अंडमान-निकोबार में अफ्रीकन स्वाइन फीवर का पहला मामला, संक्रमण रोकने के लिए केंद्र की विशेषज्ञ समिति सक्रिय
सख्त जैव-सुरक्षा, संक्रमित सूअरों को हटाने, आवाजाही पर पाबंदी और प्रभावित पशुपालकों को मुआवजा देने पर जोर
अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह में अफ्रीकन स्वाइन फीवर (ASF) के पहले दर्ज प्रकोप के बाद केंद्र सरकार का पशुपालन एवं डेयरी विभाग (DAHD) संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए सक्रिय हो गया है। स्थिति की समीक्षा और बीमारी के प्रसार को रोकने के उपायों में सहयोग देने के लिए डॉ. नवीन बी. महेश्वरप्पा, पशुपालन आयुक्त के नेतृत्व में विभाग की विशेषज्ञ समिति ने केंद्र शासित प्रदेश का दौरा किया।
18 अक्टूबर 2026 को समिति ने अंडमान-निकोबार प्रशासन के पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवा विभाग की सचिव पल्लवी सरकार, विभागीय निदेशक और अन्य अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में संक्रमण की स्थिति की समीक्षा की गई और बीमारी पर तत्काल नियंत्रण पाने के लिए आवश्यक रणनीतियों पर चर्चा हुई।
संक्रमण रोकने के लिए इन उपायों पर जोर
विशेषज्ञ समिति ने अफ्रीकन स्वाइन फीवर के प्रसार को रोकने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाने की आवश्यकता बताई। इनमें जैव-सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन, संक्रमित क्षेत्रों में आवश्यक नियंत्रण उपाय, सूअरों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने पर प्रतिबंध और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना प्रमुख हैं।
प्रकोप से प्रभावित सूअर पालकों को समय पर मुआवजा उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया, ताकि बीमारी की रोकथाम के दौरान किसानों और पशुपालकों को होने वाले आर्थिक नुकसान को कम किया जा सके।
समिति ने संक्रमण नियंत्रण के लिए पशुपालन विभाग के साथ अन्य संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की जरूरत भी रेखांकित की। बीमारी की पहचान, प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी और रोकथाम संबंधी निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन इस रणनीति के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।
क्या है अफ्रीकन स्वाइन फीवर और कितना है खतरा?
अफ्रीकन स्वाइन फीवर सूअरों और जंगली सूअर प्रजातियों को प्रभावित करने वाला एक गंभीर संक्रामक वायरल रोग है। यह बीमारी तेजी से फैल सकती है और सूअर पालन क्षेत्र में बड़े आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ASF मनुष्यों में संक्रमण नहीं फैलाता। यानी यह जूनोटिक बीमारी नहीं है। हालांकि, संक्रमित सूअरों, उनके रक्त, दूषित उपकरणों, वाहनों, चारे या अन्य संक्रमित सामग्रियों के माध्यम से वायरस का प्रसार हो सकता है। इसलिए संक्रमित क्षेत्रों में स्वच्छता और जैव-सुरक्षा के नियमों का पालन बेहद जरूरी है।
इस बीमारी की रोकथाम के लिए सतर्क निगरानी, संदिग्ध मामलों की तत्काल सूचना, पशुओं की अनावश्यक आवाजाही पर नियंत्रण और पशु चिकित्सा अधिकारियों के निर्देशों का पालन महत्वपूर्ण है।
सूअर पालकों के लिए जरूरी सावधानियां
सूअरों में अचानक बीमारी या असामान्य मौत होने पर तुरंत स्थानीय पशु चिकित्सा अधिकारी को सूचना दें।
बिना अनुमति सूअरों को प्रभावित क्षेत्र से बाहर न ले जाएं।
पशुशाला, उपकरणों और वाहनों की नियमित सफाई एवं उपयुक्त कीटाणुशोधन सुनिश्चित करें।
बाहरी व्यक्तियों और वाहनों की पशुशाला में आवाजाही नियंत्रित रखें।
मृत सूअरों का निस्तारण केवल पशु चिकित्सा एवं प्रशासनिक अधिकारियों के निर्देशों के अनुसार करें।
संक्रमण की आशंका होने पर बीमार या मृत सूअरों को स्वयं संभालने से बचें और निर्धारित जैव-सुरक्षा प्रक्रिया अपनाएं।
पशुपालन क्षेत्र के लिए क्यों अहम है यह कार्रवाई?
अंडमान-निकोबार में ASF का पहला दर्ज प्रकोप स्थानीय सूअर पालन क्षेत्र के लिए चिंता का विषय है। द्वीपों में पशुओं और पशु उत्पादों की आवाजाही पर प्रभावी निगरानी, समय पर रोग की पहचान और विभागीय समन्वय संक्रमण को दूसरे क्षेत्रों तक फैलने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
केंद्र की विशेषज्ञ समिति और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के बीच समन्वित प्रयासों का उद्देश्य बीमारी पर जल्द नियंत्रण पाना, पशुधन की सुरक्षा करना और प्रभावित पशुपालकों के हितों की रक्षा करना है।
फिलहाल प्राथमिकता संक्रमण की रोकथाम, निगरानी को मजबूत करने और प्रभावित पशुपालकों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की है।





























