August 26, 2026 10:25 PM

Krishi Times

ब्लू इकोनॉमी पर भारत-सेशेल्स की बड़ी बैठक, साझा रोडमैप तैयार!

भारत और सेशेल्स के बीच मत्स्य पालन, जलीय कृषि और ब्लू इकोनॉमी में रणनीतिक सहयोग को नई दिशा!

नई दिल्ली। हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग, खाद्य सुरक्षा और आर्थिक विकास को मजबूत करने की दिशा में भारत और सेशेल्स ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मत्स्य पालन, जलीय कृषि (एक्वाकल्चर) और ब्लू इकोनॉमी के क्षेत्र में सहयोग को नई गति देने के उद्देश्य से दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय द्विपक्षीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में तकनीकी सहयोग, वैज्ञानिक अनुसंधान, क्षमता निर्माण, डिजिटल नवाचार और समुद्री संरक्षण जैसे अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा हुई।

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मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत मत्स्य पालन विभाग द्वारा 25 अगस्त को आयोजित इस बैठक में सेशेल्स गणराज्य के मत्स्य पालन, कृषि एवं ब्लू इकोनॉमी मंत्री वालेस कॉसग्रो के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने भाग लिया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मत्स्य पालन विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने किया। बैठक में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक संस्थानों के प्रतिनिधि और नीति विशेषज्ञ भी शामिल हुए।

हिंद महासागर क्षेत्र में सहयोग की अहम भूमिका

बैठक की शुरुआत में भारतीय पक्ष ने सेशेल्स प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों और समुद्री सहयोग की सराहना की। भारत ने मत्स्य पालन, जलीय कृषि, उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान तथा कौशल विकास के क्षेत्रों में तकनीकी सहयोग बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

दोनों देशों ने माना कि हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री संसाधनों का सतत प्रबंधन केवल आर्थिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि खाद्य एवं पोषण सुरक्षा, रोजगार सृजन और तटीय समुदायों के सामाजिक विकास के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस संदर्भ में भारत और सेशेल्स के बीच सहयोग को क्षेत्रीय स्थिरता और समुद्री समृद्धि का महत्वपूर्ण आधार बताया गया।

भारत की उपलब्धियों ने खींचा ध्यान

बैठक के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने देश के मत्स्य क्षेत्र में हुई उल्लेखनीय प्रगति का विवरण प्रस्तुत किया। बताया गया कि भारत का कुल मत्स्य उत्पादन बढ़कर रिकॉर्ड 19.7 मिलियन टन तक पहुंच गया है। वहीं समुद्री खाद्य उत्पादों का निर्यात 8.46 अरब अमेरिकी डॉलर के स्तर पर पहुंच चुका है, जिससे भारत विश्व के प्रमुख समुद्री खाद्य निर्यातक देशों में शामिल हो गया है।

भारतीय अधिकारियों ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) सहित विभिन्न सरकारी पहलों के माध्यम से मत्स्य क्षेत्र में अवसंरचना विकास, मूल्य संवर्धन, आधुनिक मत्स्य बंदरगाहों, कोल्ड चेन नेटवर्क और डिजिटल निगरानी प्रणालियों को मजबूत करने की जानकारी भी साझा की।

समुद्री जलीय कृषि और टूना मत्स्य पालन पर विशेष फोकस

बैठक के एजेंडे में समुद्री जलीय कृषि, आधुनिक हैचरी विकास, मछली बीज उत्पादन, समुद्री मत्स्य संसाधनों का वैज्ञानिक मूल्यांकन तथा टूना मत्स्य पालन को अधिक उत्पादक और टिकाऊ बनाने जैसे विषय प्रमुख रहे।

दोनों देशों ने समुद्री जलीय कृषि के क्षेत्र में संयुक्त परियोजनाओं की संभावनाओं पर चर्चा की। विशेषज्ञों ने माना कि समुद्री शैवाल, शंख-सीप उत्पादन तथा उच्च मूल्य वाली समुद्री प्रजातियों की खेती के क्षेत्र में सहयोग से दोनों देशों को लाभ मिल सकता है।

टूना मछली के बढ़ते वैश्विक बाजार को देखते हुए टूना पकड़ने की आधुनिक तकनीकों, संसाधन आकलन और प्रसंस्करण सुविधाओं को मजबूत बनाने पर भी विशेष जोर दिया गया। इसके साथ ही मछली पकड़ने के बाद होने वाले नुकसान को कम करने और उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए उन्नत पोस्ट-हार्वेस्ट तकनीकों पर विचार-विमर्श किया गया।

