October 6, 2026 4:11 AM

Krishi Times

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कृषि क्षेत्र में योजनाओं के जमीनी असर को लेकर केंद्र की समीक्षा!

कृषि मंत्रालय की पहली समग्र मासिक समीक्षा बैठक, किसानों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर जोर!

नई दिल्ली। कृषि क्षेत्र में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, किसानों तक उनके वास्तविक लाभ की पहुंच और कृषि ढांचे को मजबूत करने के लिए कृषि भवन, नई दिल्ली में कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में मंत्रालय की पहली समग्र मासिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में मंत्रालय के विभिन्न विभागों, प्रभागों और राष्ट्रीय मिशनों की प्रगति की व्यापक समीक्षा की गई।

बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि कृषि योजनाओं की सफलता केवल बजट खर्च या कागजी उपलब्धियों से नहीं मापी जाएगी, बल्कि यह देखा जाएगा कि योजनाओं का असर किसान की आय, खेती की लागत, उत्पादन, जोखिम और बाजार तक पहुंच पर कितना पड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विजन को आधार बनाया गया जिसमें योजनाओं का बदलाव फाइलों में नहीं, बल्कि किसानों की जिंदगी में दिखाई देने पर जोर दिया गया है।

बैठक में कृषि सचिव अतीश चंद्रा सहित मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और विभिन्न मिशनों के निदेशक मौजूद रहे। निर्णय लिया गया कि अब मंत्रालय की योजनाओं और कार्यक्रमों की नियमित मासिक समीक्षा होगी तथा अधिकारियों के लिए वित्तीय और भौतिक प्रगति के स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किए जाएंगे।

डिजिटल कृषि में बड़ी उपलब्धि, 10.77 करोड़ से ज्यादा फार्मर आईडी तैयार

डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन की समीक्षा के दौरान बताया गया कि देश में 14 करोड़ किसानों को डिजिटल रूप से जोड़ने के लक्ष्य की दिशा में अब तक 10.77 करोड़ से अधिक फार्मर आईडी तैयार की जा चुकी हैं। इसे कृषि क्षेत्र में डिजिटल बदलाव की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

फार्मर आईडी के जरिए किसान की कृषि संबंधी जानकारी को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने में मदद मिलेगी। इससे सरकारी योजनाओं, संस्थागत ऋण, फसल बीमा, एमएसपी खरीद और आपदा राहत जैसी सेवाओं को अधिक पारदर्शी तरीके से किसानों तक पहुंचाने का रास्ता मजबूत होगा।

सरकार का प्रयास है कि डिजिटल पहचान के माध्यम से योजनाओं का लाभ पात्र किसान तक सीधे पहुंचे और अनावश्यक कागजी प्रक्रिया तथा बिचौलियों की भूमिका कम हो।

डिजिटल क्रॉप सर्वे से खेती की वास्तविक तस्वीर होगी स्पष्ट

डिजिटल कृषि ढांचे के विस्तार के तहत चालू खरीफ सीजन में अब तक 26.73 करोड़ से अधिक खेतों का डिजिटल सर्वे पूरा होने की जानकारी दी गई। इसके जरिए खेत में कौन सी फसल बोई गई है, इसका अधिक सटीक और समयबद्ध रिकॉर्ड तैयार करने में मदद मिलेगी।

राष्ट्रीय मृदा मानचित्रण कार्यक्रम के तहत 8.03 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र का डिजिटल मैपिंग कार्य भी पूरा किया जा चुका है। इससे भविष्य में फसल योजना, मिट्टी प्रबंधन और कृषि नीति तैयार करने में बेहतर डेटा उपलब्ध हो सकेगा।

बैठक में निर्देश दिया गया कि जिन राज्यों में फार्मर आईडी और डिजिटल क्रॉप सर्वे की गति अपेक्षाकृत धीमी है, वहां विशेष कैंप लगाकर किसानों को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ा जाए।

22 अक्टूबर से शुरू होगा राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’

