October 14, 2026 1:29 AM

Krishi Times

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गन्ना किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए केंद्र की पहल!

गन्ना किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए एक सप्ताह में बनेगी उच्चस्तरीय कमेटी, रिकवरी और तौल व्यवस्था की होगी समीक्षा

कर्नाटक और महाराष्ट्र के किसानों के साथ बैठक में केंद्र का फैसला; कमेटी में किसान प्रतिनिधि, वैज्ञानिक और केंद्र-राज्य सरकारों के अधिकारी होंगे शामिल

नई दिल्ली– गन्ना किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने, चीनी मिलों में गन्ने की रिकवरी के आकलन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और तौल संबंधी विवादों का समाधान करने के लिए केंद्र सरकार एक सप्ताह के भीतर उच्चस्तरीय संयुक्त कमेटी का गठन करेगी। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी की अध्यक्षता में कर्नाटक और महाराष्ट्र के गन्ना किसानों के प्रतिनिधिमंडलों के साथ हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया।

बैठक में किसानों ने गन्ने की रिकवरी के आंकड़ों में कथित अंतर, वजन में कटौती, वेस्टेज, प्रयोगशाला जांच और फसल बीमा से जुड़ी समस्याएं उठाईं। इन मुद्दों पर केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारियों, संबंधित मंत्रियों तथा किसान प्रतिनिधियों के बीच विस्तार से चर्चा हुई। बैठक का प्रमुख उद्देश्य गन्ना किसानों की शिकायतों की जांच कर ऐसी व्यवस्था विकसित करना है, जिससे उपज के मूल्यांकन में पारदर्शिता आए और किसानों को उनके उत्पादन का उचित आर्थिक लाभ मिल सके।

रिकवरी और तौल में पारदर्शिता पर जोर

गन्ना किसानों की आय का निर्धारण केवल गन्ने की मात्रा पर ही नहीं, बल्कि चीनी मिलों में उसकी गुणवत्ता और चीनी रिकवरी के आकलन से भी जुड़ा होता है। रिकवरी से आशय गन्ने से प्राप्त होने वाली चीनी के अनुपात से है। यदि किसान और मिल प्रबंधन के बीच रिकवरी के आंकड़ों को लेकर अंतर होता है, तो भुगतान और गन्ने के वास्तविक मूल्यांकन को लेकर विवाद पैदा हो सकते हैं।

बैठक में किसानों की ओर से उठाए गए इन मुद्दों को गंभीरता से लेते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान पारदर्शी और वैज्ञानिक व्यवस्था के माध्यम से किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि गन्ने की रिकवरी, वजन और गुणवत्ता की जांच से जुड़ी प्रक्रियाओं में किसी भी प्रकार की विसंगति की शिकायतों की उचित जांच जरूरी है।

गन्ने की तौल में पारदर्शिता भी किसानों के लिए महत्वपूर्ण है। तौल के आंकड़ों में अंतर या कटौती को लेकर विवाद होने पर किसान को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। ऐसे में इलेक्ट्रॉनिक तौल प्रणाली, प्रमाणित उपकरणों, नियमित कैलिब्रेशन और जांच के रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने जैसी व्यवस्थाएं शिकायतों के समाधान में सहायक हो सकती हैं।

एक सप्ताह में गठित होगी संयुक्त कमेटी

बैठक में घोषणा की गई कि एक सप्ताह के भीतर उच्चस्तरीय संयुक्त कमेटी गठित की जाएगी। इसमें केंद्र सरकार, कर्नाटक और महाराष्ट्र की राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों के साथ किसान संगठनों, चीनी मिलों और संबंधित वैज्ञानिक एवं तकनीकी विशेषज्ञों को शामिल करने का प्रस्ताव है।

कमेटी गन्ने की रिकवरी मापने के वैज्ञानिक मानकों, प्रयोगशालाओं में होने वाली जांच, वजन की शुद्धता और गन्ने की कटाई के समय जैसे तकनीकी पहलुओं की समीक्षा करेगी। इसका उद्देश्य उन कारणों की पहचान करना है, जिनकी वजह से किसानों और चीनी मिलों के बीच विवाद पैदा होते हैं।

कमेटी इन समस्याओं के समाधान के लिए व्यावहारिक सुझाव तैयार कर सरकार को सौंपेगी। हालांकि, कमेटी की विस्तृत कार्ययोजना, जांच की समय-सीमा और अंतिम सिफारिशों को लेकर आगे की औपचारिक जानकारी महत्वपूर्ण होगी।

अल्पकालिक और दीर्घकालिक समाधान पर काम

बैठक में यह भी तय किया गया कि गन्ना किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए दो स्तरों पर काम किया जाएगा। पहले चरण में उन शिकायतों पर ध्यान दिया जाएगा, जिनके लिए तत्काल प्रशासनिक कार्रवाई या मौजूदा व्यवस्था में सुधार की जरूरत है। दूसरे चरण में तकनीकी और नीतिगत बदलावों के जरिए दीर्घकालिक समाधान विकसित करने पर विचार किया जाएगा।

