September 28, 2026 7:16 AM

Krishi Times

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डिजिटल ऋण से सशक्त हो रहा मत्स्य पालन क्षेत्र!

🐟 भारतीय मत्स्य पालन क्षेत्र: नीली अर्थव्यवस्था का सशक्त इंजन बनता भारत!

✍️ नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट -भारतीय मत्स्य पालन क्षेत्र आज केवल जीवन-निर्वाह की गतिविधि नहीं रह गया है, बल्कि यह देश के आर्थिक विकास, पोषण सुरक्षा और रोजगार सृजन का एक उभरता हुआ और गतिशील इंजन बन चुका है। ‘नीली परिवर्तन (Blue Transformation)’ के साथ भारत ने वैश्विक मत्स्य उत्पादन में अपनी मजबूत पहचान स्थापित की है और आज देश विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक तथा सबसे बड़ा जलीय कृषि उत्पादक बन गया है।

📊 सकल मूल्य वर्धन और आजीविका में अहम योगदान!

भारत के सकल मूल्य वर्धित (GVA) में मत्स्य पालन क्षेत्र का योगदान 1.12 प्रतिशत है। यह क्षेत्र न केवल किफायती प्रोटीन उपलब्ध कराता है, बल्कि लगभग 3 करोड़ लोगों की आजीविका का आधार भी है। वैश्विक मछली उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी लगभग 8 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।

🌊 विशाल तटरेखा और अंतर्देशीय संसाधनों का लाभ!

देश की 11,099 किलोमीटर से अधिक लंबी तटरेखा, समृद्ध नदी तंत्र, बाढ़ के मैदान और आर्द्रभूमि नेटवर्क ने मत्स्य पालन को व्यापक आधार प्रदान किया है। बीते एक दशक में इस क्षेत्र ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है।

वित्त वर्ष 2024-25 में मछली उत्पादन 197 लाख टन के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया, जो वर्ष 2013-14 के 95.79 लाख टन से लगभग दोगुना है। इसमें अंतर्देशीय मत्स्य पालन का योगदान 75 प्रतिशत से अधिक है, जिसने पकड़-आधारित मत्स्य पालन से संवर्धन-आधारित प्रणाली की ओर संरचनात्मक बदलाव को गति दी है।

💰 विदेशी मुद्रा अर्जन में मजबूत भूमिका!

मत्स्य पालन आज भारत के प्रमुख विदेशी मुद्रा अर्जक क्षेत्रों में शामिल है। वित्त वर्ष 2024-25 में मत्स्य निर्यात 62,408 करोड़ रुपये (7.45 अरब अमेरिकी डॉलर) तक पहुंच गया।
फ्रोजन झींगा निर्यात में अग्रणी उत्पाद रहा, जबकि अमेरिका और चीन प्रमुख बाजार बने रहे।

कृषि सकल मूल्य में इस क्षेत्र की हिस्सेदारी 7.26 प्रतिशत है। साथ ही, मछली उत्पादों पर जीएसटी को 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किए जाने से घरेलू खपत और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा दोनों को बल मिला है।

🏗️ बुनियादी ढांचा और आधुनिकीकरण पर फोकस!

भारत सरकार का मत्स्य विभाग इस क्षेत्र के आधुनिकीकरण के लिए बुनियादी ढांचे के विकास, बाजार पहुंच, प्रौद्योगिकी अपनाने, ट्रेसबिलिटी और जलवायु-लचीली प्रणालियों पर विशेष ध्यान दे रहा है।

प्रमुख पहलों में शामिल हैं—

  • आधुनिक लैंडिंग और पोस्ट-हार्वेस्ट इंफ्रास्ट्रक्चर

  • हिमालयी और पूर्वोत्तर राज्यों में ट्राउट पालन

  • हैचरी नेटवर्क का विस्तार

  • गहरे समुद्र में मछली पकड़ने को बढ़ावा

  • कोल्ड चेन, आइस प्लांट, कोल्ड स्टोरेज और प्रसंस्करण इकाइयों का विकास

सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 तक राष्ट्रीय मछली उत्पादन को 220 लाख टन तक ले जाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।

💻 डिजिटल क्रांति: राष्ट्रीय मत्स्य डिजिटल प्लेटफॉर्म (NFDP)

