्रामीण युवाओं के लिए कृषि आधारित रोजगार एवं उद्यमिता के अवसर भी विकसित किए जा सकते हैं।

स्रोत: ICAR Research Complex for NEH Region, Umiam, Meghalaya