कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई ताकत, IsDB और IFAD जुटाएंगे 750 मिलियन डॉलर तक का सह-वित्तपोषण!
बैंकॉक, – कृषि विकास, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में इस्लामिक डेवलपमेंट बैंक (IsDB) और अंतरराष्ट्रीय कृषि विकास कोष (IFAD) ने सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है। दोनों संस्थानों के बीच हुए नए समझौते के तहत टिकाऊ कृषि विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बदलाव लाने के लिए 750 मिलियन अमेरिकी डॉलर (75 करोड़ डॉलर) तक का सह-वित्तपोषण जुटाने का लक्ष्य रखा गया है।
इस पहल का उद्देश्य कृषि एवं खाद्य प्रणालियों को मजबूत करना, ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी कम करना, किसानों और ग्रामीण उद्यमियों की आय बढ़ाना तथा खाद्य सुरक्षा को बेहतर बनाना है। दोनों संस्थान अपने वित्तीय संसाधनों, तकनीकी विशेषज्ञता और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का इस्तेमाल करते हुए सदस्य देशों में विकास परियोजनाओं का विस्तार करेंगे।
कृषि आधारित रोजगार और ग्रामीण आय पर जोर
IsDB और IFAD की यह साझेदारी कृषि क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के साथ-साथ ग्रामीण समुदायों के लिए आर्थिक अवसर तैयार करने पर केंद्रित है। इसके तहत कृषि उत्पादों के उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण, भंडारण, परिवहन और बाजार तक पहुंच बनाने वाली मूल्य शृंखलाओं को मजबूत करने पर ध्यान दिया जाएगा।
इससे किसानों को अपने उत्पादों का बेहतर मूल्य प्राप्त करने, कृषि आधारित व्यवसाय स्थापित करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर विकसित करने में मदद मिल सकती है। विशेष रूप से छोटे किसानों, ग्रामीण उद्यमियों और कृषि एवं खाद्य कारोबार से जुड़े लघु तथा मध्यम उद्यमों को इस सहयोग से लाभ पहुंचाने का लक्ष्य है।
IsDB समूह के अध्यक्ष डॉ. मुहम्मद अल जस्सर ने कहा कि IFAD के साथ नवीनीकृत साझेदारी लगभग पांच दशकों के सफल सहयोग पर आधारित है। दोनों संस्थान अपने साझा संसाधनों और विशेषज्ञता के माध्यम से ग्रामीण समुदायों की आर्थिक मजबूती बढ़ाने, नए अवसर पैदा करने और लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए काम करेंगे।
IFAD के अध्यक्ष अल्वारो लारियो ने कहा कि इस समझौते के माध्यम से खाद्य प्रणालियों के शुरुआती स्तर पर निवेश बढ़ाया जाएगा, जिससे रोजगार सृजन, आय में वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं को अधिक समृद्ध एवं संकटों का सामना करने में सक्षम बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब ग्रामीण लोगों को व्यवसाय शुरू करने, बाजारों से जुड़ने और सम्मानजनक आय अर्जित करने के अवसर मिलते हैं, तो उसका लाभ ग्रामीण क्षेत्रों से आगे पूरी अर्थव्यवस्था तक पहुंचता है।
छह प्रमुख क्षेत्रों में बढ़ेगा सहयोग
नए सहयोग एवं सह-वित्तपोषण समझौते के तहत दोनों संस्थान एक संयुक्त कार्ययोजना तैयार कर रहे हैं। इसका उद्देश्य प्रस्तावित निवेश लक्ष्य को वास्तविक विकास परियोजनाओं में बदलना है। सहयोग के प्रमुख क्षेत्र होंगे:
– कृषि व्यवसाय और मूल्य शृंखला: कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण, भंडारण, विपणन और आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करना।
– बाजार तक पहुंच: किसानों और ग्रामीण उद्यमियों को बेहतर बाजारों तथा व्यावसायिक अवसरों से जोड़ना।
– ग्रामीण वित्तीय समावेशन: ग्रामीण आबादी और छोटे उद्यमों के लिए वित्तीय सेवाओं तक पहुंच बढ़ाना।
– जलवायु अनुकूलन: जलवायु परिवर्तन और मौसम संबंधी जोखिमों का सामना करने में कृषि एवं ग्रामीण समुदायों की क्षमता बढ़ाना।
– प्राकृतिक संसाधनों का टिकाऊ प्रबंधन: भूमि, जल और अन्य प्राकृतिक संसाधनों का जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग प्रोत्साहित करना।
– जल तक पहुंच: कृषि उत्पादन और ग्रामीण आजीविका के लिए जल संसाधनों की उपलब्धता और प्रबंधन में सुधार करना।
इन क्षेत्रों में निवेश से कृषि क्षेत्र की उत्पादकता, ग्रामीण व्यवसायों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और खाद्य आपूर्ति व्यवस्था की मजबूती बढ़ाने की संभावनाएं हैं।
निजी क्षेत्र और छोटे उद्यमों को भी मिलेगा महत्व
