नई दिल्ली में जुटे नीति-निर्माता व विशेषज्ञ, कृषि जोखिम प्रबंधन पर मंथन
नई दिल्ली, – भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) के संयुक्त तत्वावधान में आज नई दिल्ली में “प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) पर ग्लोबल बेंचमार्किंग परामर्श कार्यशाला” का शुभारंभ हुआ। इस कार्यशाला का उद्देश्य कृषि जोखिम प्रबंधन को वैश्विक दृष्टिकोण से मजबूत करना और भारत की फसल बीमा प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं से जोड़ना है।
सीईओ, पीएमएफबीवाई का संबोधन
कार्यशाला में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मुक्तानंद अग्रवाल ने मुख्य वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि पीएमएफबीवाई आज दुनिया की सबसे बड़ी फसल बीमा योजनाओं में से एक है और इसने करोड़ों किसानों को प्राकृतिक आपदाओं और जलवायु परिवर्तन से जुड़े जोखिमों से सुरक्षा दी है।
अग्रवाल ने तीन मुख्य बिंदुओं पर बल दिया
-
पीएमएफबीवाई की अब तक की यात्रा और उपलब्धियां, जिसने किसानों को बीमा कवरेज व राहत प्रदान कर खेती को सुरक्षित बनाया।
-
अंतरराष्ट्रीय अनुभवों से सीखने के लिए वैश्विक बेंचमार्किंग की आवश्यकता, ताकि भारत की प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
-
जोखिम-साझाकरण तंत्र को मजबूत करने, तकनीकी नवाचारों (जैसे उपग्रह आधारित उपज आकलन, डिजिटल दावों का निपटारा) और किसान-केंद्रित सुधारों को लागू करने पर जोर।
उन्होंने कहा कि “भारत की कृषि अर्थव्यवस्था को सुरक्षित करने के लिए तकनीक और बीमा का एकीकरण आवश्यक है। पीएमएफबीवाई न केवल किसानों का सहारा है बल्कि जलवायु जोखिमों से निपटने की देश की क्षमता का प्रतीक भी है।”
यूएनडीपी प्रतिनिधि का संदेश
कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में यूएनडीपी इंडिया की रेज़िडेंट रिप्रेजेंटेटिव डॉ. एंजेला लुसिगी ने अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि यह परामर्श ऐसे समय में हो रहा है जब जलवायु परिवर्तन तेजी से कृषि पर जोखिम बढ़ा रहा है।
उन्होंने भारत की फसल बीमा योजना की तकनीकी प्रगति की सराहना करते हुए कहा कि—
-
सैटेलाइट आधारित उपज आकलन,
-
रियल-टाइम वेदर मॉनिटरिंग,
-
और नेशनल क्रॉप इंश्योरेंस पोर्टल
ने फसल बीमा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, तेज और विश्वसनीय बनाया है।
डॉ. लुसिगी ने कहा, “भारत का संस्थागत ढांचा, तकनीकी एकीकरण और व्यापक स्तर पर प्रभाव वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं का उदाहरण है। यूएनडीपी किसानों की सुरक्षा और सतत कृषि के लिए भारत सरकार के साथ साझेदारी को और मजबूत करेगा।”
कार्यशाला में शामिल हितधारक
इस कार्यशाला में नीति-निर्माता, बीमा कंपनियों के प्रतिनिधि, वैश्विक विशेषज्ञ, शोध संस्थान और किसान हितधारक शामिल हुए। सभी प्रतिभागियों ने कृषि जोखिम प्रबंधन को और सशक्त बनाने, बीमा कवरेज का दायरा बढ़ाने और जलवायु-लचीली कृषि प्रणालियां विकसित करने पर विचार साझा किए।
कार्यशाला का महत्व
यह कार्यशाला न केवल भारत बल्कि वैश्विक स्तर पर कृषि जोखिम प्रबंधन को नई दिशा देने का प्रयास है। इसका लक्ष्य है—
-
किसानों को जलवायु परिवर्तन से बढ़ते खतरों से सुरक्षित करना,
-
फसल बीमा को अधिक तकनीक-सक्षम और किसान-केंद्रित बनाना,
-
तथा कृषि को दीर्घकालिक रूप से सतत और लचीला बनाना।