प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से देश में नीली क्रांति की ओर बढ़ते कदम
नई दिल्ली, राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने बताया कि केंद्र सरकार “प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना” (PMMSY) के तहत पूरे देश में मछुआरों के जीवन स्तर को सुधारने और नीली क्रांति लाने के लिए काम कर रही है।
इस योजना की शुरुआत वर्ष 2020-21 में हुई थी, और यह 2025-26 तक चलेगी। योजना के लिए कुल 20,050 करोड़ रुपये का निवेश तय किया गया है। इस योजना का उद्देश्य मत्स्य उद्योग का टिकाऊ विकास, आधुनिक सुविधाओं का निर्माण और मछुआरों की आय बढ़ाना है।
🐟 योजनांतर्गत प्रमुख विकास कार्य
26 फिशिंग हार्बर, 22 फिश लैंडिंग सेंटर और 21 होलसेल फिश मार्केट के निर्माण/आधुनिकीकरण को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं के लिए अब तक 3229.08 करोड़ रुपये की लागत से कार्य स्वीकृत हुए हैं।
❄️ कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर को मिला बढ़ावा
PMMSY के तहत मछली के भंडारण और परिवहन के लिए सरकार ने
634 आइस प्लांट/कोल्ड स्टोरेज
6694 मोबाइल फिश कियोस्क
27189 कोल्ड चेन परियोजनाएं स्वीकृत की हैं।
इनसे मछली की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिलेगी और किसानों को बेहतर दाम मिल सकेगा।
📈 मत्स्य निर्यात में ऐतिहासिक उछाल
वित्त वर्ष 2023-24 में भारत ने 17.81 लाख मीट्रिक टन समुद्री खाद्य का निर्यात किया जिसकी कीमत 60,524 करोड़ रुपये रही, जो अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है।
📊 राज्यवार निवेश स्थिति
देशभर के विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में इस योजना के अंतर्गत कुल ₹21,274 करोड़ रुपये की परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इसमें से ₹9,189 करोड़ का केंद्रीय अंशदान है और अब तक ₹5,587 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं।
🧊 FIDF (फिशरी और एक्वाकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर विकास फंड) में भी निवेश
इस अलग योजना के तहत भी देशभर में 163 परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं, जिनकी कुल लागत ₹6273 करोड़ है।
🔹 सरकार की सोच
PMMSY जैसी योजनाएं देश की मत्स्य अर्थव्यवस्था को सशक्त बना रही हैं। इससे रोजगार, निर्यात और ग्रामीण विकास को मजबूती मिल रही है