कृषि मंत्रालय की समीक्षा बैठक में मिट्टी की सेहत, फसल अवशेष प्रबंधन और संतुलित उर्वरक उपयोग को लेकर बड़ा अभियान शुरू करने का निर्णय लिया गया। अधिकारियों को बताया गया कि 22 अक्टूबर से देशभर में ‘खेत बचाओ अभियान’ शुरू किया जाएगा।

इस अभियान का उद्देश्य किसानों को मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने, फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन, पराली नहीं जलाने और पोषक तत्वों के संतुलित इस्तेमाल के प्रति जागरूक करना होगा।

मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अभियान केवल बैठकों और जागरूकता कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। कृषि वैज्ञानिकों, कृषि विज्ञान केंद्रों और मैदानी कर्मचारियों को सीधे गांव और खेत तक पहुंचना होगा।

किसानों को मिट्टी की जांच, जैविक कार्बन बढ़ाने, संतुलित खाद प्रबंधन और फसल अवशेषों के उपयोग की व्यावहारिक जानकारी देने पर विशेष ध्यान रहेगा।

दलहन उत्पादन में राष्ट्रीय लक्ष्य से आगे निकला देश

दलहन के मामले में आत्मनिर्भरता हासिल करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई। राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के तहत वर्ष 2025-26 में देश में 266 लाख टन के लक्ष्य के मुकाबले 274.09 लाख टन दलहन उत्पादन हुआ।

दलहन की बुआई का क्षेत्र भी निर्धारित लक्ष्य से अधिक रहा। 283 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले 286.46 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में दलहन की खेती हुई।

बैठक में दलहन उत्पादन को और बढ़ाने पर जोर दिया गया, क्योंकि भारत में दालों की घरेलू मांग काफी अधिक है और आयात पर निर्भरता कम करना खाद्य सुरक्षा के साथ किसानों की आय के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।

तिलहन और खाद्य तेल में आत्मनिर्भरता पर फोकस

खाद्य तेलों के मामले में आयात निर्भरता घटाने के लिए भी सरकार उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रही है। वर्ष 2025-26 में 427 लाख टन के लक्ष्य के मुकाबले 430.59 लाख टन तिलहन पैदावार दर्ज किया गया।

तिलहन की बुआई का क्षेत्र भी 308.86 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया। घरेलू खाद्य तेल उत्पादन 2023-24 के 121.75 लाख टन से बढ़कर 2025-26 में 129.96 लाख टन तक पहुंचने की जानकारी दी गई।

ऑयल पाम मिशन के तहत वर्ष 2026-27 में 1.19 लाख हेक्टेयर नए क्षेत्र को कवर करने का लक्ष्य रखा गया है। शुरुआती महीनों में ही करीब 50 हजार हेक्टेयर क्षेत्र इसके दायरे में आ चुका है।

मंत्री ने कहा कि देश को दाल और खाद्य तेल के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने के लिए उत्पादन, उत्पादकता और किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने पर एक साथ काम करना होगा।

प्राकृतिक खेती से जुड़े 27.32 लाख किसान

प्राकृतिक खेती को लेकर भी बैठक में सकारात्मक प्रगति सामने आई। वर्ष 2025-26 में 18.75 लाख किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने के लक्ष्य के मुकाबले 20.93 लाख किसान इससे जुड़े।

इसी अवधि में 7.50 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले 10.32 लाख हेक्टेयर क्षेत्र प्राकृतिक खेती के दायरे में आया। अब तक देशभर में कुल 27.32 लाख किसान प्राकृतिक खेती से जुड़ चुके हैं और 12.85 लाख हेक्टेयर क्षेत्र कवर किया जा चुका है।

ग्रामीण स्तर पर इस मॉडल को आगे बढ़ाने के लिए 33,257 से अधिक कृषि सखियों और कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन्स को तैनात किया गया है। इनका काम किसानों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार प्राकृतिक खेती की तकनीकों की जानकारी देना और उन्हें अपनाने में सहयोग करना है।

बागवानी उत्पादन 370.84 मिलियन टन तक पहुंचा

बागवानी क्षेत्र में भी उत्पादन लक्ष्य से अधिक रहने की जानकारी दी गई। मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर के तहत 360 मिलियन टन के लक्ष्य के मुकाबले 370.84 मिलियन टन उत्पादन दर्ज किया गया।