अल्पकालिक उपायों में तौल से जुड़ी शिकायतों की जांच, रिकॉर्ड का सत्यापन और प्रयोगशाला परीक्षण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने जैसे कदम उपयोगी हो सकते हैं। वहीं, दीर्घकालिक व्यवस्था में रिकवरी मापन के एकरूप मानक, स्वतंत्र जांच की सुविधा, डिजिटल रिकॉर्ड और शिकायत निवारण की स्पष्ट प्रक्रिया विकसित करने की जरूरत होगी।

यदि इन व्यवस्थाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो किसानों और मिल प्रबंधन के बीच विवाद कम करने तथा गन्ने के मूल्यांकन में भरोसा बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

किसानों की भागीदारी से बनेगी समाधान की रूपरेखा

किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए गठित होने वाली कमेटी में किसान प्रतिनिधियों और वैज्ञानिकों की भागीदारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। किसान खेत और मिल तक गन्ना पहुंचाने की प्रक्रिया से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं से सीधे परिचित होते हैं, जबकि वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञ रिकवरी मापन, नमूना परीक्षण और गुणवत्ता मूल्यांकन के मानकों का आकलन कर सकते हैं।

दोनों पक्षों के अनुभव को प्रशासनिक और नीतिगत स्तर पर जोड़ने से ऐसी सिफारिशें तैयार करने में मदद मिल सकती है, जिन्हें जमीन पर लागू किया जा सके। इसके साथ ही चीनी मिलों का पक्ष सुनना और जांच की प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाए रखना भी आवश्यक होगा, ताकि समाधान सभी संबंधित पक्षों के लिए स्पष्ट और विश्वसनीय हो।

बैठक में शिवराज सिंह चौहान ने किसानों की बात सुनी और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाने का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि किसानों की सेवा उनके लिए भगवान की पूजा के समान है। उनका जोर इस बात पर रहा कि किसानों की शिकायतों को केवल तात्कालिक कार्रवाई तक सीमित न रखा जाए, बल्कि भविष्य में ऐसी समस्याओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्थायी व्यवस्था विकसित की जाए।

उचित एवं लाभकारी मूल्य भी महत्वपूर्ण

केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी ने गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) के निर्धारण की प्रक्रिया तथा लागत आकलन से जुड़े पहलुओं की जानकारी दी। FRP वह न्यूनतम मूल्य है, जिसे निर्धारित व्यवस्था के तहत चीनी मिलों को किसानों को गन्ने के लिए देना होता है।

गन्ना किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए समय पर भुगतान, सही तौल और पारदर्शी रिकवरी मूल्यांकन के साथ उचित मूल्य का महत्व भी बना रहता है। किसानों को मिलने वाली वास्तविक आय इस बात से प्रभावित होती है कि उन्हें निर्धारित मूल्य के अनुसार भुगतान कितनी पारदर्शिता और समयबद्धता से मिलता है।

इसलिए रिकवरी और तौल से जुड़े विवादों के समाधान के साथ भुगतान संबंधी शिकायतों की निगरानी तथा उनके निपटारे की प्रभावी व्यवस्था भी जरूरी है। केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वय से इन पहलुओं पर काम होने से गन्ना उत्पादकों को राहत मिलने की संभावना है।

कमेटी की सिफारिशों पर रहेगी नजर

कर्नाटक और महाराष्ट्र में गन्ने की खेती ग्रामीण अर्थव्यवस्था तथा चीनी उद्योग से जुड़ी आजीविका का महत्वपूर्ण हिस्सा है। गन्ना उत्पादन से किसानों के अलावा खेत मजदूरों, परिवहन सेवाओं और चीनी मिलों से जुड़े अन्य कारोबारों को भी रोजगार मिलता है। ऐसे में गन्ने के मूल्यांकन और भुगतान में पारदर्शिता का प्रभाव व्यापक ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

केंद्र सरकार की ओर से घोषित संयुक्त कमेटी का गठन इस दिशा में अगला महत्वपूर्ण कदम होगा। किसानों के लिए इसका वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि कमेटी शिकायतों की जांच किस तरह करती है, सिफारिशें कितनी समयबद्ध होती हैं और सरकार उन पर कितनी प्रभावी कार्रवाई करती है।

गन्ना किसानों को उम्मीद है कि रिकवरी, तौल और भुगतान से जुड़े विवादों के समाधान के लिए स्पष्ट मानक विकसित होंगे। यदि वैज्ञानिक जांच, पारदर्शी रिकॉर्ड और जवाबदेह शिकायत निवारण व्यवस्था लागू होती है, तो इससे किसानों का भरोसा बढ़ाने और उनके आर्थिक हितों की रक्षा करने में मदद मिल सकती है।