October 25, 2026 1:21 AM

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11 करोड़ फार्मर आईडी तैयार, लक्ष्य से पहले हासिल की उपलब्धि!

देश में 11 करोड़ फार्मर आईडी तैयार, तय समय से पांच महीने पहले पूरा हुआ लक्ष्य!

डिजिटल कृषि मिशन के तहत किसानों की विशिष्ट डिजिटल पहचान बनाने में बड़ी उपलब्धि; अब तक 6 करोड़ से अधिक किसानों तक पहुंचा योजनाओं का लाभ

नई दिल्ली, 24 अक्टूबर। देश में कृषि सेवाओं को डिजिटल बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने 11 करोड़ फार्मर आईडी (किसान विशिष्ट डिजिटल पहचान) तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित समय से पांच महीने पहले हासिल कर लिया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार, 23 अक्टूबर 2026 की रात तक यह उपलब्धि दर्ज की गई। इस लक्ष्य को 31 मार्च 2027 तक पूरा किया जाना था।

यह पहल केंद्र सरकार के डिजिटल कृषि मिशन का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य किसानों की प्रमाणित डिजिटल पहचान तैयार कर उन्हें सरकारी योजनाओं, कृषि ऋण, फसल बीमा और अन्य कृषि सेवाओं से जोड़ना है। इससे किसानों के दस्तावेजों के बार-बार सत्यापन की जरूरत कम करने, लाभार्थियों की पहचान बेहतर बनाने और योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

डिजिटल कृषि मिशन के तहत मिली उपलब्धि

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस उपलब्धि को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत और समृद्ध किसान के लक्ष्य से जोड़ते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक का उपयोग किसानों की आय, सेवाओं की पहुंच और प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

कृषि मंत्रालय, राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन और जिला स्तर पर काम करने वाली टीमों के समन्वय से फार्मर आईडी तैयार करने का काम तेजी से आगे बढ़ा। इस प्रक्रिया में राज्यों की भागीदारी महत्वपूर्ण रही है, क्योंकि किसानों के भूमि रिकॉर्ड और अन्य संबंधित विवरणों का सत्यापन बड़े पैमाने पर स्थानीय स्तर पर किया जाता है।

फार्मर आईडी से किसानों को क्या होगा फायदा?

फार्मर आईडी का उद्देश्य किसानों की पहचान और कृषि संबंधी रिकॉर्ड को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ना है। इससे अलग-अलग योजनाओं के लिए आवश्यक जानकारी का सत्यापन आसान हो सकता है। हालांकि, प्रत्येक सेवा का लाभ संबंधित योजना के पात्रता नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही मिलेगा।

किसानों को संभावित प्रमुख लाभ:

  • कृषि ऋण और किसान क्रेडिट कार्ड: प्रमाणित डिजिटल रिकॉर्ड से आवेदन और सत्यापन की प्रक्रिया आसान बनाने में मदद मिल सकती है। ऋण की मंजूरी संबंधित बैंक के नियमों पर निर्भर करेगी।
  • फसल बीमा: किसान के रिकॉर्ड को बीमा संबंधी जानकारी से जोड़ने पर पात्रता और दावों के सत्यापन में सहायता मिल सकती है। बीमा भुगतान के लिए योजना की शर्तें लागू रहेंगी।
  • आपदा राहत: प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों की पहचान और पात्रता के सत्यापन में डिजिटल रिकॉर्ड उपयोगी हो सकते हैं।
  • न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद: किसान पंजीकरण और संबंधित रिकॉर्ड के सत्यापन में सुविधा मिल सकती है। खरीद की प्रक्रिया राज्य और संबंधित एजेंसी के नियमों के अनुसार चलेगी।
  • सरकारी योजनाएं: प्रमाणित किसान डेटाबेस से पात्र लाभार्थियों की पहचान और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बेहतर किया जा सकता है।

छह करोड़ से अधिक किसानों तक पहुंचा योजनाओं का लाभ

डिजिटल कृषि मिशन को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2 सितंबर 2024 को मंजूरी दी थी। इसके तहत कृषि क्षेत्र के लिए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा रहा है, जिसमें फार्मर रजिस्ट्री भी एक महत्वपूर्ण घटक है।