नई नर्सरियों और बाग क्षेत्र के विस्तार में भी लक्ष्य से अधिक प्रगति हुई है। 50 नई नर्सरियों के लक्ष्य के मुकाबले 187 नई नर्सरियां विकसित की गईं, जबकि एक लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले 1.90 लाख हेक्टेयर नए बाग विकसित किए गए।

बागवानी किसानों के लिए यह क्षेत्र आय के विविधीकरण का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है, क्योंकि फल, सब्जियां, मसाले और अन्य उच्च मूल्य वाली फसलों से प्रति इकाई क्षेत्र अधिक आमदनी की संभावनाएं रहती हैं।

FPO से जुड़े 30 लाख से अधिक किसान, कारोबार में भी बढ़ोतरी

10,000 किसान उत्पादक संगठन यानी FPO योजना की समीक्षा में बताया गया कि अतिरिक्त 2.40 लाख किसानों को जोड़ने के लक्ष्य के मुकाबले 30.11 लाख किसान FPO से जुड़ चुके हैं।

FPO के जरिए छोटे और सीमांत किसान सामूहिक रूप से बीज, खाद और कृषि इनपुट खरीदने के साथ अपनी उपज को बेहतर तरीके से बाजार में बेच सकते हैं। इससे उनकी सौदेबाजी की क्षमता बढ़ती है।

FPO का औसत सालाना टर्नओवर भी 38 लाख रुपये से बढ़कर 141.76 लाख रुपये तक पहुंचने की जानकारी बैठक में दी गई। यह संकेत देता है कि सही प्रबंधन और बाजार से जुड़ाव मिलने पर किसान संगठनों को ग्रामीण व्यवसाय के मजबूत केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है।

PM-RKVY के तहत 664 परियोजनाओं को मंजूरी

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना यानी PM-RKVY की समीक्षा करते हुए बताया गया कि वर्ष 2026-27 के लिए अब तक 664 नई परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।

इनमें 314 प्रयोगशालाओं, गोदामों और कस्टम हायरिंग सेंटर से जुड़ी परियोजनाएं तथा 303 बीज उत्पादन और खेती का रकबा बढ़ाने से संबंधित परियोजनाएं शामिल हैं।

योजना के लिए कुल 8,550 करोड़ रुपये के आवंटन में से 3,151.80 करोड़ रुपये की प्रगति बताई गई। बैठक में कहा गया कि राज्यों की कृषि प्राथमिकताओं और किसानों की जरूरतों को देखते हुए कृषि विकास परियोजनाओं के लिए धन की कमी नहीं आने दी जाएगी।

कृषि अवसंरचना कोष से 1.01 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा ऋण मंजूर

कृषि अवसंरचना कोष यानी AIF के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक कृषि ढांचा तैयार करने के प्रयास जारी हैं। अब तक 2.25 लाख से अधिक परियोजनाओं के लिए 1,01,502 करोड़ रुपये से ज्यादा के ऋण स्वीकृत किए जा चुके हैं।

इन परियोजनाओं के जरिए वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज, प्राथमिक प्रसंस्करण केंद्र और कस्टम हायरिंग सेंटर जैसे बुनियादी ढांचे को बढ़ावा मिल रहा है।

इस तरह के ढांचे का सीधा फायदा किसानों को फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने, उपज को कुछ समय तक सुरक्षित रखने और बेहतर बाजार मूल्य मिलने पर बिक्री करने में हो सकता है।

PMFBY में किसानों का नामांकन 23 प्रतिशत बढ़ा

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों की भागीदारी में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। पिछले खरीफ सीजन में 2.30 करोड़ किसानों के मुकाबले चालू खरीफ सीजन में नामांकन बढ़कर 2.83 करोड़ से अधिक हो गया है।

यह लगभग 23 प्रतिशत की वृद्धि है। बीमित क्षेत्र 2.97 करोड़ हेक्टेयर और बीमित राशि 1.86 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की जानकारी दी गई।

बैठक में फसल बीमा दावों के शीघ्र निपटारे पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि किसानों के दावों में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए और शिकायतों का निर्धारित समयसीमा के भीतर समाधान किया जाए।

