नाइजर में ICRISAT का बड़ा कदम, 4 लाख किसानों को मिलेगा लाभ!

नाइजर में जलवायु-स्मार्ट कृषि को बढ़ावा: ICRISAT के साथ साझेदारी और मजबूत!

📍 हैदराबाद/नाइजर -नाइजर में, जहां अधिकांश लोगों की आजीविका कृषि पर निर्भर है और जलवायु परिवर्तन, मृदा क्षरण तथा गुणवत्तापूर्ण बीजों की कमी जैसी चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं, वहां ICRISAT के साथ गहरी होती साझेदारी देशभर में अधिक लचीली (रेज़िलिएंट) कृषि प्रणालियों को गति दे रही है।

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पिछले चार दशकों में ICRISAT और नाइजर के बीच सहयोग के तहत जलवायु-सहिष्णु फसलें और किसान-हितैषी नवाचार विकसित किए गए हैं। इन प्रयासों से 4 लाख से अधिक किसानों तक सीधे पहुंच बनाई गई है और 15 लाख से अधिक लोगों को लाभ मिला है।

उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल का ICRISAT मुख्यालय दौरा

इस सहयोग को आगे बढ़ाते हुए 7–9 फरवरी 2026 को नाइजर सरकार का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ICRISAT मुख्यालय पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व नाइजर के कृषि एवं पशुधन मंत्री महामहिम एलहाजी उस्माने महमान ने किया। उनके साथ बीज गुणवत्ता नियंत्रण एवं प्रमाणीकरण निदेशक सुश्री सलामातू हस्साने याकूबा, भारत में नाइजर के राजदूत कर्नल मेजर ज़ादा सैदू, तथा नाइजर कृषि अभियंता संघ के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुलाये बैंकौला उपस्थित रहे।

प्रतिनिधिमंडल ने ICRISAT की उन्नत अनुसंधान प्रयोगशालाओं और तकनीकी प्लेटफॉर्म का अवलोकन किया। इस दौरान डेटा, आनुवंशिकी, फील्ड-आधारित नवाचार, क्षमता निर्माण और मूल्य संवर्धन के माध्यम से नाइजर की शुष्कभूमि कृषि प्रणाली को और मजबूत बनाने पर चर्चा हुई।

बीज प्रणाली और मृदा प्रबंधन पर जोर

बैठक में प्रभाव को व्यापक स्तर पर बढ़ाने के रास्तों की पहचान की गई। चर्चाओं में बीज प्रणाली को सुदृढ़ करने, उर्वरक एवं मृदा उर्वरता प्रबंधन में सुधार, तथा उपयुक्त मशीनीकरण को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया गया, ताकि उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ जलवायु जोखिमों के प्रति लचीलापन भी सुनिश्चित किया जा सके।

ICRISAT के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने कहा,

“नाइजर ने यह दिखाया है कि जब विज्ञान और साझेदारी साथ आते हैं तो क्या संभव है।
जैसे-जैसे जलवायु जोखिम बढ़ रहे हैं, प्राथमिकता यह है कि सफल मॉडलों को तेजी से व्यापक स्तर पर लागू किया जाए।
नाइजर में हमारा फोकस प्रमाणित नवाचारों का विस्तार, राष्ट्रीय क्षमता को मजबूत करना और विज्ञान के माध्यम से समावेशी कृषि विकास को समर्थन देना है।”

ICRISAT ‘नाइजर डोजियर’ का शुभारंभ

इस यात्रा का एक प्रमुख पड़ाव ICRISAT के ‘नाइजर डोजियर’ का शुभारंभ रहा, जिसका औपचारिक अनावरण कृषि एवं पशुधन मंत्री महमान ने किया।

यह डोजियर चार दशकों की साझेदारी का दस्तावेज है, जिसमें जैव-संवर्धित (बायोफोर्टिफाइड) फसलों का विकास, संरक्षण कृषि के माध्यम से मृदा सुधार, लक्षित उर्वरक प्रबंधन और जैविक कीट नियंत्रण में राष्ट्रीय क्षमता सुदृढ़ीकरण जैसे महत्वपूर्ण उपलब्धियां दर्ज हैं।

“नाइजर विज्ञान-आधारित और दीर्घकालिक प्रतिबद्धता वाली साझेदारियों को महत्व देता है। ICRISAT ने हमारे कृषि क्षेत्र की चुनौतियों से निपटने के लिए तकनीकी दक्षता और संस्थागत विश्वसनीयता का निरंतर प्रदर्शन किया है।
यह सहयोग छोटे किसानों को ठोस लाभ पहुंचाते हुए खाद्य संप्रभुता और जलवायु लचीलापन के हमारे लक्ष्यों को आगे बढ़ाता है।”

जीनबैंक को समर्थन और भविष्य की प्रतिबद्धता

मजबूत होती साझेदारी के तहत नाइजर प्रतिनिधिमंडल ने ICRISAT के जीनबैंक के लिए विशेष समर्थन दोहराया। यह जीनबैंक साहेल क्षेत्र में सबसे बड़े और विविध जर्मप्लाज्म संग्रहों में से एक है। नाइजर सरकार ने इसके संचालन को सुदृढ़ करने के लिए योगदान की पुष्टि भी की।

भारत में नाइजर के राजदूत कर्नल मेजर ज़ादा सैदू ने कहा,

“साझेदारी के अगले चरण में नाइजर दूतावास नई पहलों के प्रभावी क्रियान्वयन को सक्रिय रूप से सहयोग देगा, ताकि यह सहयोग नाइजर के लिए समयबद्ध और व्यावहारिक परिणाम देता रहे।”

यह यात्रा वर्ष 2025 में नाइजर में हुए उच्चस्तरीय ICRISAT संवादों और संस्थान के नाइजर कार्यालय के नए उत्साह को आगे बढ़ाती है। दोनों पक्षों ने साहेल क्षेत्र में जलवायु-स्मार्ट कृषि को बढ़ावा देने, राष्ट्रीय क्षमता सुदृढ़ करने और खाद्य सुरक्षा की दिशा में प्रगति तेज करने की साझा प्रतिबद्धता दोहराई।

ये प्राथमिकताएं ICRISAT की रणनीतिक योजना 2025–2030 के अनुरूप हैं, जो अफ्रीका की शुष्कभूमि में विज्ञान-आधारित, लचीली और समावेशी खाद्य प्रणालियों पर जोर देती है।