October 14, 2026 3:02 PM

Krishi Times

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SUSTAIN-2026: सतत कृषि की दिशा में ICAR-IIRR की मजबूत भागीदारी!

जीनोम एडिटिंग से धान की पैदावार बढ़ाने पर ICAR वैज्ञानिकों की प्रस्तुति

बेंगलुरु –भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–भारतीय चावल अनुसंधान संस्थान (ICAR–IIRR), हैदराबाद ने SUSTAIN-2026: Sustainable Transformation in Agriculture and Nutrition राष्ट्रीय सम्मेलन में नॉलेज पार्टनर के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन का आयोजन टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) द्वारा नेशनल सेंटर फॉर बायोलॉजिकल साइंसेज (NCBS), बेंगलुरु में किया गया। सम्मेलन में यूएएस-जीकेवीके, बेंगलुरु और ICAR–NBAIR, बेंगलुरु भी नॉलेज पार्टनर के रूप में शामिल रहे।

कृषि और पोषण के सतत परिवर्तन पर राष्ट्रीय मंच

SUSTAIN-2026 सम्मेलन का उद्देश्य कृषि और पोषण के क्षेत्र में सतत परिवर्तन को गति देना और फसल सुधार की आधुनिक रणनीतियों पर राष्ट्रीय स्तर पर विमर्श करना रहा। इस मंच पर देशभर से आए वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं, शिक्षाविदों, स्टार्टअप प्रतिनिधियों और उद्योग जगत के विशेषज्ञों ने भाग लिया। सम्मेलन के दौरान कृषि क्षेत्र में नवाचार, अनुसंधान और नीति के बेहतर समन्वय पर विशेष जोर दिया गया।

जलवायु-सहिष्णु कृषि पर केंद्रित चर्चा

सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन की चुनौती, जलवायु-सहिष्णु फसल किस्मों का विकास, उन्नत कीट एवं रोग प्रबंधन, तथा पोषण सुरक्षा जैसे अहम विषयों पर गहन चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने इस बात पर सहमति जताई कि भविष्य की कृषि के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान, जैव-प्रौद्योगिकी और टिकाऊ खेती प्रणालियों को अपनाना अनिवार्य है।

ICAR-IIRR के वैज्ञानिकों की उल्लेखनीय सहभागिता

ICAR–IIRR, हैदराबाद से डॉ. आर. एम. सुंदरम (निदेशक), डॉ. सी. एन. नीरजा (प्रधान वैज्ञानिक) और डॉ. सतेन्द्र कुमार मंगरौथिया (प्रधान वैज्ञानिक) ने सम्मेलन में सक्रिय भागीदारी निभाई। इन वैज्ञानिकों ने धान अनुसंधान के क्षेत्र में अपने अनुभव और नवीन शोध निष्कर्ष साझा किए, जिससे फसल उत्पादकता और पोषण गुणवत्ता में सुधार के नए रास्ते सामने आए।

पैनल चर्चा में डॉ. आर. एम. सुंदरम की भूमिका

सम्मेलन के दौरान आयोजित पैनल चर्चा में डॉ. आर. एम. सुंदरम ने सदस्य के रूप में भाग लिया। उन्होंने धान अनुसंधान में जीनोमिक्स और मॉलिक्यूलर ब्रीडिंग की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वैज्ञानिक नवाचारों को किसानों तक पहुँचाने से ही कृषि को लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सकता है।

धान बायोफोर्टिफिकेशन पर मुख्य व्याख्यान

डॉ. सी. एन. नीरजा ने सम्मेलन में धान में CRP (Crop Research Program) आधारित बायोफोर्टिफिकेशन विषय पर मुख्य व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि बायोफोर्टिफिकेशन के माध्यम से धान की किस्मों में पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ाकर कुपोषण की समस्या से प्रभावी ढंग से निपटा जा सकता है।

जीनोम एडिटिंग से बढ़ेगी धान की उत्पादकता

वहीं डॉ. सतेन्द्र कुमार मंगरौथिया ने जीनोम एडिटिंग के माध्यम से साइटोकाइनिन मेटाबॉलिज्म के पुनःप्रोग्रामिंग द्वारा धान की उत्पादकता बढ़ाने पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि इस आधुनिक तकनीक से फसल की वृद्धि, उपज और स्थिरता में उल्लेखनीय सुधार संभव है।

वैज्ञानिक समुदाय से मिली सराहना

दोनों वैज्ञानिक व्याख्यानों को सम्मेलन में उपस्थित वैज्ञानिक समुदाय, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने अत्यंत सराहा। प्रतिभागियों ने इन शोध कार्यों को भविष्य में धान उत्पादन बढ़ाने, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में मील का पत्थर बताया।

सतत कृषि की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

SUSTAIN-2026 सम्मेलन ने यह स्पष्ट किया कि सतत कृषि और पोषण सुरक्षा के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अनुसंधान संस्थानों, नीति निर्माताओं और उद्योग जगत के बीच मजबूत सहयोग आवश्यक है। ICAR–IIRR सहित सभी नॉलेज पार्टनर्स की सहभागिता ने इस सम्मेलन को कृषि क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण और दूरगामी पहल बना दिया।