मृदा स्वास्थ्य कार्ड और सूक्ष्म सिंचाई पर जोर

मृदा स्वास्थ्य योजना के तहत अब तक 16 लाख से अधिक सॉइल हेल्थ कार्ड तैयार किए जाने की जानकारी दी गई। इसके अलावा पीएम-श्री स्कूलों में 1,140 मिनी सॉइल टेस्टिंग लैब स्थापित की जा चुकी हैं।

मिट्टी की जांच के आधार पर खाद और पोषक तत्वों का इस्तेमाल करने से किसानों को अनावश्यक लागत कम करने और मिट्टी की उत्पादकता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ योजना के तहत 1,504.63 करोड़ रुपये के उपयोग से 4.86 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को माइक्रो इरिगेशन से जोड़ा गया है। पानी की बचत और सीमित जल संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल के लिहाज से सूक्ष्म सिंचाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

KVK, आत्मा और कृषि विश्वविद्यालय अब ‘एक टीम’ की तरह करेंगे काम

कृषि अनुसंधान और किसानों के बीच मौजूद दूरी को कम करने के लिए विस्तार तंत्र में बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया। बैठक में निर्देश दिया गया कि कृषि विज्ञान केंद्र यानी KVK, कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसी यानी आत्मा और राज्य कृषि विश्वविद्यालय अलग-अलग काम करने के बजाय समन्वित टीम के रूप में काम करें।

इसका उद्देश्य कृषि वैज्ञानिकों द्वारा विकसित तकनीकों और शोध परिणामों को खेत तक तेजी से पहुंचाना है।

किसान मेलों के प्रारूप में बदलाव की जरूरत पर भी जोर दिया गया। केवल औपचारिक कार्यक्रमों के बजाय ऐसे किसान मेले आयोजित करने की बात कही गई जिनमें किसान सीधे वैज्ञानिकों, कंपनियों, विशेषज्ञों और बाजार से जुड़ सकें।

मखाना किसानों को मिल रहा तीन गुना तक बेहतर दाम

मखाना विकास मिशन की समीक्षा के दौरान किसानों को मिल रहे बेहतर मूल्य का मुद्दा सामने आया। बताया गया कि मिशन से जुड़े किसानों को अपनी उपज के लिए तीन गुना तक अधिक कीमत मिलने लगी है।

बैठक में मखाना किसानों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों की गुणवत्ता की जांच करने के निर्देश दिए गए। केवल प्रशिक्षण की संख्या बढ़ाने के बजाय यह देखना जरूरी बताया गया कि प्रशिक्षण के बाद किसान वास्तव में नई तकनीक और बेहतर उत्पादन पद्धतियां अपना रहे हैं या नहीं।

इसके साथ राष्ट्रीय बांस मिशन, राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन, कपास की पैदावार बढ़ाने के लिए ‘कपास क्रांति’ मिशन तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र में जैविक मूल्य संवर्धन कार्यक्रमों की प्रगति तेज करने पर भी जोर दिया गया।

कमजोर प्रदर्शन वाले राज्यों और जिलों पर सख्ती

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत 74 आउटपुट इंडिकेटर्स के आधार पर जिलों की रैंकिंग की भी समीक्षा की गई। देश का औसत स्कोर अप्रैल में 18.85 से बढ़कर अगस्त में 46.89 होने की जानकारी दी गई।

जहां बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों की सराहना की गई, वहीं लगातार पिछड़ रहे जिलों को लेकर चिंता जताई गई।

मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि योजनाओं के क्रियान्वयन में सुस्ती बरतने वाले जिलों की नियमित निगरानी की जाए। जरूरत पड़ने पर राज्य के कृषि विभाग और मुख्यमंत्री स्तर तक मामला उठाकर समस्याओं का समाधान कराया जाए।

PM-KISAN में पात्र किसानों को जोड़ने और अपात्र लाभार्थियों को हटाने के निर्देश

बैठक में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की पारदर्शिता पर भी जोर दिया गया। निर्देश दिया गया कि सभी पात्र किसानों को योजना से जोड़ा जाए और अपात्र लाभार्थियों को सूची से बाहर किया जाए।

