भोपाल में गौपालक सम्मेलन: डेयरी सहकारिता, नस्ल सुधार और पशुपालकों की आय बढ़ाने पर जोर
अमित शाह ने कहा- सहकारिता से पशुपालकों को दूध के उचित मूल्य के साथ प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन का लाभ मिलेगा
भोपाल, 3 अक्टूबर 2026। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित गौपालक सम्मेलन में देश के डेयरी क्षेत्र, सहकारिता, पशुपालन, नस्ल सुधार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा हुई। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन के अनुरूप सहकारिता और डेयरी को किसानों, पशुपालकों तथा महिलाओं की आर्थिक मजबूती से जोड़ा जा रहा है।
दशहरा मैदान में आयोजित इस सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ला, राज्य सरकार के मंत्री, सांसद, विधायक, सहकारिता क्षेत्र के प्रतिनिधि, दुग्ध उत्पादक और बड़ी संख्या में गौपालक शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने नवीन न्याय संहिताओं पर आयोजित राज्य स्तरीय प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया।
नवीन न्याय संहिताओं की प्रदर्शनी का उद्घाटन
कार्यक्रम की शुरुआत नवीन न्याय संहिताओं पर आयोजित राज्य स्तरीय प्रदर्शनी के उद्घाटन के साथ हुई। अमित शाह ने प्रदर्शनी में नई आपराधिक न्याय व्यवस्था के विभिन्न प्रावधानों और मध्य प्रदेश पुलिस की ओर से इनके क्रियान्वयन से संबंधित कार्यों का अवलोकन किया।
उन्होंने कहा कि नई न्याय संहिताओं का उद्देश्य केवल अपराध के बाद दंड देना नहीं, बल्कि नागरिकों को समयबद्ध तरीके से न्याय उपलब्ध कराना है। उनके अनुसार नई व्यवस्था का मूल मंत्र ‘न्याय’ है, ‘दंड’ नहीं।
तीन वर्ष में न्याय देने का लक्ष्य
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नई आपराधिक न्याय व्यवस्था में एफआईआर दर्ज होने से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक की प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए तकनीक और वैज्ञानिक जांच को महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है।
नई व्यवस्था में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, ऑनलाइन समन, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, ऑनलाइन सुनवाई और फॉरेंसिक विज्ञान जैसे आधुनिक माध्यमों के उपयोग पर जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि कानूनों के पूर्ण क्रियान्वयन के बाद भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली को आधुनिक और तकनीक आधारित व्यवस्था के रूप में विकसित करने का लक्ष्य है।
सहकारिता को ग्रामीण समृद्धि का माध्यम बनाने पर जोर
गौपालक सम्मेलन के मुख्य हिस्से में अमित शाह ने डेयरी सहकारिता को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि लंबे समय से अलग सहकारिता मंत्रालय की मांग थी और केंद्र में अलग सहकारिता मंत्रालय बनने के बाद सहकारी क्षेत्र को नई दिशा मिली है।
उन्होंने कहा कि सहकारिता के माध्यम से छोटे किसान और पशुपालक सामूहिक रूप से बाजार से जुड़ सकते हैं। इससे दूध की खरीद, भुगतान, प्रसंस्करण और विपणन की व्यवस्था को अधिक संगठित बनाया जा सकता है।
दूध बेचने से आगे बढ़कर वैल्यू एडिशन पर जोर
अमित शाह ने कहा कि केवल कच्चा दूध बेचने के बजाय यदि उसी दूध का प्रसंस्करण कर मक्खन, घी, चीज, आइसक्रीम, मावा और अन्य उत्पाद तैयार किए जाएं तो पूरी मूल्य श्रृंखला में अधिक आर्थिक गतिविधियां पैदा हो सकती हैं।