एआई और डिजिटल तकनीकों का बढ़ेगा उपयोग

बैठक में मत्स्य क्षेत्र में डिजिटल परिवर्तन और उभरती प्रौद्योगिकियों के उपयोग पर भी विस्तार से चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने मत्स्य डेटा प्रबंधन प्रणाली, समुद्री निगरानी, नियंत्रण एवं चौकसी (Monitoring, Control and Surveillance – MCS) प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए सहयोग की संभावनाओं का आकलन किया।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डेटा एनालिटिक्स और स्मार्ट मॉनिटरिंग तकनीकों के माध्यम से मत्स्य संसाधनों के बेहतर प्रबंधन, अवैध मछली पकड़ने की रोकथाम तथा समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की निगरानी को अधिक प्रभावी बनाने पर सहमति बनी।

विशेषज्ञों ने कहा कि भविष्य में डिजिटल तकनीकें मत्स्य क्षेत्र की उत्पादकता बढ़ाने, संसाधनों के संरक्षण और बाजार तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

मूल्य श्रृंखला विकास और अपशिष्ट प्रबंधन पर जोर

दोनों देशों ने मत्स्य उत्पादों की मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। बैठक में टूना प्रसंस्करण, उत्पाद विविधीकरण, निर्यातोन्मुख उत्पादन और सतत मत्स्य अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।

विशेष रूप से मत्स्य अपशिष्ट से मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने, जैविक उर्वरक और पशु आहार के निर्माण जैसी संभावनाओं को लेकर भी विचार साझा किए गए। इससे पर्यावरणीय स्थिरता के साथ-साथ अतिरिक्त आय के अवसर भी सृजित किए जा सकेंगे।

संयुक्त अनुसंधान और क्षमता निर्माण को मिलेगा बढ़ावा

बैठक में दोनों देशों ने संयुक्त वैज्ञानिक अनुसंधान, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ावा देने पर सहमति व्यक्त की। इसके तहत वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच नियमित आदान-प्रदान कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

दोनों देशों ने राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्रों, अनुसंधान संस्थानों और प्रयोगशालाओं के बीच सहयोग बढ़ाने तथा साझा अनुसंधान परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। इससे समुद्री संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और नई तकनीकों के विकास में सहायता मिलेगी।

एमओयू और वार्षिक कार्य योजना की तैयारी

सेशेल्स प्रतिनिधिमंडल ने मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्र में सहयोग को संस्थागत रूप देने के लिए एक उन्नत द्विपक्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) तैयार करने में गहरी रुचि दिखाई। दोनों पक्षों ने सहयोग को परिणामोन्मुख बनाने के लिए एक संरचित वार्षिक कार्य योजना तैयार करने पर भी सहमति व्यक्त की।

इस कार्य योजना में तकनीकी सहयोग, संयुक्त अनुसंधान, प्रशिक्षण कार्यक्रम, विशेषज्ञों के आदान-प्रदान और पायलट परियोजनाओं के कार्यान्वयन को शामिल किए जाने की संभावना है।

समुद्री समृद्धि के साझा लक्ष्य की पुनर्पुष्टि

बैठक के समापन पर दोनों देशों ने इस बात पर जोर दिया कि समुद्री संसाधनों का सतत उपयोग और ब्लू इकोनॉमी का विकास भविष्य की आर्थिक समृद्धि के लिए अत्यंत आवश्यक है। भारत और सेशेल्स ने नियमित संवाद, तकनीकी सहयोग और संस्थागत साझेदारी को आगे बढ़ाते हुए समुद्री क्षेत्र में दीर्घकालिक साझेदारी को और मजबूत बनाने का संकल्प दोहराया।

उच्च स्तरीय बैठक सकारात्मक और रचनात्मक माहौल में संपन्न हुई तथा दोनों देशों ने साझा दृष्टिकोण व्यक्त किया कि कूटनीतिक प्रतिबद्धताओं को ठोस और परिणामोन्मुख कार्य योजनाओं में बदलकर समुद्री संसाधनों के संरक्षण, आर्थिक विकास और क्षेत्रीय समृद्धि को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।