मंत्रालय के अनुसार, फार्मर आईडी आधारित सेवा वितरण व्यवस्था के माध्यम से अब तक छह करोड़ से अधिक किसानों तक विभिन्न योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा चुका है। इस व्यवस्था का उद्देश्य किसानों की प्रमाणित जानकारी को संबंधित कृषि सेवाओं से जोड़ना और लाभ वितरण की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना है।

डिजिटल रिकॉर्ड से फर्जी या दोहरे पंजीकरण की आशंका कम करने, लाभार्थियों के सत्यापन में लगने वाला समय घटाने और योजनाओं की निगरानी बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इन परिणामों की वास्तविक प्रभावशीलता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि रिकॉर्ड कितने सटीक हैं और किसानों को डिजिटल सेवाओं तक कितनी आसानी से पहुंच मिलती है।

बटाईदार और वास्तविक खेती करने वाले किसानों की भागीदारी अहम

फार्मर आईडी व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन में उन किसानों को शामिल करना महत्वपूर्ण है, जो खेती तो करते हैं, लेकिन भूमि का स्वामित्व उनके नाम पर नहीं है। इनमें बटाईदार और पट्टे पर खेती करने वाले किसान भी शामिल हैं।

ऐसे किसानों की पहचान और पंजीकरण के लिए राज्यों को अपने लागू नियमों तथा निर्धारित सत्यापन प्रक्रिया के अनुसार व्यवस्था करनी होगी। यदि डिजिटल रिकॉर्ड में भूमि, खेती करने वाले व्यक्ति या अन्य विवरणों से संबंधित विसंगतियां रहती हैं, तो कुछ पात्र किसानों को पंजीकरण अथवा योजनाओं का लाभ लेने में परेशानी हो सकती है। इसलिए शिकायत निवारण, रिकॉर्ड में सुधार और स्थानीय स्तर पर सहायता की व्यवस्था भी जरूरी है।

डिजिटल पहचान के साथ डेटा की सुरक्षा भी जरूरी

फार्मर आईडी केवल किसानों की पहचान दर्ज करने का माध्यम नहीं है, बल्कि इसे कृषि सेवाओं के डिजिटल एकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे कृषि विभागों, वित्तीय संस्थानों और योजना क्रियान्वयन एजेंसियों के बीच समन्वय बेहतर करने की संभावना है।

हालांकि, इस व्यवस्था की सफलता के लिए किसानों के व्यक्तिगत और कृषि संबंधी डेटा की सुरक्षा, सही जानकारी का रखरखाव तथा डेटा तक अधिकृत पहुंच सुनिश्चित करना भी आवश्यक है। किसानों को यह जानकारी मिलनी चाहिए कि उनके रिकॉर्ड का उपयोग किस उद्देश्य से किया जा रहा है और गलत जानकारी होने पर उसे कैसे सुधारा जा सकता है।

खेती में डिजिटल सेवाओं का बढ़ेगा महत्व

11 करोड़ फार्मर आईडी तैयार होने की उपलब्धि कृषि क्षेत्र में डिजिटल बुनियादी ढांचे के विस्तार को दर्शाती है। अब अगली चुनौती इस पहचान को किसानों के लिए वास्तविक सुविधाओं में बदलने की है, ताकि छोटे और सीमांत किसानों सहित सभी पात्र लाभार्थियों को इसका फायदा मिल सके।

यदि फार्मर आईडी का प्रभावी उपयोग किया जाता है, तो कृषि ऋण, बीमा, सरकारी सहायता और अन्य सेवाओं की प्रक्रिया अधिक सरल और पारदर्शी बन सकती है। इसके लिए डिजिटल व्यवस्था के साथ-साथ गांवों में जागरूकता, पंजीकरण सहायता और रिकॉर्ड सुधार की सुविधाओं को मजबूत करना भी जरूरी होगा।

कृषि क्षेत्र में डिजिटल बदलाव की असली सफलता तभी मानी जाएगी, जब किसान की पहचान बनाने के साथ उसे समय पर, आसानी से और पारदर्शी तरीके से अपनी पात्र सेवाओं का लाभ भी मिल सके।