उन्होंने कहा कि सहकारी व्यवस्था से जुड़ने पर पशुपालकों को दूध का उचित मूल्य मिलने के साथ-साथ प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन से होने वाले आर्थिक लाभ में भागीदारी का अवसर मिल सकता है।
यह व्यवस्था विशेष रूप से छोटे पशुपालकों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है, क्योंकि अकेले बाजार में उत्पाद बेचने की तुलना में संगठित सहकारी नेटवर्क उन्हें संग्रह केंद्र, प्रसंस्करण और बाजार से जोड़ने में मदद कर सकता है।
मध्य प्रदेश में दूध संकलन 52 लाख लीटर करने का लक्ष्य
मध्य प्रदेश में डेयरी क्षेत्र के विस्तार की योजना का उल्लेख करते हुए अमित शाह ने कहा कि राज्य सरकार ने दैनिक दूध संकलन को करीब 12 लाख लीटर से बढ़ाकर 52 लाख लीटर करने का लक्ष्य रखा है।
उन्होंने कहा कि यह महत्वाकांक्षी लक्ष्य है, लेकिन केंद्र सरकार राज्य सरकार और पशुपालकों के साथ मिलकर इसे हासिल करने के लिए सहयोग करेगी।
दूध संकलन बढ़ने के साथ गांव स्तर पर संग्रह केंद्रों, चिलिंग सुविधाओं, परिवहन, पशु स्वास्थ्य सेवाओं और प्रसंस्करण क्षमता के विस्तार की आवश्यकता भी बढ़ेगी। इससे डेयरी से जुड़े ग्रामीण रोजगार और स्थानीय कारोबार को भी गति मिलने की संभावना है।
दस साल में देश का दूध उत्पादन बढ़ने का दावा
देश के डेयरी क्षेत्र की प्रगति का उल्लेख करते हुए अमित शाह ने कहा कि वर्ष 2014-15 में भारत का कुल दूध उत्पादन करीब 14.60 करोड़ टन था, जो अब बढ़कर लगभग 24.80 करोड़ टन हो गया है।
उन्होंने कहा कि इसी अवधि में प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता भी लगभग 307 ग्राम प्रतिदिन से बढ़कर 485 ग्राम प्रतिदिन हो गई है। उनके अनुसार भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है।
इन आंकड़ों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि दूध उत्पादन में वृद्धि का सीधा संबंध बड़ी संख्या में किसानों और पशुपालकों की आजीविका से है।
श्वेत क्रांति 2.0 में 75 हजार नई डेयरियों का लक्ष्य
अमित शाह ने श्वेत क्रांति 2.0 के तहत देश में 75 हजार नई सहकारी डेयरियां स्थापित करने और 46 हजार मौजूदा डेयरियों को मजबूत करने की योजना का उल्लेख किया।
सहकारी डेयरियों के विस्तार से दूध उत्पादकों को स्थानीय स्तर पर संगठित बाजार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। इसके साथ ही दूध संग्रह, गुणवत्ता परीक्षण, चिलिंग, प्रसंस्करण और विपणन की सुविधाओं को मजबूत करने पर भी ध्यान रहेगा।
मध्य प्रदेश जैसे बड़े पशुधन वाले राज्य में इस तरह के नेटवर्क के विस्तार से छोटे पशुपालकों को औपचारिक डेयरी बाजार से जोड़ने की संभावना बढ़ सकती है।
नस्ल सुधार से बढ़ेगी पशुओं की उत्पादकता
डेयरी उत्पादन बढ़ाने के लिए पशुओं की नस्ल सुधार व्यवस्था को भी सम्मेलन में प्रमुखता दी गई। अमित शाह ने बताया कि मध्य प्रदेश में गौवंश और भैंस की नस्ल सुधार से संबंधित कार्यक्रमों के लिए 50 एकड़ भूमि उपलब्ध कराने पर सैद्धांतिक सहमति बनी है।
उन्होंने कहा कि इस पहल में देशी नस्लों के संरक्षण और संवर्धन के साथ आधुनिक प्रजनन तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।
सेक्स-सॉर्टेड सीमन जैसी तकनीकों के इस्तेमाल से पशुपालकों को बेहतर पशुधन प्रबंधन में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही पशुओं के स्वास्थ्य, दुग्ध उत्पादकता और नस्ल की गुणवत्ता पर भी काम करने की आवश्यकता होगी।
पशु स्वास्थ्य और चारा प्रबंधन भी जरूरी
