यूपी, कृषि मंत्री ने दिखाई राह: आधुनिक पद्धति से धान की बुवाई

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने की धान की ‘लाइन सोइंग’ तकनीक से बुवाई, किसानों को होंगे अनेक फायदे

अयोध्या, कुमारगंज। उत्तर प्रदेश सरकार आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर किसानों की आय बढ़ाने और खेती को लाभकारी बनाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने रविवार को अयोध्या जिले के आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंज परिसर में ‘लाइन सोइंग’ (पंक्ति में बुआई) विधि से धान की बुवाई की।

इस अवसर पर मंत्री शाही ने कहा कि लाइन सोइंग तकनीक पारंपरिक रोपाई के मुकाबले अधिक वैज्ञानिक और लाभदायक है, जिससे न केवल किसानों की लागत घटती है बल्कि उपज में भी उल्लेखनीय वृद्धि होती है। उन्होंने कहा कि सरकार खेती में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सतत प्रयास कर रही है, जिससे खेती को श्रम-साध्य से अधिक उत्पादक और आसान बनाया जा सके।

क्या है ‘लाइन सोइंग’ विधि?

लाइन सोइंग यानी पंक्ति में बुआई तकनीक में धान के बीजों को निश्चित दूरी और पंक्तियों में सीधा खेत में बोया जाता है। यह पारंपरिक नर्सरी, पलेवा और रोपाई की विधि से भिन्न है, जहां पौधे को पहले तैयार कर फिर खेत में रोपा जाता है।

इस तकनीक के लाभ

  • समान पौध विकास: सभी पौधे एक समान ऊंचाई और अवस्था में बढ़ते हैं।

  • खरपतवार नियंत्रण में सुविधा: पंक्तियों के बीच मशीन या हाथ से निराई करना आसान होता है।

  • सिंचाई में सुगमता: पानी को नियंत्रित तरीके से पंक्तियों में पहुँचाया जा सकता है।

  • खेत प्रबंधन आसान: खाद डालना, दवा छिड़काव और निगरानी सरल हो जाती है।

  • समय और श्रम की बचत: नर्सरी और रोपाई की आवश्यकता न होने से श्रमिकों की लागत घटती है।

मंत्री ने किसानों से अपील की कि वे परंपरागत पद्धतियों से आगे बढ़कर वैज्ञानिक विधियों को अपनाएं, जिससे जल और समय की बचत के साथ-साथ अधिक उत्पादन भी सुनिश्चित किया जा सके।

कार्यक्रम में प्रमुख लोग रहे मौजूद

इस अवसर पर कार्यक्रम में स्थानीय विधायक श्री चंद्रभानु पासवान, विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह, डीन डॉ. डी.के. सिंह तथा उद्यान एवं वानिकी संकाय के डीन श्री भगवानदीन सहित कई वैज्ञानिक, प्रोफेसर व छात्र उपस्थित रहे।

सभी ने मिलकर खेत में जाकर लाइन सोइंग विधि को देखा और किसानों को इसके लाभों के बारे में विस्तार से बताया। यह पहल आने वाले समय में प्रदेश में धान की खेती की दिशा और दशा को बदलने वाली साबित हो सकती है।

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