October 19, 2026 5:33 AM

Krishi Times

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22 अक्टूबर से शुरू होगा खेत बचाओ अभियान, 11 राज्य होंगे शामिल!

22 अक्टूबर से शुरू होगा ‘खेत बचाओ अभियान’, 30 नवंबर तक किसानों को दी जाएगी आधुनिक खेती की जानकारी!

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 11 राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ की वर्चुअल बैठक; टिकाऊ खेती, मृदा स्वास्थ्य, जल संरक्षण और किसान कल्याण योजनाओं के प्रचार-प्रसार पर रहेगा जोर

नई दिल्ली। देश में टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने, किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने और केंद्र सरकार की किसान-केंद्रित योजनाओं की जानकारी जमीनी स्तर तक पहुंचाने के उद्देश्य से आगामी ‘खेत बचाओ अभियान’ की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अभियान की रूपरेखा, कार्यान्वयन और जनभागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ वर्चुअल बैठक की।

यह अभियान 22 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक आयोजित किया जाएगा। बैठक में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, गुजरात, उत्तराखंड, राजस्थान, असम, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, बिहार और महाराष्ट्र के कृषि मंत्रियों ने भाग लिया। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव अतिश चंद्रा तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट भी बैठक में उपस्थित रहे।

बैठक में अभियान के प्रमुख उद्देश्यों, गतिविधियों, कार्ययोजना, निगरानी व्यवस्था और किसानों तक प्रभावी पहुंच बनाने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई। अभियान के माध्यम से किसानों को उन्नत कृषि पद्धतियों, प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग, टिकाऊ खेती और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

राज्यों को प्रभावी क्रियान्वयन और जनसंपर्क के निर्देश

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सभी राज्यों से अभियान को गंभीरता के साथ लागू करने और केंद्र तथा राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अभियान की गतिविधियां केवल औपचारिक आयोजनों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इनका वास्तविक लाभ किसानों तक पहुंचना चाहिए।

उन्होंने राज्यों को स्थानीय परिस्थितियों और आवश्यकताओं के अनुरूप कार्यक्रमों की तिथियां निर्धारित करने की छूट देने की बात कही। साथ ही, अभियान की प्रभावी शुरुआत के लिए सभी तैयारियां समय पर पूरी करने पर जोर दिया।

जिला प्रशासन की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने जिला कलेक्टरों को आवश्यक निर्देश जारी करने और राज्य एवं जिला स्तर पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति सुनिश्चित करने का आह्वान किया। इससे अभियान की गतिविधियों की निगरानी, कार्यक्रमों के संचालन और निर्धारित लक्ष्यों की समयबद्ध पूर्ति में मदद मिलेगी।

केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि किसानों तक अभियान का संदेश पहुंचाने के लिए प्रत्यक्ष जनसंपर्क के साथ प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और सोशल मीडिया का व्यापक उपयोग किया जाना चाहिए। जो किसान कार्यक्रमों में सीधे शामिल नहीं हो सकते, उन्हें भी विभिन्न संचार माध्यमों से जागरूकता अभियान से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

मृदा स्वास्थ्य से लेकर प्राकृतिक खेती तक पर रहेगा फोकस

‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत कृषि उत्पादकता बढ़ाने, खेती की लागत को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को प्रोत्साहित करने के लिए कई विषयों पर जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।

प्रमुख विषयों में फसल अवशेष प्रबंधन, एकीकृत कीट प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य में सुधार, जलवायु-अनुकूल कृषि, दलहन एवं तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देना शामिल है। इसके अलावा प्राकृतिक खेती, एकीकृत कृषि प्रणाली, कृषि यंत्रीकरण और पुनर्योजी कृषि पद्धतियों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।

अभियान के दौरान किसानों को उर्वरकों के संतुलित उपयोग, जैविक कृषि आदानों, ग्रीन अमोनिया, जल संरक्षण, फसल विविधीकरण और अंतरफसली खेती के बारे में जानकारी दी जाएगी। क्षेत्र की परिस्थितियों के अनुरूप उपयुक्त फसलों और उन्नत किस्मों को अपनाने के लिए भी किसानों को प्रेरित किया जाएगा।

धान की कटाई के बाद खाली रहने वाले खेतों का बेहतर उपयोग करने पर विशेष ध्यान रहेगा। इसका उद्देश्य खेतों की उत्पादकता बढ़ाने, फसल सघनता में सुधार और उपलब्ध कृषि भूमि का अधिक प्रभावी उपयोग करने के प्रति किसानों को जागरूक करना है।