डेयरी उत्पादन बढ़ाने के लिए केवल पशुओं की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। पशु स्वास्थ्य, संतुलित आहार, गुणवत्तापूर्ण चारा, नियमित टीकाकरण, कृत्रिम गर्भाधान और बेहतर प्रजनन प्रबंधन भी महत्वपूर्ण हैं।
अमित शाह ने डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए नस्ल सुधार, टीकाकरण, पशुधन प्रबंधन और चारा व्यवस्था को आगे बढ़ाने की बात कही। इससे दूध की उत्पादकता के साथ पशुओं के स्वास्थ्य और डेयरी कारोबार की स्थिरता पर भी असर पड़ सकता है।
गोबर को आय का अतिरिक्त स्रोत बनाने की तैयारी
सम्मेलन में गोबर आधारित अर्थव्यवस्था पर भी विशेष जोर दिया गया। अमित शाह ने कहा कि गोबर का वैज्ञानिक तरीके से संग्रह और प्रसंस्करण कर इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनाया जा सकता है।
गोबर से बायोगैस और जैविक इनपुट तैयार करने, पोषक तत्वों के पुनर्चक्रण तथा स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि गोबर प्रोसेसिंग में तकनीक के इस्तेमाल के लिए पांच मॉडल तैयार किए गए हैं।
यदि इन मॉडलों को गांव स्तर पर व्यावहारिक रूप से लागू किया जाता है तो पशुपालकों को दूध के अलावा गोबर से भी अतिरिक्त आय प्राप्त करने का अवसर मिल सकता है।
महिलाओं के लिए डेयरी महत्वपूर्ण आर्थिक माध्यम
अमित शाह ने डेयरी सहकारिता में महिलाओं की भागीदारी को विशेष महत्व दिया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में महिलाएं पशुपालन और दूध उत्पादन से सीधे जुड़ी हैं।
दूध की नियमित बिक्री से मिलने वाली आय महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने में सहायक हो सकती है। इसी कारण डेयरी को महिला सशक्तीकरण, ग्रामीण विकास और परिवार की आर्थिक मजबूती से जोड़कर देखा जा रहा है।
कार्यक्रम में महिला पशुपालकों को सम्मानित किया गया और ‘गौपालक दीदियों’ की भूमिका को रेखांकित किया गया।
डेयरी और पोषण का भी संबंध
डेयरी क्षेत्र का महत्व केवल किसानों की आय तक सीमित नहीं है। दूध और दुग्ध उत्पाद ग्रामीण परिवारों के पोषण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अमित शाह ने कहा कि डेयरी क्षेत्र देश में कुपोषण के खिलाफ प्रयासों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है। उत्पादन बढ़ाने के साथ दूध की गुणवत्ता, सुरक्षित प्रसंस्करण और उपभोक्ताओं तक गुणवत्तापूर्ण उत्पाद पहुंचाना भी आवश्यक है।
मध्य प्रदेश में नए डेयरी प्रोजेक्ट
कार्यक्रम के दौरान मध्य प्रदेश में डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कई परियोजनाओं का शुभारंभ और लोकार्पण किया गया।
उज्जैन में ₹255 करोड़ की लागत से 3 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र का डिजिटल माध्यम से भूमिपूजन किया गया। इसके अलावा भोपाल में करीब ₹16.5 करोड़ की लागत से तैयार 40 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले प्रोडक्ट डेयरी प्लांट का लोकार्पण किया गया।
भोपाल में ही ₹12.42 करोड़ की लागत से तैयार अत्याधुनिक राज्य स्तरीय केंद्रीय प्रयोगशाला का भी लोकार्पण किया गया। शिवपुरी में ₹6.5 करोड़ की लागत से मिनी डेयरी प्लांट के सुदृढ़ीकरण कार्य का डिजिटल माध्यम से लोकार्पण हुआ।
गुणवत्ता परीक्षण से लेकर प्रसंस्करण तक मजबूत होगा ढांचा
इन परियोजनाओं का एक महत्वपूर्ण पक्ष दूध की गुणवत्ता जांच और प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाना है। डेयरी उद्योग के विस्तार के लिए केवल दूध उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि संग्रह से लेकर अंतिम उत्पाद तक गुणवत्ता बनाए रखने के लिए आधुनिक प्रयोगशालाओं, चिलिंग सेंटरों और प्रोसेसिंग प्लांट की जरूरत होती है।
