संतुलित उर्वरक उपयोग और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर जोर!

गांव स्तर पर खाद उपलब्धता से बढ़ेगा संतुलित उर्वरक का उपयोग

संतुलित उर्वरक उपयोग और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर जोर
गांव स्तर पर खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग, मिट्टी के स्वास्थ्य संरक्षण पर बनी सहमति

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नई दिल्ली। कृषि क्षेत्र में सतत विकास और मिट्टी के स्वास्थ्य संरक्षण को लेकर आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में विशेषज्ञों, अधिकारियों और प्रतिभागियों ने संतुलित उर्वरक उपयोग पर विशेष बल दिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य किसानों को दीर्घकालिक लाभ पहुंचाने वाली कृषि नीतियों और व्यवहारिक उपायों पर विचार-विमर्श करना था।

गांव स्तर पर उर्वरक उपलब्धता पर जोर

प्रतिभागियों ने कहा कि यदि गांव स्तर पर खाद और उर्वरकों की स्थानीय उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, तो किसानों द्वारा उर्वरकों का संतुलित और जिम्मेदार उपयोग बढ़ेगा। स्थानीय स्तर पर पर्याप्त आपूर्ति होने से किसानों को समय पर सही मात्रा में उर्वरक मिल सकेगा और अनावश्यक भंडारण या अत्यधिक प्रयोग की प्रवृत्ति में कमी आएगी।

असंतुलित उपयोग से मिट्टी की उर्वरता पर प्रभाव

बैठक में बताया गया कि कई ग्रामीण क्षेत्रों में समय पर उर्वरक उपलब्ध नहीं होने के कारण किसान असंतुलित पोषण प्रबंधन अपनाने को मजबूर हो जाते हैं। इससे मिट्टी की उर्वरता, संरचना और उत्पादकता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि यदि इस दिशा में सुधार नहीं किया गया तो दीर्घकाल में कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है।

जैविक और प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन की आवश्यकता

वक्ताओं ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की संरचना और सूक्ष्म जीवों की सक्रियता प्रभावित होती है। ऐसे में जैविक खाद, हरी खाद और प्राकृतिक खेती जैसी पद्धतियों को अपनाना आवश्यक है। संतुलित उर्वरक प्रबंधन से मिट्टी की सेहत में सुधार लाया जा सकता है और पर्यावरणीय संतुलन भी बनाए रखा जा सकता है।

किसानों में जागरूकता अभियान पर बल

बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि किसानों को मिट्टी परीक्षण, पोषक तत्वों की आवश्यकता और उर्वरकों के उचित अनुपात की जानकारी देना अत्यंत जरूरी है। इसके लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाएं और ग्राम स्तर पर परामर्श सेवाएं प्रभावी माध्यम हो सकते हैं। जागरूकता ही संतुलित उर्वरक उपयोग की कुंजी है।

मातृ पृथ्वी की सुरक्षा को लेकर बनी सहमति

बैठक के समापन पर इस बात पर व्यापक सहमति बनी कि मिट्टी का स्वास्थ्य सुरक्षित रखना ही मातृ पृथ्वी की रक्षा का मूल आधार है। संतुलित उर्वरक उपयोग, जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना और निरंतर जागरूकता अभियान चलाना समय की आवश्यकता है।

विभाग ने सकारात्मक कार्रवाई का दिया आश्वासन

विभाग ने बैठक के दौरान प्राप्त सुझावों पर सकारात्मक रूप से विचार करने और उन्हें आगे की कार्ययोजना में शामिल करने का आश्वासन दिया। अधिकारियों ने कहा कि किसानों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए ठोस कदम उठाए जाएंगे।

वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति

बैठक में अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस शर्मा, संयुक्त सचिव कृष्णा कांत पाठक, संयुक्त सचिव अनुराग रोहतागी, उप सचिव अमर कुशवाहा, उप निदेशक गोरी शंकर सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।