October 2, 2026 4:41 AM

Krishi Times

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भारत-नीदरलैंड्स कृषि और डेयरी सहयोग को नई गति!

भारत-नीदरलैंड्स के बीच पशुपालन, डेयरी और कृषि सहयोग से बीज और बागवानी क्षेत्र में नए अवसर खुलेंगे!

पशुधन व्यापार, एएमआर नियंत्रण और कृषि नवाचार पर बढ़ेगा सहयोग

नई दिल्ली,- भारत और नीदरलैंड्स ने पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन और कृषि क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने 28 सितंबर को नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में नीदरलैंड्स के खाद्य सुरक्षा, मत्स्य पालन एवं बागवानी मंत्री सिल्वियो एरकेंस के साथ द्विपक्षीय बैठक की।

बैठक में दोनों देशों के बीच पशुधन विकास, डेयरी प्रबंधन, पशु स्वास्थ्य, एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) से निपटने और तकनीकी सहयोग को लेकर व्यापक चर्चा हुई। अधिकारियों ने संयुक्त कार्य समूह (Joint Working Group) की प्रगति की समीक्षा करते हुए भविष्य के सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान की।

पशुधन व्यापार को मिलेगा बढ़ावा

बैठक के दौरान नीदरलैंड्स से भारत को जीवित घोड़ों के निर्यात के लिए वेटरनरी हेल्थ सर्टिफिकेट (VHC) का आदान-प्रदान भी किया गया। इसे दोनों देशों के बीच पशुधन व्यापार को सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझ से पशु स्वास्थ्य मानकों, जैव-सुरक्षा उपायों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रक्रियाओं में बेहतर तालमेल स्थापित होगा।

एएमआर चुनौती से निपटने पर जोर

बैठक में एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) के बढ़ते खतरे पर भी चर्चा हुई। दोनों देशों ने वैज्ञानिक ज्ञान, अनुसंधान अनुभव और सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान के माध्यम से इस वैश्विक चुनौती का सामना करने पर सहमति व्यक्त की। पशुधन क्षेत्र में एंटीबायोटिक दवाओं के विवेकपूर्ण उपयोग और पशु स्वास्थ्य प्रबंधन को मजबूत करने पर विशेष बल दिया गया।

कृषि नवाचार और किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस

भारत दौरे पर आए मंत्री सिल्वियो एरकेंस ने कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय तथा मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के अधिकारियों के साथ भी बैठकें कीं। चर्चाओं का केंद्र कृषि नवाचार, उत्पादकता वृद्धि, किसानों की आय बढ़ाना और मजबूत खाद्य आपूर्ति श्रृंखला का निर्माण रहा।

दोनों पक्षों ने माना कि जलवायु परिवर्तन और वैश्विक खाद्य सुरक्षा की चुनौतियों के बीच आधुनिक तकनीकों, अनुसंधान सहयोग और निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ाना आवश्यक है।

बेंगलुरु में डच प्रतिनिधिमंडल करेगा साझेदारी विस्तार

नीदरलैंड्स के मंत्री के साथ 18 डच कंपनियों, ज्ञान संस्थानों और सार्वजनिक संगठनों का प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है। यह प्रतिनिधिमंडल बेंगलुरु में बीज प्रौद्योगिकी, संरक्षित खेती (ग्रीनहाउस टेक्नोलॉजी), जल प्रबंधन, बागवानी और टिकाऊ खाद्य उत्पादन जैसे क्षेत्रों में भारतीय संस्थानों और कंपनियों के साथ सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा करेगा।

मुंबई में कृषि व्यवसाय और बीज क्षेत्र पर मंथन

नई दिल्ली के बाद मंत्री एरकेंस ने मुंबई का दौरा किया, जहां भारत-नीदरलैंड्स कृषि एवं खाद्य क्षेत्र सहयोग को मजबूत बनाने पर कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किए गए।

उन्होंने कृषि मूल्य श्रृंखला से जुड़े उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ कार्यकारी बैठक में भाग लिया और इंडो-डच बिजनेस इकोसिस्टम को मजबूत करने के उपायों पर विचार-विमर्श किया। इसके बाद उन्होंने अनुगा प्रदर्शनी में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेते हुए डच कंपनियों और उनके भारतीय साझेदारों से मुलाकात की।

बीज क्षेत्र में निवेश और तकनीकी सहयोग की संभावनाएं

मुंबई में आयोजित इंडिया-नीदरलैंड्स सीड सेक्टर बिजनेस राउंडटेबल में दोनों देशों के उद्योग, अनुसंधान संस्थानों और नीति निर्माताओं ने भाग लिया। बैठक में बीज अनुसंधान, गुणवत्ता सुधार, नवाचार और निवेश के नए अवसरों पर चर्चा की गई।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और नीदरलैंड्स के बीच बीज क्षेत्र में सहयोग से उच्च गुणवत्ता वाले बीजों की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे कृषि उत्पादकता और किसानों की आय में सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

टिकाऊ कृषि और डेयरी विकास की साझा प्रतिबद्धता

बैठक के अंत में दोनों देशों ने पशुपालन, डेयरी, कृषि नवाचार, खाद्य सुरक्षा और टिकाऊ विकास के क्षेत्रों में दीर्घकालिक सहयोग को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। भारत और नीदरलैंड्स के बीच बढ़ता सहयोग कृषि क्षेत्र में तकनीकी प्रगति, निवेश और ज्ञान साझेदारी के नए अवसर खोल सकता है, जिसका लाभ किसानों, पशुपालकों और कृषि उद्यमों को मिलने की उम्मीद है।