विश्व बकरी दिवस: मथुरा में बकरी पालन कार्यशाला का आयोजन
मथुरा, विश्व बकरी दिवस-2025 के अवसर पर केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान, मखदूम, मथुरा में “बकरी पालन से समृद्धि की ओर” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यशाला अनुसूचित जाति एवं जनजाति विकास कार्य योजना के अंतर्गत आयोजित की गई, जिसमें मथुरा और भरतपुर जनपदों के करीब 250 बकरी पालकों ने सक्रिय भागीदारी की।
कार्यक्रम की मुख्य झलकियां 
कार्यशाला की अध्यक्षता केंद्रीय पशुपालन, मत्स्य, डेयरी एवं पंचायती राज मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में सोनपाल, निदेशक, दीन दयाल शोध संस्थान, फरह उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान निदेशक डॉ. मनीष कुमार चेटली द्वारा मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथि के स्वागत से हुआ। उन्होंने अपने स्वागत उद्बोधन में कहा—“इस कार्यशाला का उद्देश्य बकरी पालकों को वैज्ञानिक तकनीकों से प्रशिक्षित करना और उनकी आय को दोगुना करना है। हमारा लक्ष्य केवल कागज़ी योजनाएँ नहीं, बल्कि खेत-स्तर पर मापनीय परिणाम हैं। क्लाइमेट-स्मार्ट हाउसिंग, हरित चारा कैलेंडर, फीड-कॉस्ट अनुकूलन और किड-सर्वाइवल सुधार जैसी तकनीकों को लागू कर किसानों की आय में सीधा सुधार लाना हमारी प्राथमिकता है।”
विशेषज्ञों के अनुभव साझा
संस्थान के वैज्ञानिकों ने कार्यशाला में किसानों को आधुनिक बकरी पालन की विभिन्न तकनीकों पर मार्गदर्शन दिया।
मुकेश भगत ने हाउसिंग डिज़ाइन, उचित वेंटिलेशन, जल-छाया व्यवस्था, स्वच्छ बिछावन और किड-मैनेजमेंट की तकनीकों पर जोर देते हुए बताया कि सही हाउसिंग डिज़ाइन से रोग-दबाव कम होता है और उत्पादन क्षमता बढ़ती है।
डीएपीएससी इंचार्ज डॉ. गोपाल दास ने कहा—
“नस्ल-चयन, समयबद्ध प्रजनन प्रबंधन और किड-मॉर्टेलिटी में कमी, ये तीन स्तंभ झुंड की आय बढ़ाने के लिए सबसे अहम हैं। खेत स्तर पर क्वारंटीन पेन, हीट-स्ट्रेस प्रोटोकॉल और व्यवस्थित प्रजनन रिकार्ड रखने से जोखिम घटता है और किसानों को क्रेडिट एक्सेस भी मिलता है।”
केंद्रीय मंत्री का संबोधन
अपने प्रेरणादायी संबोधन में केंद्रीय मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने कहा कि संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा “लैब से लैंड तक” ज्ञान पहुँचाने का प्रयास सराहनीय है। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे परंपरागत पद्धतियों से हटकर आधुनिक और वैज्ञानिक विधियों को अपनाएँ।
“भारत कृषि एवं पशुपालन क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। एफएमडी (खुरपका-मुंहपका) मुक्त भारत ही पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कृषि क्षेत्र में संरचनात्मक और क्रांतिकारी बदलाव हुए हैं। इन्फ्रास्ट्रक्चर, वैल्यू-चेन, डिजिटलीकरण और किसान-केंद्रित नीतियों ने उत्पादकता और बाज़ार जुड़ाव को मजबूत बनाया है। अब हमारा संकल्प है कि छोटे और सीमांत किसानों, महिलाओं और युवाओं तक विज्ञान-आधारित प्रशिक्षण और नवाचार पहुँचाकर उनकी समृद्धि सुनिश्चित की जाए।”
नए समझौते और वितरण
कार्यशाला के दौरान किसानों एवं बकरी पालन के सतत विकास हेतु संस्थान द्वारा युवान एग्रो (आगरा) और शून्य एग्रो टेक के साथ तकनीकी सहयोग समझौता (MoU) किया गया। इसके अतिरिक्त, अनुसूचित जाति एवं जनजाति विकास कार्य योजना के तहत बकरी पालकों को आवश्यक सामग्री का वितरण भी किया गया।
समापन
कार्यक्रम का संचालन डॉ. ए.के. दीक्षित ने किया। समन्वयक के रूप में डॉ. मुकेश भकत, डॉ. गोपाल दास एवं डॉ. अरविंद कुमार उपस्थित रहे। कार्यशाला में बड़ी संख्या में किसान, बकरी पालक, वैज्ञानिक, प्रशासनिक और तकनीकी अधिकारी शामिल हुए।
यह कार्यशाला बकरी पालन को वैज्ञानिक और आधुनिक ढाँचे से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई, जो न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होगी, बल्कि ग्रामीण आजीविका को सशक्त करने में भी योगदान देगी।