भोपाल में केंद्रीय प्रयोगशाला और प्रोडक्ट डेयरी प्लांट जैसी सुविधाओं का विस्तार इसी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
पशुपालकों को बोनस और लाभांश का वितरण
कार्यक्रम में भोपाल और इंदौर दुग्ध संघ से जुड़े पशुपालकों को बोनस तथा गौशालाओं को सहायता राशि सिंगल क्लिक के माध्यम से उपलब्ध कराई गई। दुग्ध सहकारी समितियों के सदस्यों को लाभांश का वितरण भी किया गया।
इसके साथ ही पशुपालकों को सम्मानित किया गया और डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना के तहत स्वीकृति पत्र प्रदान किए गए।
KRIBHCO और जैवविविधता बोर्ड के बीच समझौता
कार्यक्रम के दौरान भोपाल में ‘मोरवन प्रोजेक्ट’ के तहत नगर वन विकसित करने के लिए KRIBHCO और मध्य प्रदेश राज्य जैवविविधता बोर्ड के बीच समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान भी किया गया।
यह पहल शहरी क्षेत्र में हरित क्षेत्र और जैवविविधता से जुड़े विकास कार्यों को बढ़ावा देने से संबंधित है।
नशामुक्त मध्य प्रदेश के लिए कार्ययोजना पर जोर
केंद्रीय गृह मंत्री ने मध्य प्रदेश को नशीले पदार्थों से मुक्त करने की दिशा में केंद्र और राज्य सरकार के प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और संबंधित विभागों के साथ इस विषय पर विस्तृत चर्चा की जा रही है।
उन्होंने कहा कि नशीले पदार्थों की समस्या से निपटने के लिए विस्तृत और सूक्ष्म कार्ययोजना तैयार कर उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर ध्यान दिया जाएगा।
डेयरी क्षेत्र में छोटे पशुपालकों की भूमिका महत्वपूर्ण
मध्य प्रदेश में डेयरी विस्तार की योजनाओं का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष छोटे और सीमांत पशुपालकों को संगठित बाजार से जोड़ना है। यदि दूध संकलन केंद्र, पशु चिकित्सा सेवाएं, चारा, नस्ल सुधार, कृत्रिम गर्भाधान, टीकाकरण और प्रसंस्करण सुविधाएं गांव के नजदीक उपलब्ध होती हैं, तो पशुपालकों के लिए डेयरी व्यवसाय को अधिक व्यवस्थित रूप से चलाना आसान हो सकता है।
सहकारी मॉडल में दूध की नियमित खरीद और भुगतान व्यवस्था भी पशुपालकों को बाजार की अनिश्चितताओं से कुछ हद तक बचाने में मदद कर सकती है।
मध्य प्रदेश में डेयरी सेक्टर के विस्तार की बड़ी तस्वीर
भोपाल सम्मेलन में सामने आए प्रस्तावों को देखें तो मध्य प्रदेश में डेयरी विकास को केवल दूध उत्पादन तक सीमित नहीं रखा जा रहा है। दूध संकलन, सहकारी समितियां, नस्ल सुधार, पशु स्वास्थ्य, गोबर आधारित अर्थव्यवस्था, प्रसंस्करण, गुणवत्ता परीक्षण, महिला भागीदारी और मूल्यवर्धित उत्पाद—इन सभी को एक व्यापक डेयरी इकोसिस्टम के रूप में विकसित करने पर जोर है।
राज्य में दूध संकलन को 52 लाख लीटर प्रतिदिन तक ले जाने का लक्ष्य, नई सहकारी डेयरियों का विस्तार और बड़े प्रसंस्करण संयंत्रों की स्थापना आने वाले वर्षों में डेयरी क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण आधार तैयार कर सकती है।
हालांकि, इन योजनाओं का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि छोटे पशुपालकों तक सेवाएं कितनी प्रभावी ढंग से पहुंचती हैं, दूध की गुणवत्ता और भुगतान व्यवस्था कितनी पारदर्शी रहती है तथा गांव स्तर पर चारा, पशु स्वास्थ्य, नस्ल सुधार और बाजार से जुड़ी सुविधाओं का विस्तार किस गति से होता है।

























