खेती तभी फायदे का धंधा बनेगी जब पैदावार बढ़े और लागत घटे!

विदिशा में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का दौरा

खेती को लाभकारी धंधा बनाने, किसानों की लागत घटाने और स्वदेशी अपनाने का दिया संदेश

विदिशा। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने अपने संसदीय क्षेत्र विदिशा का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने उन्नत कृषि तकनीक संगोष्ठी, खेल दिवस समारोह और कई अन्य कार्यक्रमों में सहभागिता की। मंत्री ने कार्यक्रम की शुरुआत गणेश पूजन से की और छात्र-छात्राओं से आत्मीय संवाद किया।

खेल दिवस पर बच्चों के साथ साइकिल यात्रा

खेल दिवस कार्यक्रम में शिवराज सिंह चौहान ने युवाओं और स्कूली बच्चों के साथ करीब 2 किलोमीटर लंबी साइकिल यात्रा की। उन्होंने बच्चों से खेलों और स्वास्थ्य पर बातचीत की तथा खेलों को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने पर जोर दिया। मंत्री ने कहा कि खेलों से अनुशासन, आत्मविश्वास और स्वास्थ्य में सुधार होता है।

कृषि उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि, 3.7% की ऐतिहासिक ग्रोथ

विदिशा में आयोजित उन्नत कृषि तकनीक संगोष्ठी में किसानों को संबोधित करते हुए चौहान ने कहा कि इस वर्ष भारत ने खाद्यान्न उत्पादन में इतिहास रच दिया है। कृषि क्षेत्र ने 3.7 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज की है और अन्न के भंडार भर गए हैं। उन्होंने याद दिलाया कि एक समय ऐसा भी था जब भारत को अमेरिका से खराब गेहूं (पीएल-480) आयात करना पड़ता था, लेकिन आज देश गेहूं, चावल और मक्का का रिकॉर्ड उत्पादन कर रहा है।

उन्होंने कहा कि “दुनिया के कुछ देश भारत पर दबाव डालते थे कि हम अपनी कृषि उपज का बाजार पूरी तरह खोल दें। लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हमने स्पष्ट कर दिया है कि राष्ट्रहित सर्वोपरि है और किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं होगा।

किसानों को नकली दवाइयों से मिलेगी मुक्ति

केंद्रीय मंत्री ने किसानों की समस्याओं पर विशेष रूप से नकली दवाइयों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पहले किसानों को जब खाद लेने जाना पड़ता था, तो डीलर यूरिया या डीएपी के साथ जबरन बोतलें थमा देते थे, जिनमें नकली या बेअसर दवाइयां होती थीं।

उन्होंने खुलासा किया कि देश में बायोस्टिमुलेन्ट नाम से लगभग 30 हजार दवाइयां बेची जा रही थीं, जिनमें से केवल 682 ही वैज्ञानिक परीक्षण में सही पाई गईं। उन्होंने कहा,

अब केवल वही दवाइयां बिकेंगी जिनका परीक्षण आईसीएआर या कृषि विश्वविद्यालयों में हुआ हो। किसान को जो चाहिए वही मिलेगा, कोई जबरन बोतल नहीं दी जाएगी। अगर ऐसा हुआ तो एफआईआर होगी और मैं खुद कार्रवाई देखूंगा।”

उन्होंने चेतावनी दी कि नकली दवाइयों से यदि किसानों की फसल बर्बाद होती है तो संबंधित कंपनियों का लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा और किसानों को मुआवजा दिलाया जाएगा।

खेती को लाभकारी बनाने के लिए छह सूत्रीय रणनीति

चौहान ने कहा कि खेती को सही मायने में लाभकारी बनाने के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि लागत घटाना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने किसानों के लिए छह सूत्रीय रणनीति का उल्लेख किया –

  1. उत्पादन बढ़ाना

  2. लागत घटाना

  3. उत्पादन का उचित मूल्य सुनिश्चित करना

  4. नुकसान की भरपाई करना

  5. कृषि का विविधीकरण करना

  6. प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना

उन्होंने कहा कि कृषि में विविधता अपनाने से किसान सुरक्षित रहते हैं। जैसे हमारे पूर्वज कहते थे – चार घूंट पर चार फसल बोई लो यानी फसल बदलते रहो। यही परंपरा आज भी प्रासंगिक है।

रबी फसल के लिए कृषि संकल्प अभियान

केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि देशभर में लगभग 16 हजार वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं में अनुसंधान कर रहे हैं, लेकिन उनका लाभ किसानों तक सीधे नहीं पहुंच पाता था। इस कमी को दूर करने के लिए सरकार ने 2170 टीमें गठित कर वैज्ञानिकों को सीधे किसानों के बीच भेजा है।

उन्होंने घोषणा की कि आगामी रबी सीजन के लिए 3 अक्टूबर से फिर वैज्ञानिक किसानों के खेतों में जाएंगे और उन्हें उन्नत तकनीक, लागत घटाने और उत्पादन बढ़ाने के उपायों की जानकारी देंगे।

स्वदेशी अपनाने का आह्वान

अपने संबोधन के अंत में चौहान ने देशवासियों से आह्वान किया कि वे रोजमर्रा के जीवन में केवल स्वदेशी वस्तुओं का ही उपयोग करें। उन्होंने कहा –

“खाने-पीने का सामान हो, पहनने की चीज़ें हों या तेल-साबुन जैसी दैनिक ज़रूरत की वस्तुएं – सब कुछ देश में बना हुआ ही खरीदें। विदेशी सामान लेने से देश का धन बाहर जाता है, जबकि स्वदेशी खरीदने से अपने ही देशवासियों को रोजगार और व्यापार मिलता है।”

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