September 14, 2026 10:39 PM

Krishi Times

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केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान, में कृत्रिम गर्भाधान प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू

मखदूम में बकरी प्रजनन का नया अध्याय

मथुरा – भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भा॰कृ॰अ॰प॰) के अंतर्गत कार्यरत केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (CIRG), मखदूम में कृत्रिम गर्भाधान तकनीक पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आज शुभारंभ हुआ। इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में उड़ीसा से आए 22 पशु चिकित्सक अधिकारियों को बकरियों में कृत्रिम गर्भाधान तकनीक का गहन प्रशिक्षण दिया जाएगा।

कार्यक्रम का उद्देश्य

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 10 से 12 फरवरी 2025 तक आयोजित किया जा रहा है, जिसमें 20 पुरुष और 2 महिला पशु चिकित्सकों को बकरियों में कृत्रिम गर्भाधान के महत्व, फायदों और वैज्ञानिक पद्धतियों के बारे में जानकारी दी जाएगी। साथ ही, भारत सरकार की विभिन्न पशुपालन योजनाओं की भी विस्तृत जानकारी दी जाएगी, जिससे देश में बकरी पालन के क्षेत्र में नवीन तकनीकों को अपनाने और नस्ल सुधार को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।

संस्थान के वैज्ञानिकों की विशेष भूमिका

इस कार्यक्रम का सफल संचालन संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिकों द्वारा किया जा रहा है।

  • कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. रवि रंजन (प्रधान वैज्ञानिक) ने संस्थान की वैज्ञानिक गतिविधियों से प्रतिभागियों को परिचित कराया और बकरी पालन में कृत्रिम गर्भाधान तकनीक द्वारा नस्ल सुधार के महत्व पर विस्तार से चर्चा की।
  • डॉ. एस. पी. सिंह एवं डॉ. वाई. के. सोनी भी इस प्रशिक्षण में अहम भूमिका निभा रहे हैं और प्रशिक्षणार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान उपलब्ध करा रहे हैं।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम उड़ीसा पशुपालन विभाग द्वारा प्रायोजित किया गया है, जो कृत्रिम गर्भाधान तकनीक को अपनाकर बकरी पालन को और अधिक लाभदायक बनाने के प्रयास में जुटा है। इस प्रशिक्षण के माध्यम से, चिकित्सकों को कृत्रिम गर्भाधान प्रक्रिया के तकनीकी पहलुओं, उन्नत तकनीकों, और नस्ल सुधार के लिए इसकी भूमिका पर विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जाएगा।

संस्थान की भूमिका 

केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान, मखदूम बकरी पालन क्षेत्र में अनुसंधान और प्रशिक्षण का प्रमुख केंद्र है। संस्थान किसानों, पशुपालकों और पशु चिकित्सकों को नवीनतम तकनीकी ज्ञान प्रदान करने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों से पशुपालकों की आय बढ़ाने, बकरी पालन को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने और भारत में डेयरी और पशुपालन क्षेत्र को सशक्त करने में सहायता मिलेगी।