इस साझेदारी का एक महत्वपूर्ण पहलू निजी क्षेत्र की भागीदारी का विस्तार है। दोनों संस्थान कृषि व्यवसायों और ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले छोटे एवं मध्यम उद्यमों के लिए निवेश के नए अवसर विकसित करना चाहते हैं।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में निजी निवेश बढ़ने से कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण, कोल्ड चेन, भंडारण, कृषि आधारित उद्योगों और बाजार संपर्क जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहन मिल सकता है। हालांकि, इन अवसरों का वास्तविक लाभ संबंधित देशों में तैयार की जाने वाली परियोजनाओं, वित्तपोषण की शर्तों और स्थानीय स्तर पर क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।
प्रस्तावित सहयोग में IsDB समूह की अन्य संस्थाओं की क्षमताओं का भी उपयोग किया जाएगा। इनमें इस्लामिक कॉरपोरेशन फॉर द डेवलपमेंट ऑफ द प्राइवेट सेक्टर (ICD), इंटरनेशनल इस्लामिक ट्रेड फाइनेंस कॉरपोरेशन (ITFC) और इस्लामिक कॉरपोरेशन फॉर द इंश्योरेंस ऑफ इन्वेस्टमेंट एंड एक्सपोर्ट क्रेडिट (ICIEC) शामिल हैं।
इन संस्थाओं की भागीदारी से विकास वित्त, व्यापार वित्त, निवेश और जोखिम प्रबंधन से जुड़े विभिन्न साधनों को एक साथ इस्तेमाल करने की संभावनाएं बढ़ेंगी। इससे कृषि एवं ग्रामीण विकास परियोजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने में मदद मिल सकती है।
1980 से जारी सहयोग को मिलेगा विस्तार
IsDB और IFAD के बीच सहयोग की शुरुआत वर्ष 1980 में हुई थी। दोनों संस्थानों ने अब तक संयुक्त रूप से 29 परियोजनाओं के लिए वित्तपोषण किया है, जिनका कुल मूल्य लगभग 1.45 अरब अमेरिकी डॉलर रहा है।
अब 750 मिलियन डॉलर तक के नए सह-वित्तपोषण लक्ष्य के माध्यम से दोनों संस्थान अपने सहयोग को बड़े स्तर पर आगे बढ़ाना चाहते हैं। यह पहल सदस्य देशों में कृषि विकास, ग्रामीण आजीविका और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी परियोजनाओं को अतिरिक्त वित्तीय समर्थन देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
IFAD एक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान है, जिसका विशेष ध्यान ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं और ग्रामीण समुदायों के विकास पर है। यह कृषि-खाद्य मूल्य शृंखलाओं को मजबूत करने, खाद्य सुरक्षा बढ़ाने और ग्रामीण लोगों के लिए आर्थिक अवसर विकसित करने में निवेश करता है।
दूसरी ओर, इस्लामिक डेवलपमेंट बैंक समूह के 57 सदस्य देश चार महाद्वीपों में फैले हुए हैं। इसका मुख्यालय सऊदी अरब के जेद्दा में है। बैंक सतत आर्थिक एवं सामाजिक विकास, बुनियादी ढांचे, मानव संसाधन, आर्थिक सशक्तीकरण और पर्यावरण के अनुकूल विकास को बढ़ावा देने के लिए काम करता है।
किसानों और ग्रामीण भारत के लिए क्यों अहम है यह पहल?
कृषि आधारित अर्थव्यवस्थाओं के लिए इस तरह की अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण हो सकती हैं। केवल कृषि उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है; किसानों को उपज का उचित मूल्य दिलाने, प्रसंस्करण सुविधाएं विकसित करने, बाजार जोखिम कम करने और ग्रामीण क्षेत्रों में गैर-कृषि रोजगार बढ़ाने के लिए भी निवेश जरूरी है।
भारत जैसे देश में कृषि मूल्य शृंखला, ग्रामीण उद्यमिता, जल प्रबंधन, जलवायु अनुकूल खेती और कृषि आधारित लघु उद्योगों के विकास के लिए ऐसे वित्तीय सहयोग के अनुभव उपयोगी हो सकते हैं। हालांकि, इस समझौते के तहत भारत को कितनी राशि मिलेगी या भारत में कौन-सी परियोजनाएं शुरू होंगी, इसकी जानकारी इस घोषणा में नहीं दी गई है।
कुल मिलाकर, IsDB और IFAD का नया समझौता ग्रामीण विकास को केवल कृषि उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय उसे रोजगार, वित्तीय समावेशन, बाजार संपर्क और टिकाऊ प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसकी वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि प्रस्तावित वित्तपोषण कितनी प्रभावी परियोजनाओं में बदलता है और उसका लाभ किसानों तथा ग्रामीण समुदायों तक किस स्तर पर पहुंचता है।
स्रोत: अंतरराष्ट्रीय कृषि विकास कोष (IFAD) और इस्लामिक डेवलपमेंट बैंक (IsDB) की 14 अक्टूबर 2026 की संयुक्त सहयोग संबंधी घोषणा।





