फार्मर आईडी, फसल बीमा और किसान क्रेडिट कार्ड की भी मिलेगी जानकारी

अभियान में किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं और कृषि सेवाओं से जोड़ने के लिए भी विशेष गतिविधियां प्रस्तावित हैं। इनमें किसान पहचान पत्र (फार्मर आईडी) का निर्माण, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई), किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के तहत पात्र किसानों को लाभ पहुंचाना और बीज वितरण जैसे विषय शामिल हैं।

इसके साथ ही मृदा स्वास्थ्य कार्ड, कृषि यंत्रों के वितरण, कृषि संसाधनों की उपलब्धता और किसानों के लिए संचालित अन्य योजनाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाई जाएगी।

व्यापार समझौतों से संबंधित अवसरों की जानकारी भी अभियान के विषयों में शामिल है, ताकि किसान कृषि उत्पादों के लिए उपलब्ध बाजार अवसरों और संबंधित प्रावधानों को समझ सकें।

50-50 लाख प्रतिभागियों तक पहुंचने का लक्ष्य

अभियान को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ने के लिए कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसी (एटीएमए) और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के माध्यम से बड़े स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की योजना प्रस्तुत की गई।

बैठक में प्रस्तुत योजना के अनुसार, एटीएमए और आईसीएआर के लिए अलग-अलग 50-50 लाख प्रतिभागियों तक पहुंचने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त, कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) और एटीएमए को मिलाकर कुल 4,150 टीमों के गठन अथवा भागीदारी का लक्ष्य रखा गया है।

अभियान में 12,000 से अधिक वैज्ञानिकों तथा एटीएमए के अधिकारियों और कार्यकर्ताओं की भागीदारी अपेक्षित है। ये विशेषज्ञ किसानों से सीधे संवाद करेंगे, वैज्ञानिक कृषि तकनीकों की जानकारी देंगे और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार खेती में सुधार के व्यावहारिक उपायों से अवगत कराएंगे।

योजना में अभियान की अवधि के दौरान कुल 1.5 लाख बैठकों का लक्ष्य भी रखा गया है। इन बैठकों और कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को आधुनिक तकनीकों, बेहतर कृषि प्रबंधन और सरकारी सहायता से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा।

कृषि वैज्ञानिकों और विस्तार कार्यकर्ताओं की होगी अहम भूमिका

अभियान में कृषि विज्ञान केंद्रों, आईसीएआर के संस्थानों और कृषि विस्तार तंत्र की सक्रिय भागीदारी महत्वपूर्ण होगी। उन्नत कृषि तकनीकों का प्रदर्शन, क्षमता निर्माण कार्यक्रम और वैज्ञानिकों के साथ किसानों का संवाद इसकी प्रमुख गतिविधियों में शामिल रहेंगे।

कृषि वैज्ञानिक किसानों को मृदा परीक्षण, संतुलित पोषण प्रबंधन, जल संरक्षण, फसल सुरक्षा और जलवायु के अनुरूप कृषि पद्धतियों के संबंध में व्यावहारिक मार्गदर्शन दे सकेंगे। इससे किसानों को वैज्ञानिक अनुसंधान और खेतों में अपनाई जा सकने वाली तकनीकों के बीच बेहतर संबंध स्थापित करने में मदद मिलेगी।

केंद्र और राज्यों के समन्वय से अभियान को सफल बनाने की तैयारी

बैठक के समापन पर केंद्रीय कृषि मंत्री ने सभी राज्यों के कृषि मंत्रियों की भागीदारी का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, जिला प्रशासन और कृषि संस्थानों से सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया।

अभियान की सफलता के लिए जमीनी स्तर पर नियमित संवाद, कार्यक्रमों की निगरानी, वैज्ञानिकों की भागीदारी और किसानों तक योजनाओं की जानकारी पहुंचाना महत्वपूर्ण होगा।

कृषि क्षेत्र में अभियान की उपयोगिता इस बात से तय होगी कि किसानों तक कितनी प्रभावी ढंग से वैज्ञानिक जानकारी पहुंचे, उपलब्ध योजनाओं का लाभ पात्र किसानों को मिले और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को खेतों में अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिले। इस दिशा में ‘खेत बचाओ अभियान’ को जागरूकता, तकनीकी मार्गदर्शन और किसान-केंद्रित सेवाओं के बीच समन्वय स्थापित करने की पहल के रूप में देखा जा रहा है।