ओडिशा को ब्लू इकोनॉमी का प्रमुख केंद्र बनाने पर जोर, मत्स्य क्षेत्र की प्रगति की हुई उच्चस्तरीय समीक्षा !!
भुवनेश्वर/ दिल्ली 8 जुलाई 2026। ओडिशा को देश के अग्रणी मत्स्य एवं जलीय कृषि राज्यों में स्थापित करने की दिशा में केंद्र सरकार ने राज्य में चल रही योजनाओं और परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय द्वारा आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मत्स्य उत्पादन, निर्यात, अवसंरचना विकास, मछुआरा कल्याण तथा ब्लू इकोनॉमी को मजबूत करने से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह ने की। इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल, ओडिशा के मत्स्य पालन, कृषि एवं एमएसएमई मंत्री गोकुलानंद मल्लिक, मत्स्य विभाग, राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (एनएफडीबी), आईसीएआर संस्थानों, एनसीडीसी, नाबार्ड तथा पारादीप पोर्ट ट्रस्ट के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
ओडिशा ने मछली उत्पादन में बनाया मजबूत आधार !!
बैठक में बताया गया कि ओडिशा ने वर्ष 2025-26 के दौरान 12.70 लाख मीट्रिक टन मछली उत्पादन दर्ज किया है। राज्य में मीठे पानी, खारे पानी और समुद्री मत्स्य पालन की मजबूत क्षमता के कारण 16 लाख से अधिक मछुआरों और मत्स्य पालकों की आजीविका को सहारा मिला है। वहीं समुद्री खाद्य उत्पादों के निर्यात से राज्य को 5,429 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।
केंद्रीय मंत्री ने इस उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि ओडिशा के पास घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की अपार संभावनाएं हैं। इसके लिए उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण और निर्यात तक पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत करना आवश्यक होगा।
पीएमएमएसवाई के तहत 1,301 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं स्वीकृत !!
समीक्षा के दौरान जानकारी दी गई कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के अंतर्गत ओडिशा में 1,301 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है। इन परियोजनाओं में मत्स्य अवसंरचना, आधुनिक तकनीक, मछुआरा कल्याण, हैचरी, चारा उत्पादन इकाइयों, कोल्ड चेन, मत्स्य बंदरगाहों तथा कटाई उपरांत सुविधाओं का विकास शामिल है।
केंद्रीय मंत्री ने राज्य सरकार को निर्यातोन्मुखी मत्स्य उत्पादन, आधुनिक प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना तथा मछली उत्पादों के मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने की सलाह दी। उन्होंने मत्स्य सहकारी समितियों, मछुआरा उत्पादक संगठनों (FFPOs), निर्यातकों और निजी निवेशकों के बीच बेहतर समन्वय पर भी बल दिया।
वैज्ञानिक मत्स्य पालन और नवाचार पर जोर !!
मत्स्य विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों की योजनाओं, वित्तीय संस्थानों तथा अनुसंधान संगठनों के बीच प्रभावी समन्वय से योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने समयबद्ध परियोजना क्रियान्वयन, परिणाम आधारित निगरानी और नवाचार आधारित विकास मॉडल को अपनाने की आवश्यकता बताई।
बैठक में प्रस्तुतियों के दौरान पीएमएमएसवाई, मत्स्य एवं जलीय कृषि अवसंरचना विकास कोष (FIDF), किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) और पीएम-एमकेएसएसवाई के तहत चल रही गतिविधियों की समीक्षा की गई। साथ ही जलवायु-अनुकूल तटीय मत्स्य गांवों, कृत्रिम चट्टानों, पिंजरा मत्स्य पालन, हैचरी विकास और ट्रेसबिलिटी प्रणाली को मजबूत करने पर चर्चा हुई।
उच्च मूल्य वाली प्रजातियों से बढ़ेगी किसानों की आय !!
आईसीएआर-सीआईएफए, नाबार्ड और एनसीडीसी के प्रतिनिधियों ने मत्स्य उत्पादन को अधिक लाभकारी बनाने के लिए स्कैम्पी, सीबास, पोम्पानो और तिलापिया जैसी उच्च मूल्य वाली प्रजातियों के विस्तार पर जोर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्रजातियों के व्यावसायिक उत्पादन से किसानों और मत्स्य पालकों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है तथा निर्यात क्षमता भी मजबूत होगी।
ब्लू इकोनॉमी में ओडिशा की भूमिका होगी महत्वपूर्ण !!
बैठक में यह निष्कर्ष सामने आया कि यदि अवसंरचना, निवेश, तकनीक, बाजार संपर्क और संस्थागत सहयोग को एकीकृत रूप से आगे बढ़ाया जाए तो ओडिशा देश के सबसे बड़े मत्स्य और जलीय कृषि केंद्रों में शामिल हो सकता है। विशेषज्ञों ने कहा कि राज्य की लंबी समुद्री तटरेखा, समृद्ध जल संसाधन और बढ़ती निर्यात क्षमता उसे भारत की ब्लू इकोनॉमी का प्रमुख स्तंभ बनाने की क्षमता रखते हैं।
बैठक में केंद्र और राज्य सरकारों, अनुसंधान संस्थानों, वित्तीय एजेंसियों तथा उद्योग जगत के बीच समन्वित प्रयासों के माध्यम से मत्स्य क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।






