सरकार का जोर इस बात पर है कि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण व्यवस्था के जरिए सहायता राशि सही लाभार्थी तक पहुंचे और किसी भी स्तर पर लीकेज की गुंजाइश न रहे।

PM-AASHA की खरीद व्यवस्था की भी होगी नियमित निगरानी

PM-AASHA के तहत कृषि उपज की वास्तविक खरीद का मासिक आकलन करने के निर्देश दिए गए। बैठक में खरीद व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने और अनावश्यक रूप से खरीद अवधि बढ़ाने की प्रवृत्ति को रोकने पर जोर दिया गया।

किसानों के लिए केवल खरीद की घोषणा पर्याप्त नहीं है। उन्हें निर्धारित समय पर वास्तविक खरीद सुविधा, उचित भुगतान और स्थानीय स्तर पर प्रभावी खरीद केंद्र उपलब्ध होना जरूरी है। इसी दिशा में निगरानी मजबूत करने की बात कही गई।

हर महीने होगी योजनाओं की वित्तीय और भौतिक समीक्षा

बैठक का एक महत्वपूर्ण निर्णय यह रहा कि कृषि मंत्रालय की योजनाओं की वित्तीय और भौतिक प्रगति की मासिक समीक्षा को अनिवार्य बनाया जाएगा।

अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वित्तीय वर्ष के अंतिम महीनों में अचानक खर्च बढ़ाने के बजाय पूरे वर्ष निर्धारित तिमाही अनुपात के अनुसार योजनाओं का क्रियान्वयन किया जाए।

इसका उद्देश्य योजनाओं के लिए जारी धन का समय पर और प्रभावी इस्तेमाल सुनिश्चित करना है ताकि बजट का लाभ जमीन पर दिखाई दे।

अधिकारियों को फील्ड विजिट बढ़ाने के निर्देश

बैठक में केवल कागजी रिपोर्टों पर निर्भर रहने के बजाय वरिष्ठ अधिकारियों को स्वयं फील्ड विजिट करने के निर्देश दिए गए। मखाना मिशन के प्रशिक्षण, प्राकृतिक खेती के मॉडल, सॉइल हेल्थ कार्ड के वास्तविक इस्तेमाल और किसान मेलों के प्रभाव का जमीनी स्तर पर आकलन करने पर जोर दिया गया।

मंत्री ने कहा कि मंत्रालय की योजनाओं की वास्तविक सफलता का पता तभी चलेगा जब अधिकारी खेत, गांव और किसान के बीच जाकर उनकी समस्याओं को समझेंगे।

‘फाइल से खेत तक’ बदलाव को बनाने पर जोर

कृषि मंत्रालय की इस मासिक समीक्षा बैठक का व्यापक संदेश यही रहा कि सरकारी योजनाओं को केवल लक्ष्य, बजट और रिपोर्ट तक सीमित नहीं रखा जाए। डिजिटल फार्मर आईडी, फसल बीमा, प्राकृतिक खेती, FPO, कृषि अवसंरचना, दलहन-तिलहन उत्पादन और मृदा स्वास्थ्य जैसी पहलों का वास्तविक उद्देश्य किसान की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना है।

‘खेत बचाओ अभियान’ से लेकर डिजिटल कृषि और फसल बीमा तक सरकार अब योजनाओं के क्रियान्वयन में निगरानी और जमीनी संपर्क बढ़ाने पर जोर दे रही है। यदि इन पहलों का प्रभावी क्रियान्वयन राज्यों और जिलों तक सुनिश्चित होता है, तो इसका असर खेती की लागत, जोखिम प्रबंधन, उत्पादन, बाजार पहुंच और किसानों की आय के कई स्तरों पर दिखाई दे सकता है।

बैठक में दिए गए निर्देशों से यह संकेत भी मिला कि आने वाले समय में कृषि मंत्रालय योजनाओं की उपलब्धियों के साथ-साथ किसान तक वास्तविक लाभ पहुंचने की गति और गुणवत्ता को भी समीक्षा का प्रमुख आधार बनाएगा।