मत्स्य पालन क्षेत्र में डिजिटल एकीकरण इस परिवर्तन की रीढ़ बनकर उभरा है। इसी क्रम में राष्ट्रीय मत्स्य डिजिटल प्लेटफॉर्म (NFDP) की शुरुआत की गई, जो एक सिंगल-विंडो डिजिटल सिस्टम है।

अब तक इस प्लेटफॉर्म पर लगभग 30 लाख हितधारक पंजीकृत हो चुके हैं, जिन्हें ऋण, बीमा, सहकारी सेवाओं, बाजारों और प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहनों तक सीधी पहुंच मिल रही है।

🏦 ऋण और वित्तपोषण: जरूरत के अनुसार समाधान!

क्षेत्र में पूंजी की जरूरतें व्यापक रूप से भिन्न हैं—

  • छोटे मत्स्यपालकों को 50 हजार से 30 लाख रुपये तक ऋण

  • बड़े प्रसंस्करण और अवसंरचना प्रोजेक्ट्स को 10 करोड़ रुपये या उससे अधिक

इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने बैंकों के साथ मिलकर गतिविधि-आधारित ऋण उत्पाद विकसित किए हैं, जिससे कार्यशील पूंजी और परिसंपत्ति निर्माण दोनों के लिए संरचित ऋण उपलब्ध हो सके।

🪪 केसीसी-मत्स्य: छोटे किसानों के लिए संजीवनी!

वर्ष 2018-19 में शुरू की गई किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) – मत्स्य योजना आज सबसे सुलभ ऋण साधन बन चुकी है।

जून 2025 तक 4.76 लाख केसीसी जारी,  3,214.32 करोड़ रुपये का ऋण वितरण, ब्याज दर 7%, समय पर भुगतान पर 4%

🏗️ एफआईडीएफ और क्रेडिट गारंटी से मजबूती!

मत्स्य पालन एवं जलीय कृषि अवसंरचना विकास कोष (FIDF) के तहत

  • कुल कोष: 7,522.48 करोड़ रुपये,  3% ब्याज सब्सिडी, प्रभावी ब्याज दर लगभग 5%

  • जुलाई 2025 तक 6,369 करोड़ रुपये के 178 प्रस्ताव स्वीकृत

इसके अलावा, नाबार्ड द्वारा प्रबंधित 750 करोड़ रुपये का क्रेडिट गारंटी फंड, 12.5 करोड़ रुपये तक के ऋणों को बिना संपार्श्विक सुरक्षा प्रदान करता है।

📱 घर बैठे ऋण आवेदन की सुविधा!

NFDP के माध्यम से अब 12 राष्ट्रीयकृत बैंक जुड़े हैं। हितधारक मोबाइल या कंप्यूटर से ऋण आवेदन कर सकते हैं और रीयल-टाइम ट्रैकिंग की सुविधा भी उपलब्ध है।

अब तक:

  • 19 हजार से अधिक आवेदन, 350 ऋण स्वीकृत,  15 हजार से 5 करोड़ रुपये तक ऋण वितरण

यह योजना छोटे मछुआरों से लेकर महिला उद्यमियों और स्टार्टअप्स तक, सभी को समान अवसर प्रदान कर रही है।

🤝 प्रशिक्षण और वित्तीय साक्षरता पर जोर!

मत्स्य विभाग और राज्य सरकारों के सहयोग से बैंक ऋण शिविर, मेले और संपर्क कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं।
बीआईआरडी, नाबार्ड और मैनेज के साथ मिलकर बैंकरों के लिए संरचित प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं, जिससे मत्स्य पालन वित्तपोषण को प्राथमिकता मिल सके।

🌍 सतत नीली अर्थव्यवस्था की ओर भारत!

डिजिटल वित्तपोषण, जोखिम-मुक्त ऋण साधन और संस्थागत साझेदारियों के चलते भारतीय मत्स्य पालन क्षेत्र वित्तीय औपचारिकीकरण और सतत विस्तार की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
सब्सिडी-आधारित समर्थन से ऋण-संचालित विकास की ओर यह बदलाव भारत को एक लचीली, समावेशी और पर्यावरण-संवेदनशील नीली अर्थव्यवस्था की दिशा में अग्रसर कर रहा है।

चित्र: प्रतीकात्मक